मोदी सरकार की एजुकेशन डिप्लोमेसी, अफ्रीकी देशों में फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट और IIT खोलेगा भारत
भारत हमेशा से अफ्रीकी छात्रों के लिए पसंसीदा स्थान रहा है और अब भारत का जोर अफ्रीकी देशों में ही भारतीय संस्थानों की स्थापना करना है। भारत के लिए इसके दूरगामी परिणाम होंगे।

India's education diplomacy: अफ्रीकी देशों के अंदर अपनी पहचान को मजबूत करने के लिए भारत ने पूरे महाद्वीप के अंदर एजुकेशन डिप्लोमेसी की शुरूआत की है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत पूरे अफ्रीकी महाद्वीप में अपने प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों के परिसरों की स्थापना करके अफ्रीका में विश्व स्तरीय शिक्षा लाने की तैयार में है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी अफ्रीकी देश में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) के पहले विदेशी परिसर की स्थापना के लिए वर्तमान में भारत और तंजानिया के बीच बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि कैंपस इस साल के अंत तक अपनी कक्षाएं देना शुरू कर देगा।
इस बीच, भारत के राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के विदेशी परिसर का उद्घाटन भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पिछले हफ्ते युगांडा के जिंजा में किया है। माना जा रहा है, कि भारत की एजुकेशन पॉलिसी का मकसद, अफ्रीकी देशों की जनता की नजर में प्यार पाना है और 'नागरिक-टू-नागरिक' संबंधों को विस्तार देना है।
अफ्रीकी देशों में एजुकेशन डिप्लोमेसी
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न छात्रवृत्तियों के तहत अफ्रीका में छात्रों से फोरेंसिक विज्ञान पाठ्यक्रमों की उच्च मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, कि युगांडा में एनएफएसयू परिसर की स्थापना के कारणों में से एक, अफ्रीका के छात्रों के बीच विश्वविद्यालय की उच्च स्वीकृति थी।
एनएफएसयू के महत्व पर जोर देते हुए जयशंकर ने कहा, कि "नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है और दुनिया का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जो विशेष रूप से फॉरेंसिक विज्ञान के लिए समर्पित है। इसे गुजरात के अहमदाबाद में हमारे प्रधानमंत्री के गतिशील नेतृत्व में स्थापित किया गया था।"
रिपोर्ट के मुताबिक, युगांडा में NFSU परिसर युगांडा के पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज के साथ साझेदारी कर रहा है, और इन क्षेत्रों में रिसर्च को बढ़ावा देने के साथ-साथ फोरेंसिक विज्ञान, व्यवहार विज्ञान, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और संबद्ध विज्ञान में पाठ्यक्रम प्रदान करेगा। यह पहली बार है कि भारत के किसी सरकारी विश्वविद्यालय ने देश के बाहर एक शैक्षणिक परिसर खोला है।
कैंपस खोलने के लिए NFSU और युगांडा के अधिकारियों के बीच कुछ समय से बातचीत चल रही थी और इस मुद्दे ने गति उस वक्त पकड़ी, जब युगांडा के राष्ट्रपति ने अगस्त 2022 में भारतीय प्रधान मंत्री मोदी को चिट्ठी लिखा था। प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत संबंधित मंत्रालयों को NFSU का समर्थन करने का निर्देश दिया था और फिर जिंजा में ट्रांजिट कैंपस के उद्घाटन का मार्ग प्रशस्त करने वाला यह प्रस्ताव पास हो गया था।
अफ्रीकी छात्रों के बीच प्रसिद्ध है भारत
भारत हमेशा से अफ्रीकी छात्रों की पढ़ाई के लिए एक प्रसिद्ध स्थान रहा है और अफ्रीका में शीर्ष भारतीय विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक तकनीकी संस्थानों की स्थापना से दोनों पक्षों के बीच शैक्षिक संबंधों को और मजबूत होने की उम्मीद है। उच्च शिक्षा के लिए विदेश यात्रा करने वाले अफ्रीकी छात्रों के लिए भारत, शीर्ष पांच गंतव्यों में बना हुआ है।
युगांडा में एनएफएसयू परिसर की स्थापना, अफ्रीका में शैक्षिक क्षमताओं का समर्थन करने के भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ये कैंपस तुरंत अपनी कक्षाएं शुरू करेगा, जबकि दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के तहत, जिंजा में एक स्थायी परिसर स्थापित किया गया है। NFSU के वर्तमान में भारत में नौ परिसर हैं, जो गुजरात, दिल्ली, गोवा, त्रिपुरा, भोपाल, पुणे, गुवाहाटी, मणिपुर और धारवाड़ में फैले हुए हैं।
विश्व स्तरीय शिक्षा को अफ्रीका में लाने के भारत के प्रयासों का इस महाद्वीप पर दूरगामी प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। तंजानिया में IIT परिसर और युगांडा में NFSU परिसर की अपेक्षित स्थापना के साथ, भारत यह सुनिश्चित करने में मदद कर रहा है, कि अफ्रीका के पास सर्वोत्तम शिक्षा के अवसर और सुविधाएं उपलब्ध हों और आने वाले सालों में जब इन संस्थानों से पढ़े वाले छात्र, देश की कमान संभालेंगे, तो उस वक्त भारत को इसका काफी फायदा होगा।












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