भारत को कम कीमत पर प्रीडेटर ड्रोन बेचेगा अमेरिका, कांग्रेस ने ज्यादा दाम पर खरीदने के लगाए हैं आरोप
India-US Drone Deal: भारत सरकार के एक वरिष्ट अधिकारी ने गुरुवार को दावा किया है, कि अमेरिका भारत को दूसरे देशों की तुलना में कम कीमत पर एमक्यू-9बी लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन बेचने जा रहा है। भारतीय अधिकारी ने कहा है, कि अमेरिका ने दूसरे देशों की तुलना में एमक्यू-9बी लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन कम से कम 27 प्रतिशत कम कीमत पर बेचने की पेशकश की है।
भारतीय अधिकारी का ये बयान उस वक्त आया है, जब कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है, कि वो अमेरिका से एमक्यू-9बी लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन ज्यादा कीमत पर खरीद रही है। भारतीय अधिकारी ने कहा, कि अमेरिका से ड्रोन खरीदने को लेकर हो रही बातचीत में, भारतीय अधिकारी कीमत को और कम करने के लिए बातचीत करेंगे।

भारतीय अधिकारी ने क्या कहा?
अमेरिका के साथ चल रहे ड्रोन डील को लेकर केन्द्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है, कि अभी तक ड्रोन की कीमत निर्धारित करने के मुद्दे पर बातचीत शुरू नहीं हुई है और उन्होंने विश्वास दिलाया है, कि अंतिम कीमत अन्य देशों की तुलना में भारत के लिए कम होंगी।
अधिकारी ने कहा, कि कीमतें तभी बढ़ाई जा सकती हैं जब भारत अतिरिक्त सुविधाओं की मांग करेगा।
आपको बता दें, कि यूनाइटेड किंगडम ने अमेरिका से ये ड्रोन 6.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर में खरीदे हैं, हालाकि यूके ने जो ड्रोन खरीदे हैं, उनमें सेंसर, हथियार और सर्टिफिकेशन को शामिल नहीं किया गया है और यूके के ड्रोन सिर्फ ग्रीन एयरक्राफ्ट हैं।
भारतीय अधिकारी ने बताया, कि सेंसर, हथियार और पेलोड, ड्रोन में इस्तेमाल की जाने वाली सुविधाओं का करीब 60 से 70 फीसदी हिस्सा होती हैं।
भारत-यूएस में कितने का हुआ है सौदा?
प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका के राजकीय यात्रा के समय भारत और यूएस के बीच 31 प्रीडेटर ड्रोन का सौदा किया गया था। इस डील के तहत भारत अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदेगा, जिसे आमतौर पर MQ-9B Predator UAV ड्रोन के नाम से जाना जाता है।
भारत ने ये सौदा अमेरिका के साथ 3.072 अरब डॉलर का किया है और इस हिसाब से एक ड्रोन की कीमत 9.9 अरब अमेरिकी डॉलर बैठता है। वहीं, अमेरिका ने यही ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात को 16.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हिसाब से बेचा है। यानि, भारत को यूएई के मुकाबले काफी कम कीमत पर ड्रोन बेचा जा रहा है।
भारतीय अधिकारी ने कहा, कि भारत जिस ड्रोन के लिए सौदा कर रहा है, उसमें और भी एडवांस कॉन्फिगरेशन लगा है और इन्हें जनरल एटॉमिक्स ने तैयार किया है। नाम नहीं छापने की शर्त पर भारतीय अधिकारी ने बताया है, कि भारत को ये ड्रोन कम कीमत पर सिर्फ इसलिए मिल रहा है, क्योंकि हथियार बनाने वाली कंपनी अपने निवेश का एक बड़ा हिस्सा पहले के सौदों से वसूल कर चुकी है, इसीलिए दूसरे देशों की तुलना में भारत को कम कीमत पर ये ड्रोन मिल रहे हैं।
हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत को इन ड्रोनों के साथ कुछ रडार और मिसाइलों को एकीकृत करने की आवश्यकता हो सकती है, जिससे कीमत में संशोधन हो सकता है।
कांग्रेस का ड्रोन को लेकर क्या आरोप हैं?
कांग्रेस ने मोदी सरकार पर ड्रोन डील में ज्यादा कीमत पर सौदा करने के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस की तरफ से कहा गया है, कि 31 एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन अधिक कीमत पर खरीदे जा रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस ने भारत सरकार से पूर्ण पारदर्शिता की मांग की है।
वहीं, भारत सरकार के सूत्रों ने कहा, कि ऐसा बयान शायद "अज्ञानता" के कारण दिया गया होगा।
वहीं, भारत सरकार के अधिकारी ने उन रिपोर्टों पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें कहा गया है, कि भारतीय वायु सेना ने ड्रोन के बारे में कुछ सवाल उठाए हैं। भारतीय अधिकारी ने कहा, कि भारतीय सेना और नौसेना सहित रक्षा बलों के सभी तीन अंगों ने परामर्श के दौरान अपनी बात रखी है और उनके अधिग्रहण की सिफारिश की है।
भारतीय अधिकारी ने कहा, कि भारत को अमेरिका से ड्रोन बनाने के लिए टेक्नोलॉजी भी मिलने जा रही है, लिहाजा भारत कोशिश ये होगी, कि कैसे जल्द से जल्द ड्रोन बनाने का 15 से 20 प्रतिशत काम भारत में ही शुरू किया जा सके। उन्होंने कहा, कि भारत की कोशिश इंजन, रडार प्रोसेसर इकाइयों, एवियोनिक्स, सेंसर और सॉफ्टवेयर सहित प्रमुख घटकों और उप-प्रणालियों का निर्माण और स्रोत करने के बारे में भी सोच रहा है।
उन्होंने दावा किया, कि झूठी खबरें और प्रोपेगेंडा करके सौदे को ''बाधित'' करने का प्रयास किया जा सकता है, क्योंकि एडवांस हथियारों से भारत के प्रतिद्वंद्वियों के बीच भय और घबराहट पैदा होना तय है। ये एडवांस ड्रोन भारत को अपने दुश्मनों पर प्रभावी ढंग से निगरानी रखने में मदद करेंगे।












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