आपदा में भारत ने बनाया अवसर, रूस से कच्चा तेल खरीद यूरोप को करेगा सप्लाई

नई दिल्ली, 14 मईः यूक्रेन पर किए गए हमले के विरोध में पश्चिमी देश रूस के खिलाफ खड़े हो गए। रूसी अर्थव्यवस्था को कमजोर किया जाए इसके लिए यूरोपियन यूनियन ने रूस से तेल आयात न करने का फैसला किया है। अगर सब कुछ ठीक चला तो दिसंबर तक यूरोपीय यूनियन के सभी 27 देश यूरोप से तेल खरीदना बंद कर देंगे। ऐसे में यूरोप के इस फैसले से भारत के लिए एक बड़ी इकोनॉमिक अपॉर्चुनिटी तैयार हो गई है। दरअसल, यूरोप के ये देश रूस से तेल खरीदने पर तो रोक लगा रहे हैं, लेकिन वही तेल भारत के जरिए खरीदना चाहते हैं।

25 लाख बैरल रोजाना तेल खरीद रहा यूरोप

25 लाख बैरल रोजाना तेल खरीद रहा यूरोप

अमेरिका और सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। यहां से रोजाना करीब 50 लाख बैरल क्रूड ऑयल का निर्यात किया जाता है। निर्यात का 50% से ज्यादा हिस्सा यूरोप को सप्लाई होता यूरोपीय यूनीयन हर दिन तेल के लिए 45 करोड़ डॉलर और गैस के लिए 40 करोड़ डॉलर रूस को देते हैं। 2020 में रूस ने 26 करोड़ टन कच्चे तेल का निर्यात किया था। इसमें से 13.8 करोड़ टन यानी 53 फीसदी यूरोप के देशों द्वारा खरीदा गया था। यूरोप युद्ध शुरू होने के पहले हर दिन 38 लाख बैरल तेल आयात करता था। मौजूदा समय में यूरोप एक दिन में रूस से 25 लाख बैरल कच्चा तेल खरीद रहा है।

ओपेक देशों ने अधिक तेल उत्पादन से किया इंकार

ओपेक देशों ने अधिक तेल उत्पादन से किया इंकार

यूरोपीय देशों द्वारा रूसी आयात पर बैन लगा देने के बाद पश्चिमी देशों के पास तेल खरीदने के विकल्प बेहद कम बचा है। ओपेक देशों ने रूस को नाराज न करने हुए अधिक तेल निकालने से इंकार कर दिया। ऐसे में यूरोपीय देशों की नजर भारत की तरफ टिक गयीं। यूरोपीय देशों के पास एशिया पैसेफिक रिफाइनर्स से भी तेल खरीदने का एक विकल्प है, लेकिन कम दूरी की वजह से भारत को इसका फायदा मिल रहा है। यूरोप के कई देशों ने भारत से तेल खरीदना शुरू कर दिया है। जी हां। जो भारत अपनी खपत का 90 फीसदी तेल दूसरे देशों से खरीदता है वह अब दूसरे देशों को तेल निर्यात कर रहा है।

भारतीय कंपनियां करेंगी तेल का आयात

भारतीय कंपनियां करेंगी तेल का आयात

रॉयटर्स की खबर के अनुसार भारत की टॉप तेल रिफाइनिंग कंपनियां रूस से 6 महीने की डील करना चाहती हैं, जिसमें हर महीने लाखों बैरल तेल आयात किया जाएगा। रूसी रिफाइनरी कंपनी रोजनेफ्ट भारत की टॉप रिफाइनरी कंपनियों से मोल-भाव कर रही है। खबर के अनुसार इंडियन ऑयल 60 लाख बैरल तेल हर महीने, भारत पेट्रोलियम 40 लाख बैरल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर महीने 30 लाख बैरल इंपोर्ट करने की डील करना चाहती हैं। कंपनियों को जून से सप्लाई शुरू होने की उम्मीद है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी महंगाई

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बढ़ी महंगाई

दिसंबर और जनवरी में रूस से भारत ने लगभग एक फीसदी कच्चा तेल खरीदा। फरवरी में जंग शुरू होने के बाद भारत की खरीद बढ़नी शुरू हुई। भारत ने रूस से मार्च 2022 में 3 लाख बैरल प्रतिदिन और अप्रैल में 7 लाख बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑयल खरीदा। 2021 में ये औसत महज 33 हजार बैरल प्रतिदिन का था। रूसी हमले से पहले भारत अपने कुल इंपोर्ट का 1% रूस से खरीदता था, जो अब बढ़कर 17% हो गया है। रूस से सस्ती दर पर कच्चा तेल खरीद कर भारत सबसे पहले अपनी अपनी घरेलू जरूरतें पूरी कर रहा है। मार्च 2022 में यूरोप को भारत ने रिकॉर्ड 2.19 लाख बैरल प्रतिदिन डीजल और अन्य रिफाइंड प्रोडक्ट्स का निर्यात किया है।

रूसी विदेश मंत्री ने तेल खरीदने का दिया प्रस्ताव

रूसी विदेश मंत्री ने तेल खरीदने का दिया प्रस्ताव

भारत सबसे अधिक इराक, सउदी अरब, इरान आदि देशों से तेल खरीदता था। गल्फ देशों ने रूस-यूक्रेन तेलों का काफी फायदा उठाया। गल्फ देशों ने तेल का भाव 140 डॉलर पहुंचा दिया। भारत में तेल के दाम लगातार बढ़ने लगे। मार्च महीने में शायद ही ऐसा कोई दिन आया होगा जिस दिन तेल के दाम न बढ़े हों। आम आदमी पर महंगाई की चोट लगातार पड़ती जा रही थी। विपक्षी पार्टियों का भी गुस्सा सरकार पर बढ़ता जा रहा था। इस बीच रूस के विदेश मंत्री भारत आए और उन्होंने रूस से तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद ने रूस से तेल खरीदना शुरू किया वह भी लगभग आधी कीमत पर।

रूस से 17 फीसदी तेल का आयात

रूस से 17 फीसदी तेल का आयात

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी व्यापार आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अप्रैल में 20.19 बिलियन डॉलर का पेट्रोलियम खरीदा, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 10.76 बिलियन डॉलर था। भारत रूस से 70 डॉलर प्रति बैरेल तेल खरीदने लगा। हालांकि इसकी विदेशी देशों ने खूब आलोचना की। जिसके बाद भारत ने भी पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब दिया। परिणाम सामने है। भारत मात्र चार महीने में रूस से 1 फीसदी तेल की जगह 17 फीसदी तेल खरीदने लगा। भारत अब रूस से कच्चा तेल मंगवाकर जामनगर की फैक्ट्री में पेट्रोल-डीजल तेल तैयार करता है और यूरोपीय देशों को बेचता है। कुलमिलाकर भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध से उपजे संकट का सबसे अधिक फायदा उठाया है। और अगर ये रूस पर प्रतिबंध का दौर लंबा खींचता है तो भारत को इससे भरपूर फायदा होगा।

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