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India Taliban: तालिबान से बातचीत भारत का मास्टरस्ट्रोक! पाकिस्तान का गेम हुआ ओवर?

India Taliban: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी (Afghanistan's acting Foreign Minister Amir Khan Muttaqi) से बात की है। पहली बार तालिबानी विदेश मंत्री से हुई सीधी बातचीत में कई रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। वहीं भारत के तालिबान (Taliban) के साथ नजदिकी है अब पाकिस्तान को मिर्ची लग गई है। वहीं भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पाकिस्तान को भारत और अफगानिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों में विघ्न डालने की कोई छूट नहीं देगा।

India Taliban

भारत ने माना तालिबान की भविष्य

एस. जयशंकर और अफगान विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी की बातचीत इसलिए बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें कूटनीति, सुरक्षा और पूरे इलाके का संतुलन तीनों चीजें जुड़ी हैं। इससे साफ होता है कि अब भारत ये मान चुका है कि तालिबान हकीकत है, और अगर अपने फायदों को सुरक्षित रखना है, तो बात करनी ही पड़ेगी चाहे सामने कोई भी हो। भारत अब किसी को नजरअंदाज करने की बजाय, साफ-साफ बात करके अपनी बात मनवाना चाहता है।

तालिबान से बातचीत क्यों महत्वपूर्ण?

यह बैठक खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि तालिबान के सत्ता में आने के बाद यह पहला मौका है जब भारत और अफगान सरकार के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के बीच प्रत्यक्ष वार्ता हुई है। इन चर्चाओं को दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत ने इस वार्ता के दौरान यह तालिबान से यह सुनिश्चित करने को कहा कि, अफगान भूमि का उपयोग भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाएगा।

पाकिस्तान को सीधा मैसेज

भारत ने इस बातचीत से पाकिस्तान को सीधा मैसेज दे दिया है अब अफगानिस्तान और भारत के बीच में टांग अड़ाने की कोशिश मत करो। पाकिस्तान काफी समय से अफगानिस्तान की राजनीति और वहां के आतंकी ग्रुप पर अपनी पकड़ बनाए हुए है। लेकिन ये बातचीत इस बात की कोशिश है कि पाकिस्तान का असर थोड़ा कम किया जाए और भारत अपनी जगह मजबूती से बनाए।

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क्षेत्रीय स्थिरता का हमेशा पक्षधर रहा भारत

वहीं भारत का तालिबान के साथ सीधे बात करना इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि, भारत हमेशा से दक्षिण एशिया में स्थिरता और विकास के पक्ष में रहा है। अफगानिस्तान के साथ संवाद बहाल करना यह दिखाता है कि भारत एक जिम्मेदार क्षेत्रीय शक्ति के रूप में काम कर रहा है। वहीं भारत ने अफगानिस्तान में $3 बिलियन (लगभग ₹24,000 करोड़) से अधिक का निवेश किया है। जिसमें सड़कें, बांध, संसद भवन और अस्पताल बनाए गए हैं। यह बातचीत इन निवेशों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी ज़रूरी थी।

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