यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका का बड़ा दावा, भारत ने रद्द किया रूस के साथ सैन्य सौदा, बाइडेन लेंगे बड़ा फैसला

सीआरएस रिपोर्ट में कहा गया है कि, 2010 के बाद से भारत अपने हथियार खरीदी का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा रूस से ही खरीदता है और रूस का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश भारत है।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, मार्च 04: यूक्रेन युद्ध के बीच भारत की तटस्थ नीति को लेकर कुछ अमेरिकी सांसदों में भारत को लेकर 'गुस्सा' देखा जा रहा है और अमेरिका के कुछ सांसदों ने यूनाइटेड नेशंस में रूस के खिलाफ वोटिंग के दौरान भारत के गैर-हाजिर रहने को लेकर कहा है कि, भारत को अब रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर दूरी बनानी चाहिए। वहीं, अमेरिकी सीनेट में दावा किया गया है कि, भारत ने अपना बहुत बड़ा सैन्य सौदा रूस के साथ रद्द कर दिया है।

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    रूस के साथ सैन्य सौदा रद्द?

    रूस के साथ सैन्य सौदा रद्द?

    अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा है कि भारत ने हाल ही में रूसी सैन्य उपकरणों के कई ऑर्डर रद्द कर दिए हैं। दक्षिण और मध्य एशिया के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू ने बुधवार को सीनेट की विदेश संबंध उपसमिति के सदस्यों से कहा कि, भारत अमेरिका के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण भागीदार है और यह राष्ट्रपति जो बाइडेन को तय करना है, कि भारत पर प्रतिबंध लागू करना है या नहीं। अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने कहा है कि, भारत ने रूस को दिए पिछले कुछ हफ्तों में मिग-29 (लड़ाकू जेट), रूसी हेलीकॉप्टर और टैंक रोधी हथियारों के ऑर्डर रद्द कर दिए हैं।

    भारत पर अमेरिका लगाएगा प्रतिबंध?

    भारत पर अमेरिका लगाएगा प्रतिबंध?

    सीनेट कमेटी ने अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू से पूछा, कि क्या काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) भारत को रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद के लिए प्रतिबंध लगाने के लिए प्रेरित करेगा। इस सवाल के जवाब में अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने कहा कि, "दुर्भाग्य से मैं यह नहीं कह पा रहा हूं कि राष्ट्रपति के फैसलों पर छूट के मुद्दे पर या प्रतिबंधों के मुद्दे पर, या रूस के यूक्रेन पर आक्रमण का असर उन फैसले पर क्या पड़ेगा।" अमेरिकी अधिकारी लू ने कहा कि, बाइडेन प्रशासन ने अभी तक CAATSA के तहत भारत पर प्रतिबंध लगाने पर फैसला नहीं किया है। लू ने कहा, "भारत ने पिछले कुछ हफ्तों में रूस को दिए मिग-29 (लड़ाकू जेट), रूसी हेलीकॉप्टर और टैंक रोधी हथियारों के ऑर्डर रद्द कर दिए हैं।"

    भारत की तरफ से पुष्टि नहीं

    भारत की तरफ से पुष्टि नहीं

    अमेरिकी अधिकारी की भारत को लेकर किए दावे की पुष्टि अभी तक भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा नहीं की गई है। अमेरिकी अधिकारी लू ने कहा कि, रूस से भारत का आयात 2011 के बाद से 53 फीसदी कम हो गया है, जबकि अमेरिका से खरीदारी बढ़ी है। वहीं, सीनेट की विदेश संबंध उपसमिति के अध्यक्ष सीनेटर क्रिस मर्फी ने कहा कि, "अमेरिका-भारत संबंध कभी मजबूत नहीं रहे, और लेकिन अब दोनों देशों के संबंध मजबूत हो रहे हैं, इसके लिए मैं भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारत के लोगों का आभारी हूं।‘'

    रूस से भारत बनाए दूर- सांसद

    रूस से भारत बनाए दूर- सांसद

    इस बीच यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अमेरिकी सांसदों ने भारत से अपने मुख्य हथियार आपूर्तिकर्ता रूस से दूरी बनाने का आह्वान किया है, जिसकी नई दिल्ली ने अभी तक निंदा नहीं की है। ‘द वायर' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सांसदों, रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ने, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) और महासभा में यूक्रेन के रूसी आक्रमण की निंदा करने वाले प्रस्ताव पर मतदान से परहेज करने के भारत के फैसले पर "निराशा" व्यक्त की है। रूसी बैंकों पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से अब कई देशों के लिए मास्को से प्रमुख रक्षा उपकरण खरीदना कठिन हो जाएगा। वहीं, एक अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि, हालांकि वाशिंगटन में अभी तक भारत के रूस से एस-400 मिसाइलों की डिलीवरी लेने के लिए नई दिल्ली को छूट देने पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। वहीं, अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने इस बात को लेकर संकेत दिए हैं, कि भारत पर प्रतिबंध नहीं लगाने को लेकर अमेरिका विचार कर रहा है।

    भारत ने रूस से खरीदा एस-400 मिसाइल सिस्टम

    भारत ने रूस से खरीदा एस-400 मिसाइल सिस्टम

    आपको बता दें कि, अमेरिकी एतराज के बाद भी भारत सरकार ने साल 2018 में रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का फैसला लिया था और एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए भारत और रूस के बीच 5.43 अरब डॉलर का करार किया गया था। बावजूद इसके अमेरिका अभी तक भारत पर सीएएटीएसए के तहत प्रतिबंध लगाने से परहेज करता आया है, जबकि रूस ने पिछले साल दिसंबर महीने में भारत को एस-400 मिसाइलस डिफेंस सिस्टम की डिलिवरी भी दे दी थी। भारत के खिलाफ संभावित प्रतिबंधों पर लू का बयान उस वक्त आया है, जब डी-मैरीलैंड के सीनेटर क्रिस वैन होलेन ने लू से पूछा था, "क्या भारत का यह वोट (यूएन में) सीएएटीएसए को प्रभावित करेगा?" जिसके जवाब में अधिकारी लू ने कहा कि, "मैं (भारत को) छूट के मुद्दे पर या मंजूरी के मुद्दे पर राष्ट्रपति या सचिव के फैसलों का अनुमान लगाने में सक्षम नहीं हूं, या फिर यूक्रेन पर रूस का आक्रमण उस फैसले पर क्या असर डालेगा, ये समझना मेरे लिए मुश्किल है।‘'

    भारत ने हथियार खरीदना किया कम

    भारत ने हथियार खरीदना किया कम

    वहीं, पिछले साल अक्टूबर में आई सीआरएस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि, भारत ने रूस के साथ हथियार खरीदना कम कर दिया है। आपको बता दें कि, सीआरएस स्वतंत्र विषय और अलग अलग विशेषज्ञों के हवाले से अकसर विभिन्न मुद्दों पर रिपोर्ट तैयार करता है। इसकी रिपोर्टें अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारिक रिपोर्ट नहीं थी, लेकिन अमेरिकी सांसद इस रिपोर्ट को अपनी पर्सनल रिपोर्ट तैयार करने के लिए मदद लेते हैं। इस रिपोर्ट में एक ग्राफ के जरिए दिखाया गया था कि 2015 के बाद से मोदी सरकार ने रूस से रक्षा उपकरणों की खरीदारी लगातार कम की है। सीआरएस ने कहा कि, 2016 से चल रही रूस निर्मित एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को खरीदने की भारत की योजना से अमेरिकी कानून सीएएटीएसए की धारा 231 के तहत अमेरिकी प्रतिबंध लग सकते हैं। हालांकि, इसके बाद भी भारत ने 2019 के अंत में एस-400 मिसाइल सिस्टम के लिए रूस के साथ तय 5.4 अरब डॉलर में से 800 मिलियन अमरीकी डालर बतौर एडवांस दिए।

    भारत-रूस रक्षा संबंध पर रिपोर्ट

    भारत-रूस रक्षा संबंध पर रिपोर्ट

    सीआरएस रिपोर्ट में कहा गया है कि, 2010 के बाद से भारत अपने हथियार खरीदी का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा रूस से ही खरीदता है और रूस का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश भारत है। रूस जितना हथियार निर्यात करता है, उसका 32 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत खरीदता है। हालांकि, 2014 में भारत में सरकार परिवर्तन के बाद धीरे-धीरे भारत ने हथियारों को लेकर रूस पर निर्भरता कम करनी शुरू कर दी और 2016 से 2020 के बीच भारत ने रूस के कुल हथियारों के निर्यात का लगभग एक-चौथाई (23 प्रतिशत) हिस्सा खरीदा है। वहीं, भारत ने रूस से 62 प्रतिशत हथियार खरीदने की जगह उसे घटाकर 49 प्रतिशत तक ला दिया है। सीआरएस की रिपोर्ट में कहा गया है कि, द मिलिट्री बैलेंस 2021 के अनुसार, भारत के वर्तमान सैन्य शस्त्रागार में रूसी-निर्मित या रूसी-डिज़ाइन किए गए उपकरणों का भारी भंडार है। भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक बल मुख्य रूप से रूसी T-72M1 (66 प्रतिशत) और T-90S (30 प्रतिशत) से बना है।

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