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Defence News: 2 परमाणु पनडुब्बियां बनाएगा भारत, क्या टूट गया 65 हजार टन वजनी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने का अरमान?

Aircraft Career: भारतीय नौसेना आखिरकार अपने बेड़े में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियों (SSN) को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 2015 में भारत सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद, नौसेना अब दो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पारंपरिक रूप से सशस्त्र पनडुब्बियों के निर्माण के लिए सरकार से बातचीत करेगी।

इसके साथ ही एक्सपर्ट्स का मानना है, कि दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर बनाने के अरमान भी टूट गये हैं और फिलहाल इस बात की उम्मीद करीब करीब खत्म हो चुकी है, कि भारत अब दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण करेगा।

USS Carl Vinson

एयरक्राफ्ट कैरियर पर भारी पनडुब्बी

2021 में रूसी अकुला-क्लास की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी का लीज खत्म होने और यूक्रेन युद्ध के कारण, इसी श्रेणी की एक और पनडुब्बी के पट्टे में देरी होने के बाद, भारतीय नौसेना के बेड़े में कोई SSN पनडुब्बी नहीं रह गया। जिसकी वजह से अब नौसेना, सरकार से 'आवश्यकता की स्वीकृति' (AoN) मांगेगी, जो 'प्रोजेक्ट डेल्टा' को की तरफ बढ़ने का पहला कदम है।

चीन के पनडुब्बी बेड़े में 70 से ज्यादा पनडुब्बियां हैं, जिनमें सात परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN), 12 परमाणु हमलावर पनडुब्बियां (SSN) और 50 से ज्यादा डीजल हमलावर पनडुब्बियां (SSK) शामिल हैं। इसके विपरीत, भारत के ज्यादातर पारंपरिक पनडुब्बियों को 1980 के दशक में खरीदा गया था और अब वे पुराने हो रहे हैं।

परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के लिए चीन की नौसेना की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने के लिए इतनी महत्वपूर्ण हैं, कि फिलहाल कथित तौर भारत ने, पर SSN परियोजना के लिए, 65,000 टन के स्वदेशी विमान वाहक (IAC)-2 के निर्माण की अपनी परियोजना को स्थगित कर दिया है।

क्योंकि, SSN को पानी के नीचे युद्ध करने वाला लड़ाकू जेट माना जाता हैं।

भारतीय नौसेना के एक्सर्ट्स इस प्रारंभिक कदम की सराहना करते हैं, लेकिन उनका तर्क है, कि नौसेना को कम से कम छह परमाणु ऊर्जा चालित हमलावर पनडुब्बियों की आवश्यकता है।

भारतीय नौसेना के भूतपूर्व पनडुब्बी चालक कमोडोर अनिल जय सिंह (सेवानिवृत्त) ने यूरेशियन टाइम्स को बताया, "हम पहले ही SSN के लिए बहुत देर कर चुके हैं, और अगर हमें हिंद महासागर में भविष्य की PLAN शक्ति प्रक्षेपण को कम करना है, तो हमें कम से कम छह पनडुब्बियों की आवश्यकता है। वे महंगे प्लेटफॉर्म हैं और इसलिए शायद उन्हें अलग अलग चरणों में बनाने की आवश्यकता है, लेकिन कम से कम छह पनडुब्बियों का निर्माण बेहद जरूरी है।"

SSN को गेम चेंजर माना जाता है और समुद्र के अंदर रहने की उनकी असीमित क्षमता, उन्हें युद्ध में काफी आगे करते हैं। ये असीमित शक्ति वाले शक्तिशाली प्लेटर्फार्म हैं।

वे अनिश्चित काल तक पानी के नीचे रह सकते हैं और बंदरगाह से दूर हाई स्पीड पर काम कर सकते हैं। वे एयरक्राफ्ट कैरियर के हिस्से के रूप में आगे बढ़ सकते हैं। लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस, वे समुद्री युद्ध का स्वरूप बदल सकते हैं।

Defence News

भारत को है खतरनाक पनडुब्बियों की जरूरत

धीमी चलने वाली डीजल पनडुब्बी की तुलना में SSN की पहुंच, सहनशक्ति और स्पीड ज्यादा है। डीजल इंजन के साथ साथ बैटरी चालित पारंपरिक नावों के लिए घंटों या दिनों की तुलना में यह महीनों तक पानी में डूबी रह सकती है, यहां तक ​​कि एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) वाली नाव भी घंटों या दिनों तक पानी में डूबी रह सकती है।

गहरे पानी में जाने के बाद SSN का पता लगाना न केवल मुश्किल होता है, बल्कि (डीजल पनडुब्बी के विपरीत) इसमें इतनी गति होती है कि यदि जरूरत हो, तो ज्यादातर अन्य पनडुब्बियों या युद्धपोतों को पछाड़ सकती है या उनसे आगे निकल सकती है। SSN की क्लासिक भूमिकाएं एयरक्राफ्ट कैरियर युद्ध समूहों की रक्षा करना और दुश्मन SSBN का शिकार करना है, लेकिन यह जहाज-रोधी, भूमि-हमला और निगरानी भूमिकाओं के लिए भी एक आदर्श मंच है।

स्वदेशी SSN के लिए, यदि सरकार की मंजूरी कल आती है, तो पहली SSN को युद्ध के योग्य बनने में 10-15 साल और लगेंगे। इसलिए, वास्तविक रूप से कहें तो, पहले स्वदेशी SSN के साल 2040 तक भारतीय नौसेना में शामिल होने की उम्मीद की जा सकती है।

इस बात पर बहस जारी है, कि कौन सा प्लेटफॉर्म बेहतर है - SSN या एयरक्राफ्ट कैरियर। कमोडोर सिंह दोनों प्लेटफॉर्म को जरूरी मानते हैं।

उनका कहना है, "हिंद महासागर के रास्ते पर AUKUS पनडुब्बियों और हिंद महासागर में हमारे SSN के साथ, चीनी CBG (कैरियर बैटल ग्रुप) को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन हम उन्हें चरणों में बना सकते हैं। विमानवाहक पोतों की तुलना SSN से करना उचित नहीं है, क्योंकि दोनों अपने तरीके से एक शक्तिशाली युद्ध-लड़ने वाला प्लेटफॉर्म है। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि एक ब्लू वॉटर नेवी के लिए, एयरक्राफ्ट कैरियर और SSN एक दूसरे के पूरक हैं।"

अमेरिका और ब्रिटेन, अगले दो दशकों में अपने SSN बेड़े को दोगुना करने की योजना बना रहे हैं और इंडो-पैसिफिक में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए, ऑस्ट्रेलिया को अपनी हमलावर पनडुब्बी की ताकत बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। AUKUS का मकसद चीनी नौसेना की एक महत्वपूर्ण कमजोरी का फायदा उठाना है। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि चीन के पास पनडुब्बियों को काउंटर करने की क्षमता नहीं है।

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