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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस हफ्ते भी 2 अरब डॉलर कम हुआ, रुपये को बचाने RBI बेच रहा डॉलर

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से पहले डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 74 पर था और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की बिक्री 74 के स्तर पर की जा रही थी, लेकिन यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के ठीक बाद से डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने लगा।

नई दिल्ली, अगस्त 20: दुनियाभर में भारत मंदी की खबरों के बीच एक और हफ्ते भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कम हुआ है, जिसने भारत सरकार की चिंता बढ़ा दी है। 12 अगस्त को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा 2 अरब डॉलर और कम हो गया है और पिछले कई हफ्तों से लगातार भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आ रही है। हालांकि, दो हफ्ते पहले रिपोर्ट आई थी, कि एक बार फिर से अंतर्राष्ट्रीय निवेशक भारतीय बाजार में निवेश कर रहे हैं, लेकिन 12 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 2 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

डॉलर के मुकाबले और गिरेगा रुपया?

डॉलर के मुकाबले और गिरेगा रुपया?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रुपये में आई गिरावट की प्रमुख वजह भारतीय रिजर्व बैंक का वो कदम है, जिसमें रुपये को डॉलर के मुकाबले गिरने से बचाने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, आरबीआई डॉलर के मुकाबले रुपये को 80 स्तर से कम करने के लिए हस्तक्षेप किया है और डॉलर को बेचा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिकृ, यह एक ऐसा प्रयास है जिसे भारतीय केंद्रीय बैंक ने आवश्यक बताया है, और अत्यधिक अस्थिर मुद्रा बाजारों के बावजूद किसी भी तेज उतार-चढ़ाव को सीमित करते हुए, रुपये की स्थिरता को बनाए रखने के लिए जो कुछ भी करना होगा, वह करेगा।

कितना हो गया विदेशी मुद्रा भंडार?

कितना हो गया विदेशी मुद्रा भंडार?

आरबीआई के साप्ताहिक सांख्यिकीय पूरक डेटा से पता चलता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 12 अगस्त को समाप्त सप्ताह में घटकर 570.74 बिलियन डॉलर हो गया है, जो पिछले सप्ताह के 572.978 बिलियन डॉलर के मुकाबले 2.238 बिलियन डॉलर कम है। इस हफ्ते विदेशी मुद्रा भंडार में जो कमी आई है, वो पिछले कुछ हफ्तों में आई सबसे ज्यादा कमी है और अगस्त महीने के दूसरे हफ्ते एक बार फिर से देश का आयात गिरा है। जब से रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया है, उसके बाद से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, कुल 25 हफ्तों में से 19 हफ्तों में गिरा है और इस दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार कुल 61 अरब डॉलर गिर गया है। हालांकि, इसके बाद भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया में चौथे नंबर पर बना हुआ है और आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने नवीनतम दर-निर्धारण बैठक के बाद ये बात कही है, जब केंद्रीय बैंक ने लगातार तीसरी बार दरों में बढ़ोतरी की है।

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    74 से गिरकर 80 तक पहुंचा डॉलर

    74 से गिरकर 80 तक पहुंचा डॉलर

    यूक्रेन पर रूसी आक्रमण से पहले डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 74 पर था और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की बिक्री 74 के स्तर पर की जा रही थी, लेकिन यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के ठीक बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरना शुरू हो गया और उसी अनुपात में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी कम होने लगा। एक हफ्ते तो भारतीय रुपये का वैल्यू डॉलर के मुकाबले कम होकर 80 तक पहुंच गया। यूक्रेन युद्ध से पहले जिस डॉलर का वैल्यू लगातार कम हो रहा था, यूक्रेन युद्ध के बाद उसमें अचानकर तेजी दर्ज की जाने लगी और दुनिया की रिजर्व करेंसी डॉलर ने विश्व की करीब करीब सभी मुद्राओं पर भारी बढ़त बना ली। यहां तक की डॉलर के मुकाबले साल 2000 के बाद पहली बार यूरो का वैल्यू कम हो गया। जबकि रुपया ने डॉलर के मुकाबले अपने सर्वकालिक कमजोर 80 के स्तर को पार कर लिया, हालांकि, आरबीआई ने हाजिर और वायदा बाजारों में डॉलर बेचकर भारतीय मुद्रा को उस स्तर से नीचे रखने में मदद की है, लेकिन आरबीआई के इन प्रयासों से भारतीय विदेशी मुद्रा में कमी आ गई है।

    आरबीआई की यही है घोषित नीति

    आरबीआई की यही है घोषित नीति

    आरबीआई की विदेशी मुद्रा बाजारों में हस्तक्षेप करने की यह एक घोषित नीति है और यदि आरबीआई रुपये की वैल्यू में अस्थिरता देखता है, तो वो इस तरह के कदम उठाता है। लेकिन केंद्रीय बैंक कभी भी लक्षित स्तर नहीं देता है। वर्तमान कड़ी में, इसने 80-प्रति-डॉलर-चिह्न से ऊपर के मूल्यह्रास का सफलतापूर्वक बचाव किया है। आरबीआई के वित्तीय बाजार संचालन विभाग के सौरभ नाथ, विक्रम राजपूत और गोपालकृष्णन एस द्वारा किए गए अध्ययन, जो केंद्रीय बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, उसने कहा कि, वित्त वर्ष 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 22 प्रतिशत तक कम हो गया था, जबकि अभी सिर्फ 6 प्रतिशत ही कम हुआ है, जिसके लिए यूक्रेन संकट जिम्मेदार है और और धीरे धीरे इसमें सुधार आने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

    2008 बनाम 2022

    2008 बनाम 2022

    निरपेक्ष आधार पर अगर देखा जाए, तो साल 2008-09 के वैश्विक वित्तीय संकट के कारण भारत के विदेश मुद्रा भंडार में 70 अरब डॉलर की गिरावट आई थी, जो कि COVID-19 अवधि के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 17 अरब डॉलर तक गिरा था। जबकि, यूक्रेन संकट के कारण इस वर्ष 29 जुलाई तक भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में 56 अरब डॉलर की कमी आई है। पिछले महीने से भारतीय पूंजी बाजारों में विदेशी निवेशकों की वापसी ने संभवत: रुपये और देश के आयात कवर के नुकसान को सीमित कर दिया है। दरअसल, कई महीनों तक भारतीय संपत्ति के शुद्ध विक्रेता होने के बाद, विदेशी निवेशक जुलाई में घरेलू शेयरों और बांडों के शुद्ध खरीदार बन गए, यह प्रवृत्ति अभी भी इस महीने चल रही है।

    तेल की भी है अहम भूमिका

    तेल की भी है अहम भूमिका

    वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 100 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट ने भी निवेशकों की धारणा को बढ़ावा दिया है। मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सप्ताह के लिए तेल की कीमतों में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई और डर है कि आर्थिक मंदी से कच्चे तेल की मांग कमजोर हो जाएगी। हालांकि, अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत काफी कम हो गई है और भारत को रूस से भी कम कीमत पर तेल मिल रहा है। लेकिन, उसके बाद भी अमेरिकी डॉलर में मजबूती पांच सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जिसने कच्चे तेल से होने वाली लाभ को भी सीमित कर दिया है, क्योंकि यह अन्य मुद्राओं में खरीदारों के लिए तेल को अधिक महंगा बना देता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए अच्छी खबर है, जो अपनी तेल जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है और व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है।

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