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BrahMos: चीन के दुश्मन को ब्रह्मोस की चौथी खेप की आज डिलीवरी करेगा भारत, डिफेंस एक्सपोर्ट में लंबी छलांग

India-Philippines Brahmos Missile: दक्षिण चीन सागर में चीन को काउंटर करने के लिए भारत लगातार उसके दुश्मन फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों की डिलीवरी दे रहा है और अभी तक ब्रह्मोस मिसाइलों की तीन खेप मनीला पहुंचाई जा चुकी है।

वहीं, दक्षिण चीन सागर में चीनी दावों के कारण बढ़ते तनाव के बीच भारत आज ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के जमीनी वेरिएंट की चौथी 'बैटरी' फिलीपींस भेजने जा रहा है।

BrahMos missile battery

ब्रह्मोस की चौथी खेप की डिलीवरी आज

ब्रह्मोस मिसाइलों की तीन 'बैटरी' पहले ही दक्षिणी चीन सागर में चीन को करारा जबाव देने वाले फिलीपींस को सौंप दी गई है, जिसके लिए साल 2022 में भारत और फिलीपींस के बीच 375 मिलियन डॉलर में समझौता हुआ था।

प्रत्येक बैटरी में चार लॉन्चर शामिल हैं, जिनमें तीन 290 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता वाली 3-3 मिसाइले हैं। और ये सभी लॉन्चर मोबाइल प्लेटफॉर्म पर तैनात हैं, ताकि उनके परिवहन में कोई दिक्कत ना आए। ब्रह्मोस मिसाइल की सुपरसोनिक स्पीड होने की वजह से, इस मिसाइल को जमीन या जहाज-आधारित बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) सिस्टम से रोकना बहुत मुश्किल है।

ब्रह्मोस को लेकर फिलीपींस के सौदे ने यह सुनिश्चित कर दिया है, कि भारत का रक्षा निर्यात पिछले वित्त वर्ष की तुलना में साल-दर-साल 32.5 प्रतिशत की भारी वृद्धि के साथ 2023-2024 में पहले ही ₹21083 करोड़ तक पहुंच गया है। चूंकि ब्रह्मोस के पास एक आजमाया हुआ ट्रैक रिकॉर्ड है, इसलिए भारत को निकट भविष्य में सुपरसोनिक मिसाइलों के लिए और ज्यादा ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। ऐसी रिपोर्ट है, कि कम से कम 10 ऐसे देश हैं, जो ब्रह्मोस खरीदने में दिलचस्पी रखते हैं।

हथियारों के निर्यात पर भारत का फोकस

भारत ने मिसाइल निर्यात में रूबिकॉन को पार कर लिया है और नरेंद्र मोदी सरकार, मुंबई में स्कॉर्पीन-क्लास की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण करने और इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे तीसरे देशों को आपूर्ति करने के लिए मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड और फ्रांसीसी नौसेना समूह के बीच एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने पर भी विचार कर रही है।

वर्तमान में, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान नौसेना समूह और इमैनुएल मैक्रों सरकार के साथ बातचीत करने के लिए फ्रांस की यात्रा पर हैं, ताकि यह समझा जा सके, कि भारतीय और फ्रांसीसी सप्लाई चेन, हाई टेक्नोलॉजी वाले पारंपरिक और गैर-पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए कैसे हाथ मिला सकती हैं।

हिंदुस्ताइन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय CDS द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को गहरा करने के लिए ब्रेस्ट और संभवतः टूलूज़ में फ्रांसीसी पनडुब्बी बेस का दौरा करेंगे। फ्रांसीसी नौसेना समूह भारत के लिए तीन अतिरिक्त कालवेरी (संशोधित स्कॉर्पीन) श्रेणी की पनडुब्बियों के निर्माण के लिए पहले से ही मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड के साथ बातचीत कर रहा है।

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