India Vs US: ट्रम्प की बेवक़ूफ़ियों का फ़ायदा कैसे मिल रहा चीन को, वर्ल्ड पावर बदलने की शुरुआत

India Vs US: चीन के तियानजिन शहर में शंघाई कॉर्पोरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) का महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। ऐसे समय में जब अमेरिका की आक्रामक टैरिफ नीतियों के कारण इन तीनों देशों में नाराजगी है, यह बैठक वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। यह बैठक ट्रंप की टैरिफ दादागीरी का भी एक नतीजा है, क्योंकि भारत की इस बैठक में साझेदारी अहम मानी जा रही है।

ट्रंप की धमकी ने बदला रुख

अमेरिकी इकॉनोमिस्ट रिचर्ड वोल्फ ने RT को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीतियों से रूस, चीन और भारत जैसे ब्रिक्स देशों में निकटता बढ़ रही है। वोल्फ के अनुसार, अमेरिका अपनी टैरिफ धमकियों से ब्रिक्स को एक 'हॉटहाउस' में बदल रहा है। उन्होंने कहा, "अगर अमेरिका भारी-भरकम टैरिफ लगाकर भारत के लिए अपने दरवाजे बंद करता है, तो जाहिर है वह अपनी वस्तुएं दूसरे देशों को बेचने लग जाएगा।"

India Vs US

अमेरिका बनाम ब्रिक्स

वोल्फ ने रूस का उदाहरण देते हुए समझाया कि प्रतिबंधों के बाद उसने नए बाजार खोजे। इसी तरह, भारत भी अपना निर्यात अमेरिका के बजाय ब्रिक्स के अन्य देशों को बेचेगा। ऐसे में 24 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाला ब्रिक्स एक बड़ा संगठन बनकर उभर सकता है।

QUAD Vs RIC

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि RIC (रूस, भारत, चीन) गठबंधन क्वॉड (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत) के खिलाफ एक बड़ी संभावना बन सकता है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी चीन यात्रा के दौरान RIC को मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की थी। अब प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा में पुतिन और जिनपिंग के साथ इस पर चर्चा की जा सकती है।

क्या क्वॉड छोड़ेगा भारत?

जानकारों के अनुसार, यदि RIC मजबूत होता है, तो यह प्रशांत महासागरीय क्षेत्र में चीन के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वॉड के सपने को तोड़ सकता है। अमेरिका क्वॉड को इस क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत गठबंधन बनाना चाहता है। ऐसे में अमेरिका को ये भी खतरा है कि कहीं भारत क्वाड में अपनी स्थिति और रणनीति दोनों बदलकर RIC के पक्ष में अपना पलड़ा न मजबूत कर दे।

तियानजिन बनेगा नया गढ़?

तियानजिन अपनी मजबूत स्थिति और बीजिंग के वाणिज्यिक प्रवेश द्वार के रूप में अपनी भूमिका के लिए प्रसिद्ध रहा है। यह अपने बुने हुए हस्तशिल्प उत्पादों, टेराकोटा मूर्तियों, हाथ से चित्रित लकड़ी के ब्लॉक प्रिंट और विविध समुद्री भोजन के लिए जाना जाता है। 11,760 वर्ग किलोमीटर में फैला यह शहर स्टील फैक्ट्रियों, भारी मशीनरी और जहाज निर्माण-मरम्मत के लिए भी प्रसिद्ध है।

इंटरनेशनल GDP में ब्रिक्स निकला आगे

वोल्फ ने अपने साक्षात्कार में बताया कि इंटरनेशनल जीडीपी में ब्रिक्स देशों का योगदान अब 35% है, जबकि G-7 का योगदान 28% है। ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगी वैश्विक आबादी का केवल 4.5% हैं।

'अमेरिका नहीं रहा महाशक्ति'

वोल्फ ने यह भी कहा कि अमेरिका अब वह महाशक्ति नहीं रहा जो पहले हुआ करता था। वह "एक हताश समाज" की तरह व्यवहार कर रहा है, अपने सहयोगियों को त्याग रहा है और इतिहास की अनदेखी कर रहा है। एक दौर था कि पूरी दुनिया अमेरिका की चेतावनियों से डरती थी, लेकिन अब उसकी धमकियों को ब्राजील जैसे देश पागलपन कहकर टाल देते हैं या फिर उसका मजाक बनता है।

ट्रंप को नहीं मिलेगी सफलता

एक अन्य अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने भी ब्रिक्स जैसे समूहों को मजबूत करने की वकालत की है। उन्होंने रीजनल कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) जैसे क्षेत्रीय व्यापार समूहों को एक विकल्प के रूप में विकसित करने की बात कही। इंडिया टुडे को दिए एक विशेष साक्षात्कार में सैक्स ने कहा, "वह (ट्रंप) भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिलने वाली।"

सैक्स ने आगे कहा कि ट्रंप ब्रिक्स देशों को एकजुट करने और भारत को रूस, चीन, ब्राजील व अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के करीब लाने में सफल हो रहे हैं। उनके अनुसार, ये टैरिफ अमेरिकी उद्योग को कम प्रतिस्पर्धी बनाकर अमेरिका को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग-थलग कर रहे हैं। सैक्स ने RCEP को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया, क्योंकि उनका मानना है कि दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया का संयोजन अगले 25 से अधिक वर्षों तक अर्थव्यवस्था के लिए विश्व शक्ति केंद्र होगा।

फुस्स हो रही ट्रंप की दादागीरी

ट्रंप ने पहले चीन पर टैरिफ लगाया, जवाब में चीन ने डबल टैरिफ लगाया तो ट्रंप को झुकना पड़ा। इसके बाद ट्रंप ने पुतिन को धमकाने की कोशिश की लेकिन पुतिन नहीं झुके तो ट्रंप को उन्हें मिलने के लिए अलास्का बुलाना पड़ा। उस मुलाकात में भी पुतिन का स्कोर ज्यादा और यूक्रेन पर हमले और तेज हुए। ब्राजील के पीएम ने प्रधानमंत्री मोदी से व्यापार संबंधी बात की है और प्रधानमंत्री मोदी अब ट्रंप का फोन नहीं उठा रहे हैं। ये बताता है कि ट्रंप की दादागीरी अब फुस्स हो रही है।

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