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चीनी हाइपरसोनिक मिसाइल को टक्कर दे पाएगा भारत का 'अग्निबाण'? जानें किसमें कितना है दम?

भारत ने इस हफ्ते महाविनाशक अग्नि-5 मिसाइल का टेस्ट कर लिया है, जबकि चीन ने भी हाइपरसोनिक मिसाइल तैयार कर लिया है। आईये जानते हैं, दोनों मिसाइलों में कौन ज्यादा शक्तिशाली है।

नई दिल्ली, अक्टूबर 31: ड्रैगन के साथ भारी तनाव के बीच भारत ने अपने सबसे घातक मिसाइल अग्नि-5 का इस हफ्ते कामयाबी के साथ परीक्षण कर लिया है और इस परीक्षण के साथ ही भारत ने दिखा दिया है कि, दुश्मनों का मुंह किसी भी वक्त तोड़ने के लिए भारत तैयार है। लेकिन, इसके साथ ही चर्चा शुरू हो गई है, कि आखिर चीन और भारत के बीच मिसाइल टेक्नोलॉजी को लेकर जो रेस छिड़ी है, उसमें अभी तक कौन आगे है? भारत की मिसाइल क्षमता कितनी उन्नत है? भारत के मिसाइलों को रोकने में क्या चीन कामयाब हो पाएगा? ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब हर भारतवासी जानना चाहता है।

भारत का अग्नि-5 मिसाइल

भारत का अग्नि-5 मिसाइल

अग्नि -5 बैलिस्टिक मिसाइल, 5,000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है और भारत में अग्नि-5 मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया गया है। अग्नि-5 मिसाइल के जरिए अब भारत बिजली की रफ्तार से 5 हजार किलोमीटर तक की दूरी में परमाणु बम गिरा सकता है और चीन के वो उत्तरी शहर, जो अभी तक भारत की मिलाइलों की जद से बाहर थे, वो भी भारत की रडार में आ चुके हैं। परमाणु बमों को ले जाने में सक्षम भारत का अग्नि-5 मिसाइल 5,000 किमी की रेंज के साथ इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के लिए भारत की तरफ से दावेदार है। भारत ने अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण ऐसे वक्त में किया है, जब भारत और चीन के बीच संबंध खराब हैं, और इसी महीने रिपोर्ट आई है कि, जुलाई और अगस्त के महीने में चीन ने अंतरिक्ष में हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है।

अग्नि-5 मिसाइल क्या है?

अग्नि-5 मिसाइल क्या है?

अग्नि 5 भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है, यह चीन की हाइपरसोनिक मिसाइल की तुलना में भारत के लिए कितना उपयोगी है और आईसीबीएम और नई हाइपरसोनिक तकनीक के बीच क्या अंतर है, अब हम इसे समझने की कोशिश करते हैं।

अग्नि 5 भारत की लंबी दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 5,000 किमी दूर स्थित लक्ष्य को सटीक निशाना लगा सकती है। मिसाइल टेक्नोलॉजी में भारत के लिए यह रेंज हासिल करने का मतलब ये है, कि भारत अब चीन के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकता है और वहां पर इस मिसाइल के जरिए परमाणु बम से हमला कर सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर एक ICBM को कम से कम 5,500 किमी की रेंज वाली मिसाइल बनने की आवश्यकता होती है, लिहाजा भारत की तरफ से अग्नि-5 मिसाइल ICBM के लिए सबसे मजबूत दावेदार है। भारत का ये मिसाइल अब अफ्रीका और यूरोप के कई हिस्सों के साथ-साथ अन्य महाद्वीपों के देशों तक पहुंच सकता है।

8 हजार किलोमीटर की क्षमता?

8 हजार किलोमीटर की क्षमता?

हालांकि सरकार ने दावा किया है कि, अग्नि-5 मिसाइल की अधिकतम सीमा लगभग 5,000 किमी है, लेकिन कई रिपोर्टों से पता चलता है कि, असल में इसकी वास्तविक सीमा रेखा 8,000 किमी तक है और आठ हजार किलोमीटर के अंदर अग्नि-5 मिसाइल से किसी भी लक्ष्य को भेदा जा सकता है। इसके साथ ही परमाणु सक्षम मिसाइल करीब 1,500 किलोग्राम का वारहेड ले जा सकती है और इसका लॉन्च वजन 50,000 किलोग्राम है, जो इसे देश की सबसे शक्तिशाली मिसाइलों में से एक बनाता है।

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    अग्नि मिसाइलों का इतिहास क्या है?

    अग्नि मिसाइलों का इतिहास क्या है?

    भारत ने 1989 में मिसाइलों की अग्नि श्रृंखला का परीक्षण अग्नि-1 के पहले परीक्षण के साथ शुरू किया था, जो एक इंटरमीडिएट रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग एक हजार किलोमीटर थी। उस समय केवल अमेरिका, तत्कालीन सोवियत संघ, चीन, फ्रांस और इजराइल के पास ही IRBM तकनीक थी। उसके बाद से फिर रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) प्रयोगशालाओं ने इस पर काम करना जारी रखा, और बुधवार को अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण करने के बाद भारत ने विश्व समुदाय के सामने अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर दिया है। IRBM-सक्षम राष्ट्रों के अलावा इस समय केवल उत्तर कोरिया और यूके के पास ही ICBM तकनीक है।

    अग्नि-5 मिसाइल क्यों जरूरी है?

    अग्नि-5 मिसाइल क्यों जरूरी है?

    अग्नि-5 मिसाइल के परीक्षण के बाद भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि, भारत का मिसाइल परीक्षण देश की न्यूनतम प्रतिरोध को बनाए रखने और भारत की घोषित नीति के मुताबिक है, जिसके तहत भारत का सिद्धांत 'हथियार का पहला इस्तेमाल नहीं करने' की प्रतिबद्धता के साथ है। भारत के अग्नि-5 मिसाइल को जो चीज सबसे घातक बनाती है, वो ये है कि, इसे कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। यानि, अग्नि-5 मिसाइल को किसी बस स्टैंड, किसी रेलवे स्टेशन, किसी सड़क...यानि किसी भी सतह से लॉन्च किया जा सकता है। इसके साथ ही इसमें ऐसी टेक्नोलॉजी है, कि किसी भी जलवायु से इसके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता है और अग्नि-5 हर मौसम और हर परिस्थिति में बेहद कठोरता से व्यवहार करने में सक्षम है। इसके साथ ही भारत ने अग्नि-6 के निर्माण पर भी काम शुरू कर दिया है, जिसकी क्षमता आठ हजार किलोमीटर होने की संभावना है।

    चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत

    चीन के हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत

    चीन के बारे में दावा किया गया है कि चीन ने इसी साल जुलाई और अगस्त महीने में हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया है, जो अंतरिक्ष से कहीं भी और कभी भी किसी भी क्षेत्र पर हमला करने में सक्षम है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, चीन के पास अब 12 हजार से 15 हजार किलोमीटर तक मार करने वाली इटरकॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइले हैं। 2018 में एक अमेरिकी रिपोर्ट में दावा किया गया था कि, चीन के पास इस तरह की 75 से 100 मिसाइलें मौजूद हैं, जिसमें कम दूरी, मध्यम दूरी और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें मौजूद हैं और इस बात की पूरी संभावना है कि, इन तीन सालों में चीन ने कई और मिसाइलों का निर्माण किया होगा।

    चीन की मिसाइलों की क्षमता

    चीन की मिसाइलों की क्षमता

    चीन के मिसाइलों की क्षणता काफी ज्यादा है और वो भारत के सभी हिस्सों को तो अपने रेंज में रखता ही है, इसके साथ ही अब चीनी मिसाइलों की रेंज में अमेरिका भी आ चुका है। चीन ने डोंगफेंग मिसाइलों का निर्माण 1950 के दसक में सोवियत संघ की मदद से शुरू किया था और पहले फेज में चीन ने डोंगफेंग-1 और डोंगफेंग-2 मिसाइलों का निर्माण किया था, जिसकी मारक क्षमता 500 किलोमीटर से 1250 किलोमीटर के बीच थी, हालांकि, अब उन मिसाइलों को चीन अपनी सेना से हटा चुका है। चीन ने डोंगफेंग सीरिज में डीएफ-41 का निर्माण कर चुका है, जिसकी मारक क्षमता 12 हजार से 15 हजार किलोमीटर के बीच है। डीएफ-41 मिसाइल के बारे में ऐसी रिपोर्ट है कि, इस मिसाइल के जरिए एक बार में कम से कम 10 परमाणु बम को ले जाया जा सकता है, जिनका वजन 100 किलोटन से एक मेगाटन के बीच हो सकता है।

    चीन के मिसाइल टेक्नोलॉजी से चिंताएं?

    चीन के मिसाइल टेक्नोलॉजी से चिंताएं?

    अमेरिका के सर्वोच्च सैन्य अधिकारी जनरल मार्क मिले, जो ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष हैं, उन्होंने चीन की इस उपलब्धि को 'स्पुतनिक मोमेंट' करार दिया है। स्पुतनिक मोमेंट से उनका आशय उस घटना से है, जब 1957 में स्पुतनिक उपग्रह का सफल प्रक्षेपण कर पहली बार अंतरिक्ष सेक्टर में रूस ने अमेरिका को पछाड़ दिया था। ऐसे में अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने करीब-करीब यह संकेत दे दिया है कि, चीन ने हाइपरसोनिक हथियारों की रेस में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है। लिहाजा, यकीनन भारत के लिए तो ये चिंता की बात है ही, इसके साथ ही ये अमेरिका के लिए भी खतरे की घंटी के बजने जैसा है।

    अमेरिका को बर्बाद करने की क्षमता

    अमेरिका को बर्बाद करने की क्षमता

    चीन द्वारा हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमता विकसित करने का मतलब यह है कि, उसके पास संभावित रूप से अमेरिका की एयर डिफेंस सिस्टम को बर्बाद करने की क्षमता हासिल हो चुकी है। हालांकि चीन के पास अमेरिका पर हमला करने के लिए पहले से ही ICBM मिसाइलें हैं, लेकिन हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहनों की अप्रत्याशितता से उन्हें काफी फायदा मिलगा। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन चाहे तो अब एक मिनट से कुछ कम समय में अमेरिका पर मिसाइल हमला कर सकता है और अमेरिका के पास अभी ऐसा डिफेंस सिस्टम नहीं है, जो चीन के हाइपरसोनिक हथियार को बीच रास्ते में ध्वस्त कर सके।

    चीन के पास किन क्षमताओं से लैस मिसाइले हैं?

    चीन के पास किन क्षमताओं से लैस मिसाइले हैं?

    पेंटागन ने पिछले साल एक रिपोर्ट में कहा था कि, चीन के पास पारंपरिक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों की क्षमता अब अमेरिका से ज्यादा हो चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन के पास अब 500 से 5,500 किलोमीटर के बीच मार करने वाली 1,250 से ज्यादा जमीन से लॉन्च करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल क्रूज मिसाइलें हैं, जबकि अमेरिका के पास एक प्रकार का पारंपरिक GLBM है जिसकी रेंज 70 से 300 किलोमीटर है और कोई GLCM नहीं है। लेकिन जब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की बात आती है, तो चीन ने एक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) बनाई है, जो चीन की रणनीतिक भूमि-आधारित परमाणु और पारंपरिक मिसाइल बलों की देखभाल करती है। पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन "नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) विकसित कर रहा है जो उसके परमाणु-सक्षम मिसाइल फोर्सेस में काफी सुधार करेगी" और चीन के भूमि-आधारित आईसीबीएम, जो अमेरिका को धमकी देने में सक्षम हैं, उसकी संख्या करीब 200 है।

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