बांग्लादेश में छात्रों के हिंसक प्रदर्शन से चिंताजनक हालात, भारत ने जारी की एडवाइजरी, यात्रा से बचने की सलाह
Bangladesh News: बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों में आरक्षण बहाल करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश में छात्रों का हिंसक प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी है, जिसमें 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसे देखते हुए भारत सरकार ने एडवाइजरी जारी की है।
भारत ने एडवाइजरी जारी करते हुए बांग्लादेश में रहने वाले अपने नागरिकों को और बांग्लादेश जाने वाले भारतीय नागरिकों को विरोध प्रदर्शन तक आवाजाही सीमित रखने की सवाल दी है। इस हिंसा के कारण कम से कम छह लोगों की मौत हो गई है और प्रधानमंत्री शेख हसीना ने हिंसा की जांच के आदेश दिए हैं।

बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग ने कहा है, कि "बांग्लादेश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, बांग्लादेश में रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों और भारतीय छात्रों को यात्रा से बचने और अपने सुरक्षित स्थान पर रहने और घर से बाहर कम से कम निकलने की सलाह दी जाती है।"
इसके अलावा, भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए तत्काल सहायता के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर उपलब्ध कराए गए हैं।
बांग्लादेश में चक्का जाम
छात्र प्रदर्शनकारियों ने इस हफ्ते की शुरुआत में हुई हिंसक झड़पों के बाद गुरुवार को पूरे देश में बंद की घोषणा की है। प्रदर्शन का संचालन करने वाले आसिफ महमूद ने कहा है, कि अस्पताल और आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। सिर्फ एम्बुलेंस सेवाओं को ही चलने दिया जाएगा।
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार को अपने संबोधन में हताहतों पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने न्यायिक जांच का वादा किया और प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया है, कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखें। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि हमारे छात्रों को (सुप्रीम कोर्ट में) न्याय मिलेगा। वे निराश नहीं होंगे।"
छात्रों के विरोध प्रदर्शन की वजह क्या है?
विरोध प्रदर्शन सरकारी नौकरियों में कोटे से असंतोष के कारण हो रहे हैं, जिसमें 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार के सदस्यों के लिए 30 प्रतिशत कोटा देना शामिल है। वर्तमान में, 56 प्रतिशत सरकारी नौकरियां विभिन्न कोटे के लिए आरक्षित हैं, जिससे आम छात्रों को सिर्फ 44 प्रतिशत सीटों में ही सलेक्शन के लिए फाइट करना पड़ता है।
स्वतंत्रता सेनानी कोटा विशेष रूप से विवादास्पद है, क्योंकि इसे हसीना की अवामी लीग पार्टी के प्रति वफादार लोगों के पक्ष में देखा जाता है। 17 करोड़ की आबादी वाले देश में लगभग 3 करोड़ 20 लाख युवा बेरोजगार हैं या शिक्षा से वंचित हैं, जिससे सरकार को लेकर निराशा काफी ज्यादा है।

प्रदर्शन के दौरान हिंसा और हताहत
विरोध प्रदर्शन तब शुरू हुआ जब इस महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने 30 प्रतिशत नौकरी कोटा बहाल करने का आदेश दे दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते इस आदेश को स्थगित कर दिया है, लेकिन विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। शेख हसीना ने छात्रों की मांगों को पूरा करने से इनकार कर दिया है और छात्रों के प्रदर्शन पर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की है, जिसने तनाव को और बढ़ा दिया।
आरक्षण विरोधी प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ अवामी लीग की छात्र शाखा के सदस्यों के बीच झड़पों में छह लोगों की मौत हो गई है, जिनमें चार छात्र शामिल हैं। मंगलवार को कैंपस में विरोध प्रदर्शन के दौरान रंगपुर विश्वविद्यालय के दूसरे वर्ष के एक छात्र की पुलिस ने गोली मारकर हत्या कर दी।
बांग्लादेश प्रदर्शन पर इंटरनेशनल रिएक्शन
संयुक्त राज्य अमेरिका ने बांग्लादेश में भड़की हिंसा की निंदा की और बांग्लादेश सरकार से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने बुधवार को कहा, कि "हम शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी हिंसा की निंदा करते हैं... हम फिर से सरकार से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के व्यक्तियों के अधिकारों को बनाए रखने का आह्वान करते हैं।"
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने भी हिंसा की घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने का आह्वान किया और प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है, कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभाएं मौलिक मानवाधिकार हैं।
यह अशांति शेख हसीना की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) लगातार प्रदर्शन की आग में घी डाल रही है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है, कि बांग्लादेश में प्राइवेट नौकरियां भी नहीं है, जिससे युवाओं में काफी असंतोष है और सरकार को शीघ्र इस समस्या का समाधान करना चाहिए।












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