नेहरू के शासन में चीन ने अरूणाचल प्रदेश में कब्जा कर बनाया गांव, पेंटागन रिपोर्ट पर पहली प्रतिक्रिया
पिछले हफ्ते पेंटागन ने भारत और चीन विवाद को लेकर अमेरिकी संसद में रिपोर्ट पेश किया है, जिसमें दावा किया गया है कि, चीन ने भारत के अरूणाचल प्रदेश में जमीन पर कब्जा कर लिया है।
नई दिल्ली, नवंबर 09: भारत के अभिन्न अंग अरूणाचल प्रदेश में घुसकर भारतीय जमीन पर गांव बनाने की अमेरिकी रिपोर्ट पर पहली बार भारत की तरफ से प्रतिक्रिया दी गई है। भारतीय समाचार एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि, चीन ने भारतीय जमीन पर आज नहीं, बल्कि उस वक्त कब्जा किया था, जब भारत में पंडित नेहरू की सरकार थी। समाचार एजेंसी एएनआई ने भारतीय सुरक्षा एजेसियों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि, जिस गांव के बनने का दावा किया गया है, वो नेहरू के शासनकाल में ही बन गया था।

अरूणाचल में चीन ने बनाया गांव?
दरअसल, पिछले हफ्ते पेंटागन ने भारत और चीन विवाद को लेकर अमेरिकी संसद में रिपोर्ट पेश किया है, जिसमें दावा किया गया है कि, चीन ने भारत के अरूणाचल प्रदेश में जमीन पर कब्जा कर लिया है और 100 घरों वाले एक गांव का निर्माण चीन की तरफ से किया गया है। पेंटागन की रिपोर्ट ने भारत में खलबली मचा दी है और विपक्षी पार्टियां भारत सरकार से सवाल पूछ रही है। भारतीय सुरक्षा एजेंसी के एक बड़े अधिकारी के हवाले से एएनआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, पेंटागन की रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश के जिस क्षेत्र पर गांव बनाने का दावा किया गया है, उस क्षेत्र पर चीन ने 1959 में ही कब्जा कर लिया था।

पेंटागन की रिपोर्ट पर जवाब
एएनआई की रिपोर्ट में भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान से जुड़े बड़े अधिकारी ने कहा है कि, जिस क्षेत्र पर कब्जा होने का दावा किया गया है, उस पर 1959 में असम राइफल्स पोस्ट पर कब्जा करने के बाद चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का कब्जा था। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कांग्रेस को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा कि, चीन ने 2020 में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और भारत के अरुणाचल प्रदेश के बीच विवादित क्षेत्र के अंदर एक बड़ा 100-घर का नागरिक गांव बनाया है। सूत्रों ने बताया कि यह गांव अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में विवादित सीमा से लगा हुआ है, जो चीन के नियंत्रण वाले क्षेत्र में है।

1959 में कब्जा होने का दावा
समाचार एजेंसी एएनआई से सूत्रों ने स्पष्ट करते हुए कहा कि, "इस गांव का निर्माण चीन ने उस इलाके में किया है, जिस पर 1959 में असम राइफल्स की चौकी पर कब्जा करने के बाद पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) का कब्जा था।" सूत्रों ने कहा कि, "वर्षों से उन्होंने इस क्षेत्र में एक सेना की चौकी बनाए रखी है और चीनियों द्वारा किए गए और आज जिस निर्माण की बात की जा रही है, वो थोड़े समय में नहीं, बल्कि पिछले काफी सालों से चल रहे हैं।" अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट ने चीन को सीमा पर टकराव की श्रृंखला के लिए दोषी ठहराया है, जिसकी परिणति जून 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के तौर पर हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गये थे।

विवादित क्षेत्र बनाने की कोशिश
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन उस तमाम हिस्से को अब विवादित हिस्सा बनाने में कामयाब हो गया है, जो भारत का हिस्सा है। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि, "2020 में चीन ने चीनी तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और एलएसी के पूर्वी क्षेत्र में भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य के बीच विवादित क्षेत्र के अंदर एक बड़ा 100-घर का नागरिक गांव बनाया है।'' पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, चीन द्वारा अरूणाचल में गांव बनाए जाने की घटना ने भारत सरकार को घबराहट में आ गई है।

अरूणाचल में गांव बनाने का दावा
रिपोर्ट में पिछले साल अरुणाचल प्रदेश में चीन की सरकार द्वारा त्सारी नदी के किनारे एक विवादित क्षेत्र में एक नए गांव का निर्माण करने का जिक्र किया गया है। भारतीय अधिकारियों ने सीमा पर पीएलए द्वारा ऐसी नई बस्तियों को 'दोहरे उद्देश्य' के रूप में वर्णित किया है, जिसमें संभावित सैन्य भूमिका भी है।

बड़े गांव का निर्माण
रिपोर्ट में कहा गया है कि, ''चीन की पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना और चीन की सेना पीएलए ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और एलएसी के पूर्वी क्षेत्र में बड़े गांव का निर्माण किया है। इस गांव में 100 से ज्यादा गांवों का निर्माण किया गया है''। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, ''भारत-चीन सीमा पर चीन के द्वारा किए गये इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण, और निर्माण कार्य में लगातार वृद्ध ने भारत की सरकार को घबराहट में भर दिया है''।












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