चीन का गला घोंटने की तैयारी! इंडियन एयरफोर्स ने बनाया 'ड्रैगन स्क्वायड' के साथ चीनी चोक प्वाइंट पर चक्रव्यूह
Indian Air Force: चीन के खिलाफ भारत ने जल, नभ और थल.. तीनों जगहों से अभूतपूर्व तैयारियां शुरू कर दी हैं और भारत का मकसद साफ है, कि युद्ध की स्थिति में चीन को बचने का एक भी मौका नहीं दिया है, जिसके लिए स्ट्रैटजिक प्वाइंट्स पर अपनी शक्ति को बढ़ाना काफी ज्यादा जरूरी हो जाता है।
लिहाजा, चीन पर नज़र रखते हुए, भारतीय वायु सेना (IAF) के 'ड्रैगन' जगुआर मैरीटाइम स्ट्राइक फाइटर जेट्स ने हिंद महासागर क्षेत्र के प्रवेश द्वार पर स्थित द्वीपों में एयर पावर को प्रदर्शित करने के लिए अंडमान और निकोबार में एक त्रि-सेवा अभ्यास में भाग लिया है, जो चीन के चोकपॉइंट मलक्का जलडमरूमध्य के काफी करीब है।

ये अभ्यास कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि इंडियन एयरफोर्स ने ये अभ्यास मलक्का जलडमरूमध्य के करीब किया है और चीन अपने व्यापार का एक बड़ा हिस्सा मलक्का जलडमरूमध्य से ही करता है और भारत अगर युद्ध की स्थिति में मलक्का जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देता है, तो चीन को घुटने पर आने में एक हफ्ते का भी वक्त नहीं लगेगा।
चीन के कमजोर नस पर होगा सीधा वार
572 द्वीपों वाली अंडमान और निकोबार द्वीप श्रृंखला भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को संतुलित करने की भारत की रणनीति में एक आवश्यक हिस्से के रूप में उभर रही है।
पिछले एक दशक में, हिंद महासागर में चीनी नौसेना के सतही जहाज और पनडुब्बियां अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, जिसके बाद ये तय हो गया है, कि हिंद महासागर में अब चीन और भारत के बीच वर्चस्व की जंग होने वाली है और भारत, किसी भी हाल में हिंद महासागर में चीन को पैर पसारने नहीं दे सकता है।
भारत पहले ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के द्वीपसमूहों पर सैन्य संपत्ति विकसित करने की राह पर चल पड़ा है, जो मलक्का जलडमरूमध्य के ठीक मुहाने पर स्थित है, जो दक्षिण चीन सागर में चीन का प्रवेश द्वार है।
अंडमान निकोबार कमांड, भारतीय सशस्त्र बलों की एकमात्र ट्राई-सर्विस थिएटर कमांड है, जो एक विशाल इंटर-फोर्स वॉरगेम 'एक्सरसाइज द्वीपशक्ति-23' का आयोजन कर रही है। भारतीय वायुसेना का नंबर 6 स्क्वाड्रन, 'द ड्रैगन्स' रणनीतिक कार निकोबार बेस से संचालित होता है और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास वायुशक्ति के रणनीतिक बल को प्रदर्शित करने वाला एक समुद्री अटैक मिशन चलाता है।

कितना शक्तिशाली है ये अभ्यास?
भारतीय सेना, नौसेना, वायु सेना और कोस्ट गार्ड इस एक्सरसाइज में हिस्सा ले रहे हैं, जिसका मकसद ऑपरेशनल शक्ति की क्षमता का आकलन करना है।
इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना की हवाई संपत्तियों का एक बड़ा कन्वर्जेंस देखा जा रहा है। इंडियन एयरफोर्स के A-50 फाल्कन एयरबोर्न वार्निंग, कंट्रोल और कमांड सिस्टम और फ्रंटलाइन Su-30MKI ने द्वीपों से लंबी दूरी की गहरी स्ट्राइक ड्रिल की है।
आपको बता दें, कि भारतीय और प्रशांत महासागरों के संगम पर स्थित, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को दुनिया की सबसे रणनीतिक रूप से स्थित द्वीप श्रृंखलाओं में से एक कहा जाता है, जो भारत का हिस्सा है और उसी को काउंटर करने के लिए चीन पिछले कई सालों से हाथ-पैर मार रहा है। भारत की इस शक्ति को काउंटर करने के लिए चीन, म्यांमार के सैन्य शासकों से डील करने की कोशिश कर रहा है, ताकि म्यांमार के एक द्वीप पर वो अपना सैन्य अड्डा बना सके।
ऐसा इसलिए, क्योंकि 572 द्वीपों वाले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह का सबसे उत्तरी प्वाइंट, म्यांमार से सिर्फ 22 समुद्री मील दूर है, और इसका सबसे दक्षिणी प्वाइंट, इंडोनेशिया से सिर्फ 90 समुद्री मील दूर है। इसके अलावा, ये द्वीप बंगाल की खाड़ी, छह डिग्री और दस डिग्री चैनलों को नियंत्रित करते हैं, जिनका उपयोग 60,000 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाज करते हैं।

अंडमान-निकोबार के लिए क्या है प्लान?
भारत सरकार 10 साल के बुनियादी ढांचे के विकास के हिस्से के रूप में द्वीपों की सैन्य संपत्ति विकसित कर रही है। बड़े विमानों के संचालन में सहायता के लिए दक्षिण में कैंपबेल बे (आईएनएस बाज़) रनवे को 10,000 फीट तक बढ़ाया जाएगा। कामोर्टा में एक और 10,000 फुट के रनवे की योजना बनाई गई है।
भारत, इन द्वीपों में अपने सुखोई Su-30MKI और जगुआर समुद्री लड़ाकू जेट तैनात कर रहा है। भारतीय नौसेना की पोसीडॉन पनडुब्बी शिकारी पी-8आई भी यहीं से संचालित होती हैं। सैन्य बुनियादी ढांचे का विकास यहां से इन संपत्तियों की स्थायी तैनाती को सक्षम करने के लिए है।
सैन्य संपत्तियों के अलावा, भारत, इन द्वीपों में नागरिक बुनियादी ढांचे का भी विकास कर रहा है। कैंपबेल खाड़ी में एक ट्रांस-शिपमेंट हब की योजना बनाई गई है, जो यूरोप और अफ्रीका को एशिया से जोड़ने वाले मलक्का जलडमरूमध्य और पूर्व-पश्चिम शिपिंग मार्ग के नजदीक होगा।
बांग्लादेश, थाईलैंड, म्यांमार और इंडोनेशिया से इसकी नजदीकी भी इसे एक और फायदा देती है। हाल ही में, भारत ने सात दूरस्थ द्वीप श्रृंखलाओं को हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करने के लिए चेन्नई-अंडमान और निकोबार अंडरसी इंटरनेट केबल का उद्घाटन किया है।
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