PM मोदी और शी जिनपिंग के बीच इंडोनेशिया में बनी थी सहमति, 8 महीने बाद चीन के दावे को भारत ने कबूला
India-China Talk: पिछले साल इंडोनेशिया के बाली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान एक तस्वीर काफी वायरल हुई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चीन के राष्ट्रपति से बातचीत करते हुए देखा गया था। उस बात को अब आठ महीने हो चुके हैं और अब जाकर भारत ने कबूल किया है, कि उस बैठक में दोनों नेताओं के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ था।
दरअसल, चीन ने पिछले हफ्ते ब्रिक्स सम्मेलन में भारतीय एनएसए अजीत डोभाल और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के विदेश मामलों के विभाग के प्रमुख वांग यी, जो अब चीन के विदेश मंत्री बन चुके हैं, उनके बीच द्विपक्षीय बैठक हुई थी और इसी बैठक के बाद चीन ने पहली बार दावा किया था, कि बाली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच शांति स्थापना को लेकर समझौता हुथा।

भारत ने बाली सम्मेलन के आठ महीनों के बाद और चीन के दावे के बाद इसे स्वीकार किया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गतिरोध शुरू होने के बाद पिछले साल बाली में पहली बार शी जिनपिंग और नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत मुलाकात हुई थी।
आठ महीने पहले हुई इस मुलाकात को लेकर अब भारत ने माना है, कि दोनों नेताओं ने "द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की आवश्यकता" के बारे में बात की थी।
बाली में मुलाकात पर नहीं थी जानकारी
पिछले साल नवंबर में, नरेन्द्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच ये मुलाकात हुई थी और उनकी बातचीत पर कोई ठोस जानकारी नहीं थी।
बाली शिखर सम्मेलन के दौरान रात्रिभोज के वक्त दोनों की मुलाकात को कैमरों में कैद किया गया था, जिसको लेकर भारतीय अधिकारियों ने कहा था, कि "प्रधान मंत्री और राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जो दोनों इंडोनेशियाई राष्ट्रपति द्वारा आयोजित जी 20 रात्रिभोज में भाग ले रहे थे, रात्रि भोज के खत्म होने पर शिष्टाचार का आदान-प्रदान किया गया।"
लेकिन इस हफ्ते, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ब्रिक्स एनएसए की बैठक के मौके पर दक्षिण अफ्रीका में शीर्ष चीनी राजनयिक वांग यी से मुलाकात की, जिसके बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने बाली शिखर सम्मेलन में शी और मोदी के बीच "महत्वपूर्ण सहमति" का उल्लेख किया।
चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, कि "पिछले साल के अंत में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधान मंत्री मोदी बाली में चीन-भारत संबंधों को स्थिर करने पर एक महत्वपूर्ण सहमति पर पहुंचे थे।"
वहीं, गुरुवार को सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, कि "इंडोनेशिया के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित रात्रिभोज के समापन पर प्रधान मंत्री (मोदी) और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शिष्टाचार का आदान-प्रदान किया और हमारे द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की आवश्यकता पर बातचीत भी की।"
अरिंदम बागची ने आगे कहा, कि "जैसा कि आप जानते हैं, हमने दृढ़ता से कहा है कि इस पूरे मुद्दे के समाधान की कुंजी भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र पर एलएसी पर स्थिति को हल करना और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बहाल करना है।"
आपको बता दें, कि पूर्व लद्दाख में पिछले तीन सालों से तनाव और सैन्य गतिरोध बना हुआ है और दोनों ही देशों ने करीब 50 से 50 हजार सैनिकों की तैनाती कर रखी थी।
बाली में क्या हुआ था?
बाली में रात्रिभोज के खत्म होने के बाद पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच अभिभावदन हुआ था और दोनों ने एक दूसरे से हाथ मिलाया था। वीडियो में दोनों को हाथ मिलाते और दोनों के बीच थोड़ी सहज बातचीत दिखाई गई, हालांकि उसके बाद का वीडियो मौजूद नहीं होने के बाद पता नहीं चल पाया, कि आगे क्या हुआ था।
हालांकि, उसके बाद से दोनों पक्षों के मंत्री और अधिकारी कई बार मिल चुके हैं लेकिन गतिरोध का कोई समाधान नहीं दिख रहा है।
और इस सप्ताह की शुरुआत में, सीमा गतिरोध पर तीन साल में अपने सबसे तीखे बयानों में से एक में, डोभाल ने वांग यी से कहा था, कि 2020 के बाद से एलएसी पर स्थिति ने "रणनीतिक विश्वास और रिश्ते के सार्वजनिक और राजनीतिक आधार को खत्म कर दिया है।"
भारतीय एनएसए ने साफ शब्दों में कहा था, कि 'भारत ने चीन के ऊपर से भरोसा खो दिया है।'
वहीं, इस साल मार्च में, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर तत्कालीन चीनी विदेश मंत्री किन गैंग से मुलाकात की थी, जिन्हें इस सप्ताह हटा दिया गया है। उस दौरान जब चीनी विदेश मंत्री ने गतिरोध पर चर्चा की थी, तो जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों को लेकर वर्तमान स्थिति को "असामान्य" बताया था।












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