साल के आखिरी हफ्ते बहुत बड़ा समझौता ! भारत को हथियार बनाने में मदद करेगा रूस, पुतिन जैसा दोस्त कोई नहीं!
jaishankar-Vladimir Putin: रूस के राष्ट्रपति सामान्यत: किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष के अलावा दूसरे मंत्रियों से मुलाकात नहीं करते हैं, लेकिन इस साल ये दूसरी बार हुआ है, जब उन्होंने भारत के 'जूनियर' नेताओं से मुलाकात की है।
साल की शुरूआत में व्लादिमीर पुतिन ने भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल से मुलाकात की थी और अब रूसी राष्ट्रपति ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की है और इस मुलाकात के दौरान उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मॉस्को आने का न्योता दिया है।

रूसी राष्ट्रपति ने काफी खुशनुमा माहौल में भारतीय विदेश मंत्री से मुलाकात की है और बैठक के दौरान उनका बॉडी लैंग्वेज काफी पॉजीटिव दिख रहा था।
रूस-भारत हथियार प्रोडक्शन समझौता
वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुधवार को मॉस्को में अपने भारतीय समकक्ष सुब्रह्मण्यम जयशंकर के साथ बातचीत के बाद कहा, कि रूस और भारत ने संयुक्त रूप से सैन्य उपकरण बनाने की योजना पर बातचीत में ठोस प्रगति की है।
एक संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए, लावरोव ने कहा, कि ऐसा सहयोग रणनीतिक प्रकृति का है और दोनों देशों के हित में है और इससे यूरेशियन महाद्वीप पर सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, कि मॉस्को अपने सैन्य हार्डवेयर आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने की भारत की इच्छा का सम्मान करता है और भारत की जरूरत की चीजों को भारत में बनाने की नई दिल्ली की इच्छा का समर्थन करने के लिए भी तैयार है।
वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले साल पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात होगी।
जयशंकर ने कहा कि उन्होंने और लावरोव ने यूक्रेन और गाजा में संघर्ष के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार और निवेश पर चर्चा की।
आपको बता दें, कि 2022 में पश्चिम द्वारा यूक्रेन में युद्ध को लेकर मास्को पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के बाद से भारत रूस के प्रमुख आर्थिक साझेदारों में से एक बन गया है।
रूस ने अपने अधिकांश तेल निर्यात को भारत की ओर मोड़ दिया है और ब्रिक्स देशों के समूह के भीतर कूटनीति बढ़ा दी है, जिसके दोनों देश संस्थापक सदस्य हैं।
जयशंकर के मुताबिक, इस साल भारत-रूस व्यापार 50 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि नई दिल्ली रूस के साथ द्विपक्षीय निवेश संधि के साथ-साथ मॉस्को के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने की इच्छुक है।
दुनिया का शीर्ष हथियार खरीदने वाला देश है भारत
आपको बता दें, कि भारत दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाले देशों में शामिल रहा है और मोदी सरकार की कोशिश भारत को हथियार प्रोडक्शन मामले में आत्मनिर्भर बनाने की है। लिहाजा, मोदी सरकार के कार्यकाल में ज्यादातर हथियार डील ऐसे हो रहे हैं, जिनमें हथियारों का प्रोडक्शन भारत में बतौर पार्टनर शामिल हुआ है।
इस साल मार्च में आए SIPRI की रिपोर्ट में दुनिया में सबसे ज्यादा हथियार खरीदने वाले देशों की लिस्ट में भारत शीर्ष पर बरकरार था। SIPRI ने कहा है, कि दुनिया में कुल हथियारों के आयात में भारत की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत है और साल 2018 से 2022 के बीच भारत ने सबसे ज्यादा हथियार खरीदे हैं।
इससे पहले भारत, साल 1993 से ही दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बना हुआ है। हालांक, अब भारत सरकार ने हथियारों के आयात के जगह आत्मनिर्भर भारत के तरफ ध्यान दिया है और कई हथियारों का निर्माण अब भारत में ही किया जाने लगा है।
वहीं, साल 2018 से 2022 के बीच भारत ने रूस से हथियार खरीदने में काफी कमी कर दी है और इन चार सालों में भारत का रूस से हथियार आयात 64 प्रतिशत से गिरकर 45 प्रतिशत तक आ गया है और आने वाले वक्त में इसमें और कमी आने की संभावना है।












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