Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

India-Pak News: मरियम नवाज़ सरकार की बड़ी किरकिरी, लंदन विश्वविद्यालय ने कैंपस खोलने की खबर को किया खारिज

India-Pak News: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में इम्पीरियल कॉलेज लंदन की शाखा खोलने की सरकारी घोषणा ने देशभर में हलचल मचा दी है। सरकार ने इसे शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, लेकिन कुछ ही दिनों में यह दावा विवादों में घिर गया।

सोशल मीडिया पर इस खबर ने तेजी से जगह बनाई और लोगों के बीच सवाल उठने लगे कि क्या वास्तव में लंदन का यह प्रतिष्ठित संस्थान पाकिस्तान में कैंपस खोलने जा रहा है। अब इस घोषणा को लेकर सरकार की मंशा और उसकी सच्चाई पर बहस छिड़ गई है।

imperial-college-london-pak-maryam-nawaz-claim-controversy

सरकार ने किया था बड़े प्रोजेक्ट का ऐलान

पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने 18 नवंबर को लाहौर के नवाज शरीफ आईटी सिटी में लंदन विश्वविद्यालय की शाखा खोलने का दावा किया था। इस घोषणा में कहा गया था कि विश्वविद्यालय के साथ-साथ 300 बिस्तरों वाला एक आधुनिक अस्पताल भी बनाया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह प्रोजेक्ट पंजाब के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।

सोशल मीडिया पर की गई थी आधिकारिक घोषणा

यह जानकारी पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा की गई थी। पोस्ट में बताया गया कि परियोजना की समीक्षा मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ की अध्यक्षता में की गई बैठक में की गई। मरियम नवाज़ ने इसे पंजाब की शिक्षा प्रणाली में "नया युग" शुरू होने की दिशा बताया था। सोशल मीडिया पर इसे लेकर सरकार के समर्थकों ने खूब प्रचार किया और इसे 'ऐतिहासिक पहल' बताया।

विश्वविद्यालय ने किया दावे का खंडन

लेकिन कुछ ही दिनों बाद इम्पीरियल कॉलेज लंदन ने आधिकारिक बयान जारी कर इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विदेशों में कोई भी कैंपस खोलने की हमारी कोई योजना नहीं है। बयान में यह भी जोड़ा गया कि इम्पीरियल कॉलेज लंदन के सभी कैंपस केवल यूनाइटेड किंगडम (UK) में ही स्थित हैं। इस बयान के बाद पाकिस्तान सरकार के दावे पर सवाल उठने लगे और सोशल मीडिया पर आलोचनाओं की बाढ़ आ गई।

मरियम नवाज सरकार की किरकिरी

लंदन विश्वविद्यालय द्वारा दिए गए इस बयान के बाद मरियम नवाज़ सरकार की बड़ी किरकिरी हो गई। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि जनता को झूठे सपने दिखाकर गुमराह किया जा रहा है। कुछ पत्रकारों और विशेषज्ञों ने भी इस घटना को "प्रचार आधारित राजनीति" का उदाहरण बताया। कई लोगों ने इसे सरकार की विश्वसनीयता पर "गंभीर चोट" करार दिया।

शिक्षा क्षेत्र में विश्वसनीयता पर उठा सवाल

यह मामला केवल एक घोषणा-घोटाला नहीं बल्कि पाकिस्तान के शिक्षा क्षेत्र में विश्वसनीयता और पारदर्शिता की कमी को उजागर करता है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि किस तरह सरकारी घोषणाएँ बिना पर्याप्त प्रमाण या समझौते के की जाती हैं। इससे जनता के भरोसे और सरकार के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है, जो शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक असर डालती है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+