अरुणाचल प्रदेश की तीन खिलाड़ियों को चीन ने आने से रोका... भारत ने उठाया बड़ा कदम? बढ़ सकता है तनाव
China bars three female Indian athletes: अरूणाचल प्रदेश की तीन महिला खिलाड़ियों को चीन नहीं आने की इजाजत देने को लेकर भारत की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है, कि चीन ने अरूणाचल प्रदेश की रहने वाली तीन भारतीय मार्शल आर्ट एथलीटों को देश आने की इजाजत नहीं दी, जिसके बाद तीनों महिला खिलाड़ियों को हांगझू में एशियाई खेलों से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
वहीं, भारत के युवा मामले और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने विरोध स्वरूप चीन की अपनी निर्धारित यात्रा रद्द कर दी है। अनुराग ठाकुर, खिलाड़ियो का हौसला बढ़ाने के लिए चीन का दौरा करने वाले थे, जो अब उन्होने रद्द कर दी है।
वुशु फाइटर्स के रूप में प्रतिस्पर्धा करने वाली तीन महिलाएं पूर्वोत्तर भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश से हैं, जिसपर चीन लंबे वक्त से नजर गड़ाकर रखता है और इसे "दक्षिण तिब्बत" के रूप में प्रचारित करता है।
आपको बता दें, कि वुशु, जिसे कुंग फू भी कहा जाता है, वो एक बहु-विषयक मार्शल आर्ट है, जिसकी उत्पत्ति चीन में हुई थी। इन तीनों खिलाड़ियों के नाम हैं, न्येमान वांग्सू, ओनिल तेगा और मेपुंग लाम्गु, जो अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली हैं।

भारत ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
हिंदुस्तान टाइम्स अखबार के मुताबिक, तीनों महिला खिलाड़ियों को हांगझू एशियाई खेल आयोजन समिति ने भाग लेने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन वे अपने मान्यता कार्ड डाउनलोड नहीं कर पाए, जिसकी वजह से उन्हें चीन में प्रवेश करने की इजाजत मिलती और ये एक्रिडिएशन कार्ड उन महिला खिलाड़ियों के लिए वीजा के रूप में काम करता।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, कोचिंग स्टाफ के साथ बाकी 10 सदस्यीय टीम बुधवार को हांगझू में खेलों के लिए रवाना हो गई।
वहीं, अब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने प्रतिक्रिया देते हुए इसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।
अरिंदम बागची ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कि "भारत सरकार को पता चला है, कि चीनी अधिकारियों ने निशाना बनाकर और पूर्व-निर्धारित तरीके से, अरुणाचल प्रदेश के कुछ भारतीय खिलाड़ियों को चीन के हांगझू में होने वाले 19वें एशियाई खेलों में मान्यता और प्रवेश से वंचित करके उनके साथ भेदभाव किया है।"
उन्होंने आगे कहा, कि "हमारी दीर्घकालिक और सुसंगत स्थिति के अनुरूप, भारत अधिवास या जातीयता के आधार पर भारतीय नागरिकों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार को दृढ़ता से खारिज करता है। अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।"
बागची ने आगे कहा, कि "हमारे कुछ खिलाड़ियों के प्रति चीन ने जानबूझकर और चयनात्मक तरीके से बाधा डाला है, जिसके खिलाफ नई दिल्ली और बीजिंग में कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। चीन की कार्रवाई एशियाई खेलों की भावना और उनके आचरण को नियंत्रित करने वाले नियमों दोनों का उल्लंघन करती है, जो स्पष्ट रूप से सदस्य देशों के प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ भेदभाव को प्रतिबंधित करती है।"
आपको बता दें, कि इससे पहले भारतीय वुशु टीम ने जुलाई महीने में विश्व विश्वविद्यालय खेलों के लिए चीनी शहर चेंगदू की यात्रा नहीं की थीं, क्योंकि उन्हीं तीन एथलीटों को उस वक्त चीन की तरफ से स्टेपल वीजा जारी किया गया था, जिसके बाद भारत ने अपने खिलाड़ियों को एयरपोर्ट से वापस लौट जाने का आदेश दिया था।
आपको बता दें, कि स्टेपल वीजा के जरिए चीन यह संदेश देना चाहता है, कि अरूणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है।












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