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बड़े बड़े रनवे, जेटी, चौड़ी-चौड़ी सड़कें.. अडमान-निकोबार में बिजली की रफ्तार से क्यों बन रहा सैन्य अड्डा?

Andaman & Nicobar Islands: चीन और भारत लगातार एक दूसरे को काउंटर करने के लिए अपनी स्ट्रैटजी बना रहे हैं और नये नये सैन्य ठिकानों का निर्माण किया जा रहा है। चीन जहां भारत के कुछ पड़ोसी देशों को अपने इशारे पर नचाकर सैन्य बंदरगाह बनाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भारत ने अपने उन द्वीपों का विकास शुरू कर दिया है, जहां से चीन को किसी भी वक्त मुंहतोड़ जवाब दिया जा सकता है।

ऐसा ही द्वीप क्षेत्र है, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह। जिसको लेकर इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है, कि भारत यहां पर विशालकाय मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है।

Andaman amp amp Nicobar Islands

रिपोर्ट के मुताबिक, अंडमान निकोबार द्वीप समूह में एडवांस हवाई क्षेत्रों के निर्माण के साथ साथ खाने पीने की सामानों के भंडारन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा, सैनिकों के रहने के लिए आवास, मजबूत सर्विलांस इन्फ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा रहा है।

भारत के लिए महत्वपूर्ण है अंडमान और निकोबार

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, रणनीतिक तौर पर भारक के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं और सीनियर सैन्य अधिकारियों का कहना है, कि इसीलिए यहां पर मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जा रहा है। जिसका मकसद, इन द्वीप समूहों पर अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती करने के साथ साथ बड़े और ज्यादा संख्या में युद्धपोतों की तैनाती करना, फाइटर जेट्स की तैनाती करना और सैनिकों के लिए बाकी सुविधाएं प्रदान करना है।

दरअसल, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में लगातार चीन की मौजूदगी बढ़ती जा रही है और बड़े पैमाने पर चीनी गतिविधियां चल रही हैं। कई जगहों पर चीन सीक्रेट सैन्य बंदरगाह बनाने की कोशिश में भी है, जिसमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से सिर्फ 55 किमी उत्तर में स्थित म्यांमार के कोको द्वीप समूह में एक सैन्य सुविधा का निर्माण भी शामिल है।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 836 द्वीप हैं, जिनमें से सिर्फ 38 द्वीप ही इंसानों से बसे हैं।

अंडमान और निकोबार कमांड द्वीपों में पहली और एकमात्र त्रि-सेवा कमांड है साल 2001 में स्थापित की गई थी। सूत्रों ने कहा है, कि अंडमान-निकोबार के उत्तरी द्वीपों में से एक पर निगरानी बुनियादी ढांचे को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने और वहां सैनिकों के लिए एक स्थायी आवास का निर्माण करने की योजना है।

सूत्रों ने कहा, कि पी8आई और लड़ाकू जेट जैसे बड़े विमानों की लैंडिंग को सक्षम करने के लिए एक महत्वपूर्ण नौसैनिक हवाई स्टेशन पर हवाई पट्टी की लंबाई बढ़ाने का काम चरणों में किया जा रहा है। बड़े जहाजों के उपयोग के लिए इसके घाट का भी विस्तार किया जा रहा है। इसके अलावा, बाकी इन्फ्रास्ट्रक्चर को भी अपग्रेड किया जा रहा है, और ज्यादा यातायात के लिए द्वीपों के उत्तर से दक्षिण में पोर्ट ब्लेयर तक की सड़क में सुधार किया जा रहा है।

इसके अलावा, भारत के एडवांस फाइटर जेट्स स्क्वाड्रनों को लंबे समय तक रखने के लिए भी भारतीय वायुसेना के स्टेशन को अपग्रेड किया जा रहा है। इसके तहत, रनवे को करीब 3,000 मीटर तक विस्तारित करने और संपत्तियों के रखरखाव के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण करने की योजना शामिल है। इसके अलावा, कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल के निर्माण पर भी काम चल रहा है।

पिछले साल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने पोर्ट ब्लेयर में IN उत्क्रोश में एक आधुनिक हैंगर और डिस्पर्सल सिस्टम का उद्घाटन किया था। इस साल फरवरी में, नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने कम दृश्यता की स्थिति में विमान को सुरक्षित रूप से उतारने के लिए सटीक क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर मार्गदर्शन के साथ-साथ एकीकृत अंडरवाटर हार्बर रक्षा और निगरानी प्रणाली को सक्षम करने के लिए आईएनएस उत्क्रोश में एक प्रिसिजन एप्रोच रडार (पीएआर) का उद्घाटन किया है।

एडमिरल हरि कुमार ने आईएनएस कोहासा, आईएनएस बाज़ और आईएनएस कार्डी में नौसेना संचार नेटवर्क (एनसीएन) केंद्रों का भी उद्घाटन किया है, जो अंडमान एंड निकोबार की संचार और परिचालन क्षमता को और बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस महीने की शुरुआत में, ऐसा पता चला था, कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) से सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने, एनआरएससी विश्लेषण की तकनीकी क्षमता और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में 55 बसे हुए द्वीपों की निगरानी बढ़ाने के लिए विश्लेषण किए गए डेटा के प्रसार के लिए अपनी जनशक्ति बढ़ाने के लिए कहा है।

पिछले महीने, गृह मंत्रालय (एमएचए) ने निर्जन द्वीपों की निगरानी पर चर्चा करने के लिए ए एंड एन और लक्षद्वीप, नौसेना और एनआरएससी के तटीय सुरक्षा के अधिकारियों के साथ एक मल्टी-एजेंसी समुद्री सुरक्षा समूह ((MAMSG)-नीति बैठक की है। कुल मिलाकर देखा जाए, तो भारत ने अंडमान को एक युद्ध सेंटर के तौर पर विकसित करना शुरू कर दिया, ताकि भारत के समु्द्री इलाकों की रक्षा के साथ साथ इन जगहों से भारत के दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए।

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