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Diplomacy: अमेरिका में मिलती रहे भारतीय प्रोफेशनल्स को नौकरी.. क्या डोनाल्ड ट्रंप से वादा करा पाएंगे एलन मस्क?

India-US Diplomacy: डोनाल्ड ट्रंप की नीति 'अमेरिका फर्स्ट' की है और उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय प्रोफेशनल्स इस रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हैं। ट्रंप के दूसरा कार्यकाल संभालने से पहले ही अमेरिका में इस बात पर विवाद शुरू हो चुके हैं, कि क्या विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद कर देने चाहिए।

20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाले डोनाल्ड ट्रंप को शायद इस वक्त 'आव्रजन' को लेकर सबसे बड़ी दुविधा का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि उनकी रिपब्लिकन पार्टी के ज्यादातर सांसद इसके खिलाफ हैं, जबकि खुलकर उनके समर्थन में उतरे एलन मस्क चाहते हैं, कि विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए अमेरिका के दरवाजे बंद ना हो।

India-US Diplomacy

जब हम विदेशी प्रोफेशनल्स की बात करते हैं, तो H-1B वीजा को लेकर अमेरिका में हो रहे विवाद की बात कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा लाभार्थी भारत है। सबसे ज्यादा H-1B वीजा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलता है और उसके बाद चीनी प्रोफेशनल्स होते हैं। इसीलिए, भारत के लिए ये विवाद काफी अहम हो जाता है।

डोनाल्ड ट्रंप क्यों दुविधा में फंसे हैं?

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप की परेशानी की वजह उनके प्रमुख सलाहकार और टेक-बिलियनेयर एलन मस्क और कट्टरपंथी आव्रजन-प्रतिबंधकों के बीच होने वाला टकराव है। विदेशी कामगारों को वीजा जारी करने पर रोक लगाने की मांग तो वैसे सालों से की जा रही है, लेकिन ट्रंप की जीत के बाद ये सबसे बड़े मुद्दों में से एक बन गया है। हालांकि, अमेरिका जिस चीज का सामना कर रहा है या करेगा, वह अनोखी नहीं है। बल्कि पूरी दुनिया, विशेष रूप से विकसित दुनिया, बढ़ती उम्र की आबादी की घटना पर बहस कर रही है, जो तेजी से "जनसंख्या में कमी" का युग बनता जा रहा है।

एलन मस्क जानते हैं, कि दुनिया को कुशल प्रोफेशनल्स की जरूरत है, जिनकी संख्या सीमित है। इसलिए, उनकी मांग है और रहेगी, और कुछ देश उन्हें प्रवास करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। न्यूजीलैंड ने पिछले सप्ताहांत वीजा प्रतिबंधों को कम करके कुछ ऐसा ही किया है, ताकि सक्षम प्रोफेशनल्स को ज्यादा आसानी से रोजगार मिल सके।

हाल ही में किए गए एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक कामकाजी आयु वर्ग की आबादी 2070 के बाद तेजी से घटने वाली है। 2023 में, चीन की सिर्फ 20% आबादी 60 वर्ष या उससे ज्यादा की मौजूदा सेवानिवृत्ति श्रेणी में थी। 2100 तक, यह चीन की आबादी का 52% से ज्यादा हो जाएगा। वहीं, यूरोप के ज्यादातर हिस्सों में भी यह चुनौती काफी गंभीर है। 2022 में, यूरोपीय संघ की कामकाजी आयु वर्ग की आबादी कुल आबादी का लगभग 64% थी। अनुमान है कि 2100 तक यह हिस्सा घटकर लगभग 54.4% रह जाएगा।

जी7 समूह के देशों में साल 2100 तक कामकाजी आयु वर्ग की आबादी में अनुमानित परिवर्तन काफी चौंकाने वाला है। कनाडा (+18%) और संयुक्त राज्य अमेरिका (+8%) सकारात्मक हैं, और यूके (-5%), फ्रांस (-8%), जर्मनी (-27%), जापान (-46%) और इटली (-52%) नकारात्मक हैं। यदि कनाडा और अमेरिका पॉजिटिल दिख रहे हैं, तो ऐसा इसलिए, क्योंकि ये देश दूसरे देशों के युवा प्रोफेशनल्स के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं और जैसे ही वो दरवाजे बंद करेंगे, उनके पास भी काम करने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी होनी शुरू हो जाएगी।

काम करने वालों की संख्या में गिरावट क्यों है?

राजनीति विज्ञानी निकोलस एबरस्टेड ने फॉरेन अफेयर्स पत्रिका में अपने लेख में बताया है, कि जन्म दर में गिरावट के साथ, अधिक से अधिक समाज व्यापक और अनिश्चित जनसंख्या ह्रास के युग की ओर बढ़ रहे हैं, जो आखिरकार पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा।

जाहिर है, दुनिया का औसत प्रजनन स्तर लगातार नीचे की ओर बढ़ रहा है। उप-सहारा अफ्रीका के क्षेत्र को छोड़कर, हर देश में यह गिरावट देखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग (यूएनपीडी) के मुताबिक, 2015 में दुनिया के लिए कुल प्रजनन दर 1965 की तुलना में केवल आधी थी। दुनिया के अधिकांश लोग प्रतिस्थापन प्रजनन स्तर से नीचे के देशों में रहते हैं, जो पैटर्न स्वाभाविक रूप से लंबे वक्त में जनसंख्या स्थिरता को बनाए रखने में असमर्थ हैं।

यूएनपीडी के मुताबिक, 2022 तक पूर्वी एशिया में हर बड़ी आबादी - चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान - सिकुड़ रही थी। 2023 तक, जापान में प्रजनन स्तर 40 प्रतिशत नीचे था, चीन में प्रतिस्थापन से 50 प्रतिशत से ज्यादा नीचे, ताइवान में प्रतिस्थापन से लगभग 60 प्रतिशत नीचे, और दक्षिण कोरिया में प्रतिस्थापन से 65 प्रतिशत नीचे जा चुका है। वहीं, दक्षिण एशिया में, भारत, श्रीलंका और नेपाल सभी प्रतिस्थापन स्तर से नीचे गिर गए हैं, और बांग्लादेश और गिरने वाला है। यूरोप की समग्र प्रजनन दर लगातार प्रतिस्थापन स्तर से नीचे रही है।

संयुक्त राज्य अमेरिका वैश्विक रुझानों से अछूता नहीं है। अमेरिकी जन्म दर गिर रही है और प्रति महिला 2.1 जन्मों की प्रतिस्थापन दर से नीचे गिरती जा रही है। कांग्रेस के बजट कार्यालय (सीबीओ) का अनुमान है, कि 2024 तक कुल प्रजनन दर प्रति महिला 1.67 जन्म होगी, जो प्रतिस्थापन से काफी नीचे है।

क्या डोनाल्ड ट्रंप को मना पाएंगे एलन मस्क?

शिकागो में एक थिंक-टैंक मैक्रोपोलो के मुताबिक, "दुनिया की आबादी का केवल 3.6% प्रवासी हैं। लेकिन भारत के बड़े इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए प्रवेश परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 1,000 लोगों में से 36% डिग्री लेने के बाद दूसरे देश चले जाते हैं। टॉप रैंकिंग हासिल करने वाले 100 में से 62% लोग देश छोड़ देते हैं। वहीं, दुनिया के शीर्ष 20% एआई शोधकर्ताओं में से 42% विदेश में काम करते हैं।"

एलन मस्क का तर्क है, कि ट्रंप शासन के तहत भी अमेरिका में ऐसी प्रतिभाओं का स्वागत जारी रहना चाहिए, क्योंकि वे अमेरिका में "उत्कृष्ट इंजीनियरिंग प्रतिभा की स्थायी कमी" को कम करते हैं।

गर मैकिन्से एंड कंपनी की मानें, तो अकेले अमेरिकी सेमीकंडक्टर उद्योग को 2032 तक 160,000 से ज्यादा इंजीनियरों की जरूरत है। लेकिन मस्क को लगता है, कि जरूरत की संख्या इससे दोगुनी है। उनके लिए, "अमेरिका में ऐसे लोगों की संख्या, जो सुपर टैलेंटेड इंजीनियर और सुपर मोटिवेटेड हैं, बहुत कम है।"

जैसा कि अनुमान लगाया जा सकता है, कानूनी और प्रतिभाशाली अप्रवासियों पर मस्क के विचार ने अप्रवास प्रतिबंधकों से प्रतिक्रिया उत्पन्न की है, जो तर्क देते हैं कि टेक कंपनियों को शीर्ष प्रतिभा के लिए अमेरिका में 330 मिलियन लोगों को देखना चाहिए, बजाय इसके कि वे ज़्यादा विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में आने के लिए कहें।

एलन मस्क का कहना है, कि "उनकी कंपनी ज्यादातर अमेरिकियों को ही काम पर रखती है, क्योंकि दूसरे देशों के प्रोफेशनल्स को हायर करने पर उनकी वीजा प्रक्रिया काफी ज्यादा लंबी होती है। उन्हें अमेरिका आने में काफी वक्त लगता है।"

लेकिन, वो ये भी कहते हैं, कि "अमेरिका में बेहद प्रतिभाशाली और मोटिवेटेड इंजीनियरों की भारी कमी है... अगर आप दुनिया की सबसे बेहतरीन प्रतिभाओं को दूसरी तरफ खेलने के लिए मजबूर करेंगे, तो अमेरिका हार जाएगा। कहानी खत्म।"

और यही वजह है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर के लिए भारतीय मूल के उद्यमी पूंजीपति श्रीराम कृष्णन को चुना, तो एलन मस्क ने इस फैसले का समर्थन किया। कृष्णन, विदेशी में जन्मे उच्च-कुशल श्रमिकों के लिए ग्रीन कार्ड पर कैप हटाने के प्रबल पक्षधर हैं, और उनका कहना है, कि अमेरिका को "सर्वश्रेष्ठ की आवश्यकता है, चाहे वे कहीं भी पैदा हुए हों।" लेकिन, रिपब्लिकन पार्टी में उनका विरोध हो रहा है। इसीलिए सवाल उठ रहे हैं, क्या एलन मस्क, डोनाल्ड ट्रंप को मना पाएंगे?

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