चीन के जानी दुश्मन को भारत बेचेगा अपना ‘ब्रह्मास्त्र’! ड्रैगन की नाक के नीचे होगी तैनाती, बौखलाएंगे जिनपिंग
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि, आकाश मिसाइल डील के पीछे भारत का दो मकसद है। पहला मकसद चीन को हिमालय से दूर रखने के लिए दक्षिण पूर्व एशिया में सैन्य संतुलन को झुकाने का प्रयास है और दूसरा मकसद...
नई दिल्ली/हनोई, जून 10: चीन के जानी दुश्मन वियतनाम के साथ भारत एक बहुत बड़ा डिफेंस डील करने जा रहा है और वियतान, अकसर धमकी देने ड्रैगन की नाक में दम में दम करने के लिए अपने सोवियत युग के मिसाइल सिस्टम को भारतीय ब्रह्मास्त्र के साथ रिप्लेस करने के लिए काफी हद तक तैयार हो चुका है। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत हनोई के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए अपने रक्षा उद्योग के स्वदेशीकरण को मजबूत करने के दोहरे उद्देश्य के साथ, वियतनाम को आकाश मिसाइल दे सकता है।

चीन की नाम में करेगा दम
एशिया टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि, आकाश मिसाइल डील के पीछे भारत का दो मकसद है। पहला मकसद चीन को हिमालय से दूर रखने के लिए दक्षिण पूर्व एशिया में सैन्य संतुलन को झुकाने का प्रयास है और भारत का दूसरा मकसद हथियारों के स्वदेशीकरण को बढ़ाना है, जो मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत भारत ने फिलिपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेची थी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और वियतनाम के बीच सतह से आकाश में मार करने वाली आकाश मिसाइल को लेकर डील चल रही है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस हफ्ते वियतनाम का दौरा किया था और उम्मीद की जा रही है कि वियतनाम भारतीय मिसाइल आकाश के लिए अपनी सहमति जल्द दे सकता है।

आकाश मिसाइल की खासियत
आकाश एक शॉर्ट-रेंज एसएएम मिसाइल है जिसे भारत में 96 प्रतिशत बनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आकाश मिसाइल की 25 किलोमीटर रेंज तक मार करने में सक्षम है और इसकी सबसे बड़ी खासियत दुश्मनों से अपने कमजोर ठिकाने को हवाई हमलों से बचाना है। आकाश मिसाइल की दूसरी बड़ी खासियत एक साथ कई राउंड की फायरिंग है और ये ऑटोनॉमस मोड पर काम करता है और एक साथ कई लक्ष्यों को भेद सकता है। आकाश मिसाइल में इलेक्ट्रिक काउंटर- काउंटरमेजर्स फीचर लगा हुआ है और यह एक मोबाइल मिसाइल है, जिसे काफी आसानी से एक जगह से दूसरे जगह फिट किया जा सकता है। भारतीय वायु सेना (IAF) ने 2014 में आकाश को सेवा में शामिल किया था।

भारत और वियतनाम में बातचीत
वियतनाम और भारत साल 2017 से ही आकाश मिसाइल सिस्टम के बारे में बातचीत कर रहे हैं, क्योंकि वियतनाम अपने पुराने सोवियत युग के एस-125/एस-75 मीडियम रेंज एसएएम को बदलना चाहता है। हालांकि, वियतनाम ने उस समय भारत के प्रस्ताव को यह कहकर अस्वीकार कर दिया था, कि उसे लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। लेकिन, अब वियतनाम आकाश न्यू जेनरेशन (आकाश एनजी) वेरिएंट पर नजर गड़ाए हुए है। जिसकी रेंज 70-80 किलोमीटर है। हनोई स्थानीय मिसाइल उत्पादन को सक्षम करने के लिए भारत के साथ एक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते की मंजूरी की भी मांग कर रहा है।

आकाश का बनेगा पहला ग्राहक!
वियतनाम 2021 से आकाश एनजी के डेवलपमेंट को करीब से देख रहा है और 2023 में उत्पादन की मंजूरी मिलने के बाद यह संभावित रूप से आकाश मिसाइल का पहला ग्राहक बन सकता है। हालांकि, माना जा रहा है कि, आकाश एनजी मिसाइल सिस्टम का निर्यात संस्करण 2025 तक तैयार नहीं हो सकता है। एशिया टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वियतनाम आकाश मिसाइल को अपने लिए इसलिए भी फायदेमंद मानता है, क्योंकि आकाश एनजी वियतनाम की लंबी दूरी की एस-300पी प्रणालियों और निम्न-स्तरीय स्पाइडर बैटरी के बीच मध्य-स्तर की दूरी के अंतर को कवर कर सकता है। वर्तमान में, वियतनाम रूस से लंबी दूरी की एस-300पी और इज़राइल से लो-लेवल SPYDER का उपयोग करता है। S-300P विभिन्न ऊंचाई पर हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए कई प्रकार की मिसाइलों का उपयोग करता है, जिसमें 5V55K मिसाइल की सीमा 47 किलोमीटर है, जबकि 5V55R और 48N6 में क्रमशः 75 किलोमीटर और 150 किलोमीटर की सीमा है।

स्पाइडर की जगह आकाश क्यों?
वर्तमान में वियतनाम इजरायली मिसाइल डिफेंस सिस्टम स्पाइडर का इस्तेमाल करता है, जो लो-लेवल होने के बाद भी एयर डिफेंस में माहिर है और स्पाइडर डिफेंस सिस्टम दो मिसाइलों का इस्तेमाल करता है, पायथन इंफ्रारेड, जिसकी क्षमता 15 किलोमीटर की रेंज वाली कम दूरी की मिसाइल और डर्बी सक्रिय रडार-निर्देशित मिसाइल, जिसकी रेंज 50 किलोमीटर है। वहीं, यह स्पष्ट नहीं है, कि इजरायली स्पाइडर के साथ होने के बाद भी वियतनाम भारत से आकाश मिसाइल खरीदने के लिए काफी ज्यादा कोशिश क्यों कर रहा है। आकाश की मिनिमम इंगेजमेंट एल्टीच्यूड 30 मीटर और 2,520 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार है।

वियतनाम के लिए विकल्प बनेगा भारत!
वियतनाम का सैन्य आधुनिकीकरण अभियान 2016 के बाद से धीमा हो गया है, और अब वियतनाम का रक्षा बजट भी मामूली है, लिहाजा वियतनाम के लिए पश्चिमी देशों से हथियार खरीदना संभाव नहीं है। लिहाजा, इस प्रकार भारत किफायती उच्च-स्तरीय हथियारों के वैकल्पिक स्रोत के रूप में अंतर को भरने के लिए खुद को स्थिति में ला सकता है। इस साल की शुरुआत में, भारत ने फिलीपींस के साथ अपनी ब्रह्मोस सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल बेचने का सौदा किया है, जिससे संभावित रूप से मनीला हथियार का पहला विदेशी उपयोगकर्ता बन गया है और अगर वियतनाम के साथ ये सौदा फाइनल होता है, तो फिर वियतनाम भारत का दूसरा हथियार ग्राहक होगा। फिलिपींस डील भारत के लिए एक बड़ी जीत माना गया, क्योंकि इसका उद्देश्य अपने रक्षा उद्योग का स्वदेशीकरण करना, क्षेत्रीय भागीदारों को परिष्कृत हथियार बेचना और रूसी हथियारों के आयात पर निर्भरता को कम करना है।

वियतनाम भी खरीद सकता है ब्रह्मोस
फिलीपींस के अलावा, इंडोनेशिया और वियतनाम भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीद सकता है और फिलीपींस को ब्रह्मोस की बिक्री को एक टेम्पलेट के रूप में इस्तेमाल करते हुए, भारत वियतनाम को आकाश प्रणाली बेचकर इस सफलता को दोहराने की कोशिश कर सकता है। व्यापक रणनीतिक अर्थों में, भारत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को हिमालय में चीन के खिलाफ एक असंतुलन पैदा करने का लक्ष्य बना सकता है, जहां दोनों शक्तियां एक उच्च पर्वत सशस्त्र गतिरोध में बंद हैं। और अगर भारत ऐसा करने में कामयाब होता है, तो चीन बुरी तरह से बौखला जाएगा, क्योंकि फिलिपींस और वियतनाम के साथ चीन के संबंध हमेशा से खराब रहे हैं, खासकर दक्षिण चीन सागर में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण रहती है।












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