UNSC में वोटिंग से बार बार गैर-हाजिर भारत, ब्रिटेन ने कहा, रूस के साथ इस ‘रिश्ते’ में बंधा है भारत
अमेरिका और ब्रिटेन के कई नेताओं ने भारत के वोटिंग से गैर-हाजिर रहने पर सवाल उठाते हुए पश्चिमी देशों का साथ देने की मांग की है।
नई दिल्ली, मार्च 08: यूक्रेन युद्ध में भारत अभी तक तटस्थ बना हुआ है और बार बार यूनाइटेड नेशंस की वोटिंग के दौरान गैर हाजिर रहा है और भारत सरकार के इस फैसले पर पश्चिमी देशों की तरफ से बार बार सवाल उठाए जा रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के कई नेताओं ने भारत के वोटिंग से गैर-हाजिर रहने पर सवाल उठाते हुए पश्चिमी देशों का साथ देने की मांग की है। लेकिन अब ब्रिटिश सरकार की तरफ से भारत को लेकर अहम बयान आया है।

भारत पर क्या बोला ब्रिटेन?
ब्रिटेन के विदेश मंत्री लिज़ ट्रस ने सोमवार को कहा कि, भारत की रूस पर निर्भरता है, इसीलिए यूक्रेन पर आक्रमण के बाद भी संयुक्त राष्ट्र में अपने वोट का प्रयोग नहीं कर रहा है और भारत के फैसले को इस तरह से समझा जा सकता है। ब्रिटिश विदेश मंत्री ने कहा कि, "मुझे लगता है कि भारत के लिए अहम मुद्दा रूस और भारत के बीच रक्षा संबंध हैं।‘ उन्होंने कहा कि, ‘'भारत अपनी सामरिक शक्ति के लिए और कुछ हद तक आर्थिक स्थिति के लिए भी रूस पर निर्भर है और मुझे लगता है कि, आगे का रास्ता इन के साथ घनिष्ठ आर्थिक और रक्षा संबंधों के लिए है।‘ ब्रिटिश विदेश मंत्री ने कहा कि, ‘मैंने भारत में अपने समकक्ष एस. जयशंकर से बात की है और उनसे रूस के खिलाफ खड़ा होने की अपील की है।'
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शत्रुता खत्म करें दोनों देश- भारत
यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में एक बार फिर से चर्चा के दौरान भारत ने दोनों ही देशों से दुश्मनी कर बातचीत के टेबल पर वापस लौटने की अपील की है। भारत ने यूएएससी में कहा कि, ‘यूएन के मुताबिक, अभी तक 140 से ज्यादा नागरिक मारे जा चुके हैं, जिनमें एक भारतीय भी शामिल है, हम तमाम मृतकों के शोकाकुल परिवारवावों के लिए संवेदना जताते हैं। हम इस संघर्ष में हर नुकसान के लिए शोक व्यक्त करते हैं।' भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरूमूर्ति ने कहा कि, ‘'भारत दोनों ही देशों से तत्काल शत्रुता खत्म करने की अपील करता है और हमारे प्रधानमंत्री ने भी दोनों ही देशों के राष्ट्राध्यक्षों से बात की है और युद्धविराम का आह्वान किया है''।
यूनाइटेड नेशंस में भारत ने जताई चिंता
इन सबके बीच यूक्रेन में बिगड़ते हालात को लेकर भारत ने यूएनएससी में चिंता जाहिर की है। भारत ने कहा कि यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे युद्ध के बीच मानवीय कृत्यों को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। यूएन में भारत की ओर से बोलते हुए टीएस त्रिमूर्ति ने कहा कि भारत ने मानवीय मदद के लिए यूक्रेन और उसके पड़ोसी देशों को सात खेप भेजी है। मानवता के आधार पर लोगों की मदद की जा रही है, यह बिना किसी भेदभाव के लोगों तक पहुंचाई जा रही है, इन प्रयासों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

मानवीय संकट को सुलझाने की जरूरत
यूक्रेन के मसले पर चर्चा के दौरान यूएन में त्रिमूर्ति ने कहा कि यूक्रेन में बिगड़ते हालात और मानवीय संकट को तुरंत सुलझाने की जरूरत ही। यूएन के आंकड़े के अनुसार तकरीबन 15 लाख शरणार्थियों ने शरण पड़ोसी देश में ली है। इसके चलते एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हुआ है,जिस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। भारत लगातार इस तनाव को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए लगातार अपील कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों ही देशों के नेताओं से बात की है और तत्काल सीजफायर की अपील भी की है। दोनों देशों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की भी पीएम मोदी ने अपील की है।

अभी भी फंसे हुए हैं भारतीय छात्र
त्रिमूर्ति ने कहा कि रूस और यूक्रेन के साथ तमाम कोशिश के बाद भी सूमी में फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभी तक कोई रास्ता सामने नहीं आ सका है, इन छात्रों को बाहर निकालने के लिए सुरक्षित कोरिडोर अभी तक नहीं मिल सका है। भारत ने सुरक्षित कोरिडोर की मांग की है ताकि मासूम नागरिकों और छात्रों को यूक्रेन से बाहर निकाला जा सके। हम इस बात को लेकर काफी चिंतित है कि दोनों देशों के साथ कई बार की अपील के बाद भी सूमी से भारतीय छात्रों को बाहर निकालने के लिए सुरक्षित कोरिडोर तैयार नहीं किया गया।












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