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UN से आरपार की लड़ाई के मूड में भारत.. फंडिंग में भारी कटौती के बाद शांति सैनिकों को भी बुला सकता है वापस..

India Cuts UN Funding: भारत ने अभी तक का सबसे सख्त कदम उठाते हुए यूनाइटेड नेशंस की फंडिग में भारी कटौती कर दी है और ऐसी रिपोर्ट आ रही हैं, कि बहुत जल्द भारत सरकार यूएन पीस कीपिंग फोर्स से भारतीय सैनिकों को वापस बुला सकती है।

वहीं, भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के एक वरिष्ठ सदस्य ने भी भारत से विश्व स्तर पर शांति मिशनों से हटने का आह्वान किया है, क्योंकि, नई दिल्ली लगातार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए जोर दे रही है, लेकिन इसकी कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है।

India Cuts UN Funding

भारत ने घटाई संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग

ग्लोबल सॉफ्टवेयर एज अ सर्विस (सास) की दिग्गज कंपनी ज़ोहो कॉर्पोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीधर वेम्बू ने 15 फरवरी को ट्वीट किय, कि संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग को कम करने का भारत का कदम "एक स्वागत योग्य कदम" है और उन्होंने भारत से संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना मिशन का हिस्सा ने बनने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा, कि जब संयुक्त राष्ट्र की शक्तियां दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले देश को मान्यता नहीं देती हैं तो भारतीयों को इस निकाय के साथ "अपना समय और पैसा बर्बाद" नहीं करना चाहिए।

आपको बता दें, कि श्रीधर वेम्बू को 2021 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया था और फरवरी 2021 में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) में नियुक्त किया गया था। NSAB राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के तहत एक सलाहकार निकाय है और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को रिपोर्ट करता है।

UNSC की फंडिंग में भारत ने कटौती की

संसद में पेश किए गए 2024-25 के अंतरिम बजट में, भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2023-24 के संशोधित अनुमान की तुलना में संयुक्त राष्ट्र सहित अलग अलग अंतरराष्ट्रीय निकायों के लिए फंडिंग में 35.16 प्रतिशत की कटौती का प्रस्ताव रखा है।

2024-2025 के लिए, अंतरिम बजट में बिम्सटेक, सार्क और संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय निकायों पर खर्च करने के लिए विदेश मंत्रालय के लिए 558.12 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया था।

2023-2024 के संशोधित अनुमान (आरई) में, वित्त मंत्रालय ने वैश्विक संस्थाओं के योगदान के लिए 866.70 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं। मिसाल के तौर पर जून 2024 तक नई भारत सरकार की स्थापना के बाद इस साल के अंत में पेश किया जाने वाला नियमित बजट में इस राशि को बढ़ाने का काम किया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने यूएनएससी को 2024-25 के लिए सिर्फ 175 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 54 प्रतिशत से ज्यादा की कटौती है। जबकि, इससे पिछले साल भारत ने यूएनएससी को 382.54 करोड़ रुपए दिए थे।

वहीं, द प्रिंट की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि "विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र की फंडिंग में कटौती की है, जो काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत लंबे समय से संगठन में सुधारों की मांग कर रहा है, खासकर इसकी सबसे शक्तिशाली शाखा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की संरचना को लेकर।"

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 78वें सत्र के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस ने जनवरी 2024 में अपनी भारत यात्रा के दौरान, यूएनएससी के स्थायी सदस्य होने के लिए दक्षिण एशियाई दिग्गज की स्थिति और पात्रता को स्वीकार किया था, क्योंकि, सबसे ज्यादा आबादी वाला देश होने के बाद भी भारत इसका स्थाई सदस्य नहीं है।

भारत करता आया है काफी महत्वपूर्ण योगदान

हालांकि, कई एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं, कि यूएनएससी के बजट में कटौती से भारत क्या हासिल करना चाहता है, क्योंकि भारत लगातार यूएनएससी में सुधारों की मांग करता आया है।

भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान.. ये चारों मिलकर जी-4 का निर्माण करते हैं और लगातार यूएनएससी में तत्काल सुधारों की मांग करते आए हैं, ताकि मौजूदा जियो-पॉलिटिकल हकीकतों का समाधान किया जा सके।

भारत 4.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 7 फरवरी, 2024 के अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों के अनुसार, यह अमेरिका (US$27.9 ट्रिलियन), चीन (US$18 ट्रिलियन), जर्मनी (US$4.7 ट्रिलियन) और जापान (US$4.2 ट्रिलियन) से ठीक पीछे है और एक से 2 सालों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा।

ये G4 देश, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीटों के लिए एक-दूसरे के दावों का समर्थन करते हैं, जो अभी सिर्फ पांच देशों अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और चीन को हासिल है।

भारत आखिरी बार जून 2020 में UNSC के लिए एक गैर-स्थायी सदस्य के रूप में चुना गया था, जिसने UNGA के कुल 193 सदस्य-राज्यों में से 184 वोटों का सबसे लोकप्रिय वोट जीता था। भारत 2021-22 कार्यकाल के लिए UNSC का एक अस्थायी सदस्य था।

तब, उस वर्ष एशिया-प्रशांत श्रेणी के अंतर्गत भारत एकमात्र उम्मीदवार था। यूएनएससी में भारत का 2021-22 का आठवां कार्यकाल था और भारत को ये मौका 10 सालों के बाद मिला था।

यूएन शांति सेना में भारतीय सैनिक

भारत ने पिछले 70 सालों में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में 2 लाख से ज्यादा सैन्य और पुलिस कर्मियों का योगदान दिया है। 30 नवंबर 2023 तक, भारत 6,073 कर्मियों के साथ वैश्विक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र शांति प्रयासों में तीसरा सबसे बड़ा सैन्य योगदानकर्ता है। केवल नेपाल, 6,247 कर्मियों के साथ, और बांग्लादेश, 6,197 सैनिकों के साथ, भारत से ज्यादा संख्या में सैन्य योगदान दे रहे हैं।

जबकि पाकिस्तान 4,164 कर्मियों के साथ पांचवें स्थान पर है, वहीं, चीन के 2267 सैनिक, फ्रांस के 587 सैनिक यूएन शांति सैनिकों में शामिल हैं।

संयुक्त राष्ट्र के तहत कुल 66,839 शांति सैनिकों में से भारत का कार्मिक योगदान लगभग 10 प्रतिशत है, फिर भी भारत स्थाई सदस्य नहीं है, लिहाजा अब भारत ने सख्त रूख अपनान शुरू किया है।

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