G20 Summit: मोदी-बाइडेन द्विपक्षीय बैठक से पहले बड़ा रक्षा सौदा, भारत ने US को दिया किलर ड्रोन का ऑर्डर
Modi-Biden Meet: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन आज शाम करीब 7 बजे भारत पहुंच जाएंगे और आज शाम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनके डिनर का कार्यक्रम है। शुक्रवार को मोदी-बाइडेन बैठक से पहले, भारत ने 31 शीर्ष हथियारयुक्त MQ-9B रीपर यानि प्रीडेटर-बी ड्रोन के मेगा अधिग्रहण के लिए अमेरिकी सरकार को औपचारिक अनुरोध जारी किया है।
इस औपचारिक अनुरोध का लक्ष्य इस वित्तीय वर्ष के भीतर अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर करना है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने 31 'हंटर-किलर' दूर से संचालित फ्लाइट सिस्टम के लिए विस्तृत एलओआर (अनुरोध पत्र), उनके हथियार पैकेज, मोबाइल ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम और अन्य उपकरणों के साथ अनुरोध, "कुछ दिन पहले" अमेरिका को भेजा था।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्ष सूत्रों के हवाले से किलर ड्रोन को लेकर दिए गये ऑर्डर की जानकारी दी है।
भारत ने दिया ड्रोन का ऑर्डर
रिपोर्ट के मुताबिक, बाइडेन प्रशासन को भारत की तरफ से LoA (letter of offer and acceptance) मिल चुका है और अगले एक से 2 महीने के अंदर किलर ड्रोन को लेकर अपने फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रोग्राम के तहत अमेरिकी कांग्रेस को इसकी जानकारी दी जाएगी। जिसमें इस ड्रोन की लागत के साथ साथ तमाम जानकारियां शामिल होंगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने बाइडेन प्रशासन को 31 प्रीडेटर ड्रोन का ऑर्डर दिया है, जिसमें 15 समुद्री ड्रोन और 16 ड्रोन इंडियन एयरफोर्स के लिए हैं। अमेरिकी कांग्रेस में ऑर्डर पास हो जाने के बाद ड्रोन डील की आखिरी कीमत पर मुहर लगेगी।
टीओआई की रिपोर्ट में कहा गया है, कि 15 जून को भारतीय रक्षा मंत्रालय की प्रारंभिक मंजूरी में ड्रोन सौदे के लिए लगभग 3.1 अरब डॉलर की अनुमानित लागत "नोट" की गई है।
टीओआई के मुताबिक, एक सूत्र ने कहा है, कि "सुरक्षा पर कैबिनेट समिति से मंजूरी के बाद, इस वित्तीय वर्ष के भीतर, हाई एल्टीच्यूड और लॉंग एंड्यपुरेंस (HALE) ड्रोन के लिए वास्तविक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने पर जोर दिया जा रहा है।"
उन्होंने कहा, कि "सशस्त्र बल अगले छह से सात वर्षों में सभी ड्रोनों को शामिल करने का काम पूरा करने के इच्छुक हैं, जिन्हें निर्माता जनरल एटॉमिक्स (जीए) द्वारा भारत में 'असेंबल' किया जाएगा।"
भारत अमेरिका से जो ड्रोन खरीदने वाला है, वो चीन ड्रोनों के मुकाबले काफी ज्यादा एडवांस है। चीन अपना ड्रोन होंग-4 और विंग लूंग-2 पाकिस्तान को भी आपूर्ति करता है, लिहाजा अमेरिकी ड्रोन के जरिए भारतीय सेना काफी आसानी से चीनी और पाकिस्तानी ड्रोनों को काउंटर कर पाएगी।
अमेरिकी एमक्यू-9बी ड्रोन, हिंद महासागर में भारत की लंबी दूरी की निगरानी और सटीक हमले की क्षमताओं में ताकत जोड़ देगा।
अमेरिका के साथ होने वाले सौदे में ड्रोन बनाने वाली कंपनी जीए, भारतीय कंपनियों से कुछ घटकों की सोर्सिंग के अलावा भारत में "लागत प्रभावी और व्यापक वैश्विक रखरखाव, मरम्मत, ओवरहाल सुविधा भी" स्थापित करेगी। यानि, भारत में ही फैक्ट्री का निर्माण होगा, जहां ड्रोन की मरम्मत और उनका रखरखाव किया जाएगा।
कितना खतरनाक है MQ-9B रीपर ड्रोन?
लड़ाकू आकार के MQ-9B ड्रोन को क्षितिज ISR (खुफिया, निगरानी और टोही) मिशनों के लिए 40,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर करीब 40 घंटे तक उड़ान भरने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वहीं ये ड्रोन, हवा से जमीन पर सटीक हमलों के लिए बम से हमला करने वाली मिसाइलों और स्मार्ट मिसाइलों से लैस हैं।
आपको बता दें कि सी गार्जियन (MQ 9B) ड्रोन को दुनिया का सबसे ताकतवर ड्रोन कहा जाता है। ये वही ड्रोन है जिससे 31 जुलाई 2022 को दुनिया के मोस्ट वॉन्टेड टेररिस्ट अल जवाहिरी को काबुल में मार गिराया गया। मई 2021 तक अमेरिका के पास 300 से ज्यादा ऐसे ड्रोन थे।
भारत, जर्मनी, ग्रीस, इटली, फ्रांस, बेल्जियम, डोमिनिकन गणराज्य, नीदरलैंड, स्पेन, यूके, यूएई, ताइवान, जपान, मोरक्को सहित दुनिया के 13 से भी अधिक देश इसका इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका का ये ड्रोन इराक, सोमालिया, यमन, लीबिया और सीरिया में भी तैनात है।
ड्रोन का अनुमानित सौदा क्या है?
इसी साल जून महीने में प्रधानमंत्री मोदी कीअमेरिका के राजकीय यात्रा के समय भारत और यूएस के बीच 31 प्रीडेटर ड्रोन का सौदा किया गया था। इस डील के तहत भारत अमेरिका से 31 MQ-9B ड्रोन खरीदेगा, जिसे आमतौर पर MQ-9B Predator UAV ड्रोन के नाम से जाना जाता है।
भारत ने ये सौदा अमेरिका के साथ 3.072 अरब डॉलर का किया है और इस हिसाब से एक ड्रोन की कीमत 9.9 अरब अमेरिकी डॉलर बैठता है। वहीं, अमेरिका ने यही ड्रोन संयुक्त अरब अमीरात को 16.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर के हिसाब से बेचा है। यानि, भारत को यूएई के मुकाबले काफी कम कीमत पर ड्रोन बेचा जा रहा है।
भारतीय अधिकारी ने पिछले दिनों कहा था, कि कि भारत जिस ड्रोन के लिए सौदा कर रहा है, उसमें और भी एडवांस कॉन्फिगरेशन लगा है और इन्हें जनरल एटॉमिक्स ने तैयार किया है। नाम नहीं छापने की शर्त पर भारतीय अधिकारी ने बताया था, कि भारत को ये ड्रोन कम कीमत पर सिर्फ इसलिए मिल रहा है, क्योंकि हथियार बनाने वाली कंपनी अपने निवेश का एक बड़ा हिस्सा पहले के सौदों से वसूल कर चुकी है, इसीलिए दूसरे देशों की तुलना में भारत को कम कीमत पर ये ड्रोन मिल रहे हैं।












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