मालदीव में मनपसंद सरकार बनाने जी-जान से जुटा भारत, किए धुआंधार समझौते, चीन का हो पाएगा खेल खत्म?
India-Maldives News: हिन्द महासागर के प्रमुख देश मालदीव से चीन को हमेशा के लिए खदेड़ने की कोशश में भारत काफी कड़ी मेहनत कर रहा है। भारत इसके लिए मालदीव के राष्ट्रपति के हाथ को मजबूत कर रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और उसके करीबी दक्षिणी भारतीय पड़ोसी मालदीव ने सितंबर में राष्ट्रपति चुनाव से पहले, उच्च प्रभाव वाले सामुदायिक विकास परियोजना योजना के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को नौ नए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारत-मालदीव में अहम समझौते
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के साथ बेहद अहम बैठक की है। अब्दुल्ला शाहिद, नई दिल्ली के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित करने के प्रयासों के तहत इस सप्ताह भारत की एक महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं।
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट करते हुए कहा, कि "मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद के साथ आज एक गर्मजोशी भरी और सार्थक बैठक हुई है। हमारी विकास साझेदारी में निरंतर प्रगति के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित हुआ। यह हमारे पड़ोसी के आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण में सीधे योगदान दे रहा है। हमने हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता और समृद्धि पर दृष्टिकोण साझा किए और हमारा सहयोग उन लक्ष्यों को कैसे आगे बढ़ाता है। नेबरहुड फर्स्ट और SAGAR दृष्टिकोण के लिए एक अच्छा दिन रहा।"
वहीं, मालदीव के विदेश मंत्री शाहिद ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी, कि मालदीव और भारत ने उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजना योजना के दूसरे चरण के तहत नौ नए समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया है। मालदीव इन एमओयू के जरिए देश में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यक्रमों को चला सकता है, जिससे मालदीव की वर्तमान सरकार को काफी फायदा मिल सकता है।
भारत और मालदीव के बीच वॉली कोर्ट के विकास, मानसिक स्वास्थ्य इकाई, स्कूल डिजिटलीकरण परियोजना, अस्पतालों और स्कूलों को अपग्रेड करने और संस्कृति के संरक्षण पर विभिन्न समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
अब्दुल्ला शाहिद ने कहा, कि "वॉली कोर्ट के विकास पर समझौता ज्ञापन। कांदिथेमू, समुदाय के बीच खेल और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा।"
विभिन्न एमओयू के लाभों का जिक्र करते हुए, अब्दुल्ला शाहिद ने आगे ट्वीट किया,कि "एक बार ये कार्यक्रम पूरा होने पर, भारतीय अनुदान सहायता के तहत आर.अनगोफारू अस्पताल में नई मानसिक स्वास्थ्य इकाई, व्यक्तियों के लिए मनोसामाजिक वातावरण सुनिश्चित करेगी और बेहतर सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए हमारी प्रगति में सहायता करेगी।"
मालदीव के विदेश मंत्री ने आगे बताया, कि "एम. ढिगारू में गेयधोशु मास प्लांट की स्थापना पर समझौता ज्ञापन, सरकार के लिए एक प्राथमिकता वाली परियोजना है। इससे स्थानीय समुदाय द्वारा लगातार पकड़ी गई मछलियों के प्रसंस्करण में आने वाले कई मुद्दों का समाधान हो जाएगा।"
मालदीव के राष्ट्रपति होंगे मजबूत
मालदीव में अभी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) की सरकार है, जिसके नेता इब्राहिम मोहम्मद सोलीह, देश के राष्ट्रपति हैं। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद, जो मालदीव की संसद के स्पीकर हैं, वो भी इसी पार्टी के बड़े नेता हैं।
इब्राहिम मोहम्मद सोलीह भारत के करीबी हैं और उनकी सरकार मालदीव में भारत की समर्थक सरकार है। जबकि मालदीव की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता अब्दुल्ला यामीन, भारत विरोधी और चीन समर्थक माने जाते हैं। लिहाजा, भारत की कोशिश ये है, कि मालदीव में इब्राहिम मोहम्मद सोलीह की सरकार बनी रहे।
इब्राहिम मोहम्मद सोलीह को मजबूत करने के लिए भारत ने मालदीव के साथ कई सामाजिक योजनाओं को लेकर समझौता किया है, जिससे सीधे मालदीव की आम जनता को फायदा पहुंचेगा और राष्ट्रपति की लोकप्रियता, जो फिलहाल अपनी ही पार्टी के अंदर पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद से चुनौती का सामना कर रहे हैं, को फायदा मिलेगा।
2018 से पहले, जब पीपीएम सत्ताधारी पार्टी थी, तो उसने खुलकर चीन का समर्थन किया था। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने खुलकर चीन के पक्ष में बैटिंग की थी और उनके कार्यकाल में भारत और मालवीद के संबंध काफी खराब हो गये थे।
लेकिन जब सोलिह प्रशासन सत्ता में आया, तो नई दिल्ली को मालदीव से शत्रुता से कुछ राहत मिली, और खोई हुई कूटनीतिक जमीन वापस मिली।
लेकिन, अब जब सत्तारूढ़ गठबंधन में कलह मच गया है, तो भारत के लिए ये चिंता बढ़ाने वाली बात है। लिहाजा, भारत यही उम्मीद कर रहा है, कि सत्तारूढ़ एमडीपी गठबंधन किसी भी तरह से फिर से सत्ता में वापस आए, लिहाजा भारत मालदीव की सोलीह सरकार को लगातार समर्थन दे रहा है और उनकी स्थिति को मजबूत करने में जी-जान से जुटा है।














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