टैरिफ टकराव के बीच भारत-अमेरिका के बीच मेगा मिलिट्री ड्रिल, क्या पाकिस्तान के लिए है सीधा संदेश?
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद से अलग दोनों देशों ने अलास्का में अपने अब तक के सबसे बड़े सैन्य युद्धाभ्यास की शुरुआत कर दी है। वहीं, नवंबर में पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र (Western Pacific) में गुआम के पास 'क्वाड' देशों- भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच मालाबार नौसैनिक अभ्यास (Naval Exercise) आयोजित करने की भी योजना है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद भले ही भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट दिखी हो, लेकिन रक्षा अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो दशकों में बनी रणनीतिक साझेदारी-जिसकी नींव रक्षा सहयोग है- अभी टूटने के खतरे में नहीं है। एक अधिकारी ने कहा, 'अभी शुरुआती दिन हैं, हालांकि आपसी विश्वास को झटका लगा है, लेकिन दांव पर बहुत कुछ है।'

अरबों डॉलर की डिफेंस डील
भारत और अमेरिका के बीच डिफेंस डील लगातार आगे बढ़ रही हैं। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) द्वारा 99 GE-F404 टर्बोफैन इंजनों की डिलीवरी, जिसका कॉन्ट्रैक्ट एचएएल (HAL) ने अगस्त 2021 में 716 मिलियन डॉलर में किया था, दो साल की देरी के बाद अब शुरू हो रही है। इसके अलावा, भारत GE के साथ 1 अरब डॉलर में 113 और इंजनों के सौदे की तैयारी में है।
भारत को 2029-30 तक 31 सशस्त्र MQ-9B 'प्रीडेटर' हाई-एल्टीट्यूड, लॉन्ग-एंड्योरेंस ड्रोन भी मिलने हैं, जिनका ऑर्डर पिछले साल अक्टूबर में 3.8 अरब डॉलर में दिया गया था।
रूस और चीन के साथ बैलेंस
भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की नीति के तहत रूस के साथ दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी पर कायम है। वहीं, सीमा पर अविश्वास के बावजूद चीन के साथ रिश्तों को संतुलित करने की कोशिशें भी जारी हैं।
फोर्ट वेनराइट में हाई-एल्टीट्यूड ट्रेनिंग
अलास्का के फोर्ट वेनराइट की उप-आर्कटिक जलवायु में हो रहे इस युद्धाभ्यास में मद्रास रेजिमेंट के 450 से अधिक सैनिक हिस्सा ले रहे हैं। वे 14 सितंबर तक अमेरिका की 11वीं एयरबोर्न डिविजन की आर्कटिक वॉल्व्स ब्रिगेड कॉम्बैट टीम की 5वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट बॉबकैट्स के साथ कई तरह के हाई-एल्टीट्यूड सामरिक अभ्यास करेंगे।
क्वाड का 29वां मालाबार अभ्यास
इस बीच, भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान गुआम के तट पर होने वाले 29वें मालाबार नौसैनिक अभ्यास के लिए परिचालन संबंधी तैयारियों को अंतिम रूप दे रहे हैं। मालाबार ड्रिल 1992 में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के तौर पर शुरू हुई थी, लेकिन अब यह क्वाड देशों का बड़ा साझा मंच बन चुकी है।
भारत और अमेरिका का अलास्का में 'युद्ध अभ्यास 2025' सिर्फ सैन्य ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सामरिक (Strategic) संदेश देने वाला कदम भी माना जा रहा है। जहां एक ओर यह ड्रिल इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती दावेदारी पर कड़ा जवाब समझी जा रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के लिए भी यह साफ संकेत है कि अमेरिका अब क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में भारत के साथ खड़ा है।
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