भारत ने चीनी ड्रोन के पार्ट्स के आयात पर लगाया प्रतिबंध, एक ही हफ्ते में बाइडेन के बाद मोदी का दूसरा वार
भारत ने चीन से ड्रोन के पुर्जों के आयात पर बैन लगा दिया है। सरकार ने ये कदम हाल के महीनों में सुरक्षा जोखिमों के बारे में चिंताओं के कारण उठाया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने कुछ सरकारी कागजात और 4 रक्षा अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर ये दावा किया है।
अधिकारियों ने मुताबिक देश के सुरक्षा तंत्र से जुड़े नेताओं को चिंता है कि ड्रोनों के कम्युनिकेशन फंक्शन, कैमरा, रेडियो ट्रांसमिशन और ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर में चीनी पुर्जों के मौजूद होने से खुफिया जानकारियां खतरे में पड़ सकती हैं।

भारत ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब परमाणु-सशस्त्र पड़ोसी से तनाव के बीच वह सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर दे रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट आगे बताती है कि देश में ड्रोन टेंडरों पर चर्चा के लिए फरवरी और मार्च में दो बैठकें बुलाई गईं।
इस बैठक में भारतीय सैन्य अधिकारियों ने संभावित बोलीदाताओं से कहा कि सुरक्षा कारणों की वजह से भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से उपकरण स्वीकार्य नहीं होंगे। हालांकि बैठक में चीन का नाम नहीं लिया गया लेकिन इसका तात्पर्य अनिवार्य रूप से चीन निर्मित उपकरण और उपघटक से था।
एक भारतीय रक्षा अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि देश को घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उच्च लागत स्वीकार करने के लिए तैयार रहना होगा। अधिकारी ने कहा कि साइबर हमले के खतरे के बावजूद भारतीय उद्योग चीन पर बुरी तरह निर्भर हो गया था।
उन्होंने कहा, "अगर आज मैं चीन से उपकरण खरीदूं और कहूं कि मैं इसे भारत में बनाना चाहता हूं, तो लागत 50 फीसदी बढ़ जाएगी।" उन्होंने कहा, "एक राष्ट्र के रूप में हमें यहां पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में मदद करने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।"
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2023 में वादा किया था कि रक्षा अनुसंधान और विकास के लिए इस वित्तीय वर्ष के बजट का एक-चौथाई हिस्सा निजी उद्योग के लिए होगा। इससे ड्रोन के उपकरण भारत में ही बनाए जा सकते हैं, जिससे चीन से उपकरण खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी।
इससे पहले 2019 में, पेंटागन ने चीन में बने ड्रोन और घटकों की खरीद और उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया था।












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