S-400: चीन की नाक के नीचे होगी रूसी 'रक्षाकवच' की तैनाती, LAC पर ड्रैगन के खिलाफ ऑपरेशन शुरू
रूसी डिप्लोमेट्स ने पिछले हफ्ते ही दावा किया था कि, एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी भारत को की जाने लगी है और लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ लगती सीमा पर और एलएसी पर रूसी मिसाइल सिस्टम को तैनात किया जाएगा।
नई दिल्ली, नवंबर 20: आखिरकार मोदी सरकार ने चीन के खिलाफ बड़े स्तर पर 'युद्ध' का आगाज कर दिया है। अब तक भारतीय सीमा पर आग उगलने वाले ड्रैगन के मुंह में आग लगाने के लिए अब मोदी सरकार ने रूसी रक्षाकवच को तैनात करने का फैसला किया है। मोदी सरकार ने फैसला किया है कि, दुनिया की सबसे उन्नत किस्म की एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती चीन की सीमा पास ड्रैगन की नाक के नीचे की जाएगी।

एस-400 मिसाइल की होगी तैनाती
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले साल की शुरूआत में भारत सरकार ने देश की उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर एस-400 एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम की कम से कम दो रेजिमेंटों को तैनात करने का फैसला लिया है। जिसको लेकर रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि, मोदी सरकार ने आखिरकार चीन की सेना पीएलए के खिलाफ 1597 किलोमीटर के दायरे में लद्दाख लाइन पर अपने प्रभाव का विस्तार करेगी और चीन के खिलाफ शक्ति को संतुलित करेगी। मॉस्को स्थित रूसी राजनयिकों ने दावा किया है कि, इसी महीने से रूस ने भारत को एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की डिलीवरी शुरू कर दी है, जिसे चीन की सीमा पर तैनात किया जाएगा।
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दो मिसाइल सिस्टम की तैनाती
रूसी डिप्लोमेट्स ने पिछले हफ्ते ही दावा किया था कि, एस-400 मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी भारत को की जाने लगी है और लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ लगती सीमा पर और एलएसी पर रूसी मिसाइल सिस्टम को तैनात किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दो मिसाइल सिस्टम को तैनात किया जाएगा। रूस में प्रशिक्षित दो भारतीय सैन्य दल एस-400 प्रणाली को संचालित करने के लिए तैयार हैं, जिसकी पहुंच दुश्मन के इलाके में करीब 400 किलोमीटर तक है। आपको बता दें कि, भारतीय प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रिश्ते काफी अच्छे हैं, लिहाजा पीएम मोदी ने पुतिन से एस-400 मिसाइल सिस्टम की जल्द आपूर्ति के लिए आग्रह किया था, लिहाजा रूस ने काफी कम समय में मिसाइलों की डिलीवरी शुरू कर दी है।

भारत आ रहे हैं रूसी राष्ट्रपति
रूसी राष्ट्रपति का भारत प्रेम कितना है, इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि, कोरोना महामारी शुरू होने के बाद व्लादिमीर पुतिन दूसरा विदेश दौरा भारत का ही कर रहे हैं। जबकि इस दरम्यां उन्होंने कई वैश्विक दौरों को रद्द कर दिया है। जिसमें इसी महीने जी-20 शिखर सम्मेलन भी शामिल है। दोनों नेताओं के बीच 6 दिसंबर को नई दिल्ली में मुलाकात होगी। इससे पहले 16 जून को रूसी राष्ट्रपति सिर्फ एक बार जेनेवा गये थे, जहां उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात की थी। यहां तक की रूसी राष्ट्रपति ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी वर्चुअल मीटिंग ही किया है और भारत के साथ दोनों देशों के वार्षिक शिखर सम्मेलन के प्रारूप के बावजूद बीजिंग की यात्रा नहीं करेंगे। आपको बता दें कि, कोविड-19 महामारी की खतरनाक स्थिति के बीच भी रूसी इंजीनियर्स ने लगातार काम किया है और भारत के लिए एस-400 मिसाइल सिस्टम को तैयार किया है।

चीन के साथ जारी है तनाव
आपको बता दें कि, पिछले साल मई में पैंगोंग त्सो, गलवान घाटी और गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स के उत्तरी तट पर भारतीय सेना और चीन के सैनिक आमने-सामनमे थे और गलवान घाटी में दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प भी हुई थी। वहीं, अब यह बिल्कुल साफ हो चुका है कि, चीन ने लद्दाख की स्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने की कोशिश शुरू कर दी है, जिसपर भारत कड़ा एतराज जता चुका है। 1959 में भारत और चीन के बीच जिस सीमा रेखा का निर्धारण किया गया था, चीन ने उसका भी उल्लंघन करना शुरू कर दिया है और हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल चीन की सेना अचानक भारी मात्रा में हथियारों के साथ भारतीय सेना के पास पहुंच गई थी और भारतीय सेना को पीछे धकेलने की कोशिश शुरू हुई थी, जिसके बाद भारत और चीन के सैनिकों के भी हिंसक झड़प हुई थी।

रणनीति में सुधार करता भारत
पिछले साल कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में 15 जून को भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिको से काफी देर तक मुकाबला किया था। हालांकि, भारत के 20 से ज्यादा सैनिक शहीद हो गये थे, लेकिन शहीद होने से पहले भारतीय जवानों ने भी कम के कम 42 चीनी सैनिकों को ऊपर पहुंचा दिया और उसी का असर है कि, अब तक चीन भारतीय सीमा के पास तैनात तीन चीनी कमांडरों को बदल चुका है। वहीं, भारत सरकार ने भी रणनीति में बदलाव करना शुरू कर दिया है और चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत सरकार ने भारी संख्या में हथियारों और जवानों की तैनाती एलएसी पर करनी शुरू कर दी है।

एलएसी पर हथियारों की तैनाती
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने सबसे पहले लद्दाख एलएसी पर चिनूक हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करते हुए दौलेट बेग ओल्डी (डीबीओ) सेक्टर तक सैनिकों की तैनाती की है। वहीं, इंडियन आर्मी ने टी-90 टैंकों की भी सीमा पर तैनाती कर दी है। चीन को रोकने के लिए भारत ने दूसरा कदम उठाते हुए ओमनी-रोल परमाणु सक्षम राफेल लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के साथ चीन की सीमा पर तैनाती कर दी है। राफेल विमान के साथ क्रूज मिसाइलों को भी तैनात किया गया है। वहीं, तीसरा चरण, जो सबसे महत्वपूर्ण था, उसके तहत भारतीय सेना ने 29-31 अगस्त को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी तट के ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया है।

एलएसी पर 'शक्ति प्रदर्शन'
वहीं, जब भारतीय सेना ने पीएलए को सख्त चेतावनी दी और स्थिति एक बार फिर से जंग तक पहुंचने लगी, तब पीएलए ने खारे पानी की झील को खाली करने का फैसला लिया। हालांकि, ची ने अक्साई चिन और पूरे अरुणाचल प्रदेश में नगारी गार गुंसा और निंगची हवाई अड्डों पर भारतीय एयरफोर्स को चुनैती देने के लिए एस-400 सिस्टम की तैनाती कर रखी थी, लेकिन अब जब भारतीय सेना भी एस-400 मिसाइल सिस्टम की तैनाती करने जा रही है, तो फिर ये तय हो गया है कि, एलएसी पर भारत ने चीन के बराबर ही शक्ति जुटा ली है और अब अगर चीन किसी भी तरह का एडवेंचर करने की कोशिश करता है, तो उसे उसी की भाषा में जबाव दिया जाएगा।

एस-400 की तैनाती से क्या होगा?
भारतीय सीमा में एस-400 मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती के बाद एलएसी पर भारतीय सेना की ताकत में कई गुना का इजाफा हो जाएगा। क्योंकि, अब चीन किसी भी रॉकेट सिस्टम या मिसाइल का इस्तेमाल अगर करता है, तो एस-400 मिसाइल सिस्टम उसे डिटेक्ट करने के बाद मार गिरा देगा। लिहाजा, अब किसी भी खराब से खराब परिस्थिति में भी भारतीय सेना के पास चीन की वायुलेना को मुंहतोड़ जवाब देने का विकल्प आ गया है। चूंकि एक मिसाइल सिस्टम उत्तर में तैनात किया जाएगा, लिहाजा यह लद्दाख में दो मोर्चों का ख्याल रखेगा।












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