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मालदीव के बाद एक और पड़ोसी देश को भारत करेगा फूड सप्लाई, चीन से रिश्ता रखने पर भी भेजेगा प्याज

India supplies onions to Sri Lanka: नरेंद्र मोदी सरकार की 'पड़ोस पहले' नीति की विश्वसनीयता स्पष्ट है और चीन समर्थक शासन चलाने वाले मोहम्मद मुइज्जू शासन होने के बाद भी भारत ने मालदीव को भारी मात्रा में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई की है और अब ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत, श्रीलंका को हजारों मीट्रिक टन प्याज की आपूर्ति करने की योजना बना रहा है।

इसके अलावा, भारत ने 3 अप्रैल को अपने करीबी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को अपने कोटे से अतिरिक्त 10,000 मीट्रिक टन प्याज की आपूर्ति की इजाजत दी है, क्योंकि खाड़ी देश हमेशा भारत के लिए प्राथमिकता रहा है।

India supplies onions to Sri Lanka

भारत सरकार ने 1 मार्च को भी संयुक्त अरब अमीरात को 14,400 मीट्रिक टन से ज्यादा प्याज का निर्यात किया था।

मालदीव के बाद श्रीलंका को खाने की सप्लाई

मालवीद में 21 अप्रैल को महत्वपूर्ण संसदीय चुनाव होने जा रहे हैं और अगर भारत जरूरी सामानों की सप्लाई नहीं करता, तो मोहम्मद मुइज्जू के लिए परेशानी उत्पन्न हो सकता था, लेकिन इसके बाद भी भारत ने जरूरी सामानों की सप्लाई की है। भारत सरकार ने जिन जरूरी सामानों के निर्यात पर पाबंदी लगा रखी है, उन सामानों की भी सप्लाई की इजाजत मालदीव के लिए दी है।

इसका मतलब ये हुआ है, कि जिन जरूरी सामानों की कमी भारत में भी होने वाली है, उन सामानों की भी सप्लाई मालदीव को की जा सकती है।

इस बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने धन जुटाने के लिए तुर्की, चीन और संयुक्त अरब अमीरात का दौरा किया, लेकिन धन जुटाने का उनका मिशन फेल हो गया है और किसी भी देश ने मालदीव को अनुदान देने की पेशकश तक नहीं की।

मोहम्मद मुइज्जू की अदूरदर्शिता का ही नतीजा है, कि शपथ लेने के बाद सबसे पहले तुर्की, फिर यूएई का दौरा करने वाले मालदीव के राष्ट्रपति को किसी ने भाव नहीं दिया। यहां तक की सऊदी अरब ने भी मालदीव को लेकर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। भारत विरोधी अभियान की सवारी पर सवार होकर सत्ता में आए मोहम्मद मुइज्जू भूल गये थे, कि हिंग महासागर में उनका देश जहां स्थित है, उसे लेकर चीन और भारत के अलावा, किसी भी और देश को कोई दिलचस्पी नहीं है।

लेकिन, इस चक्कर में वो भारत से अपने संबंध खराब कर बैठे हैं।

आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का भारतीय निर्णय, राजनीति पर आधारित नहीं था, बल्कि मालदीव की जनता तक पहुंचने की कोशिश थी और जरूरी सामानों की आपूर्ति कर भारत ने मालदीव की जनता को ये संदेश देने कि कोशिश की है, कि भारत मालदीव के साथ है, चाहे छोटे द्वीप राष्ट्र का शासक कोई भी हो।

मालदीव की अर्थव्यवस्था अभी ठीक नहीं है और सत्ता में आने के बाद मोहम्मद मुइज्जू की कोई भी बुनियादी ढांचा परियोजना पुनर्जीवित नहीं हो पाई है और देश को 2026 तक एक अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। अगर मालदीव की सरकार ऐसा करने में नाकाम होती है, तो देश डिफॉल्ट कर जाएगा।

इसके अलावा, माले पर SBI का ब्याज के रूप में 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर बकाया है। मई में और सितंबर में भारतीय बहुराष्ट्रीय बैंक द्वारा खरीदे गए ट्रेजरी बिलों के कारण 50 मिलियन अमरीकी डालर का भुगतान किया गया।

मालदीव के शासक मोहम्मद मुइज्जू की जहरीली भारत विरोधी नीतियों की वजह से माले में उच्च खर्च करने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या काफी कम हो गई है और द्वीप राष्ट्र कम खर्च करने वाले चीनी पर्यटकों से भर गया है। भले ही संसदीय चुनाव के नतीजे कुछ भी हों, फिलहाल मुइज्जू की सरकार को कोई खतरा नहीं है, लेकिन मोदी सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है, कि मालदीव की जनता को अपने अनियमित शासक की नीतियों के कारण परेशानी ना उठानी पड़े।

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