चीन को रोकने की क्षमता सिर्फ भारत के पास, बढ़ेगी ताकत तो आएगी हिंद प्रशांत में स्थिरता, बोले यूएस रक्षा मंत्री

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने शुक्रवार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति के लिए भारत और अन्य सहयोगी देशों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

सिंगापुर, जून 11: अमेरिका के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने कहा है, कि अगर एशिया में किसी एक देश के पास चीन से टक्कर लेने की हैसियत है, तो वो सिर्फ भारत है और भारत ही वो देश है, जो चीन को रोक सकता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री का ये बयान उस वक्त आया है, जब चीन के विदेश मंत्री ने अमेरिका को धमकी दी है, चीन ताइवान के लिए जंग में उतरने के लिए भी तैयार है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने क्या कहा?

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने क्या कहा?

अमेरिकी रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन ने शुक्रवार को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति के लिए भारत और अन्य सहयोगी देशों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया, जिसे उन्होंने वाशिंगटन के लिए "प्राथमिकता वाला थिएटर" बताया। सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग में बोलते हुए उन्होंने कहा कि, कैसे एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता, अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों के केंद्र में है, और क्षेत्रीय राष्ट्रों ने अमेरिका के साथ जो साझेदारी बनाई है, एक शांतिपूर्ण दुनिया के लिए वह मूल में है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि, 'हम अन्य भागीदारों के साथ भी घनिष्ठ संबंध बना रहे हैं। और मैं विशेष रूप से भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, उसके बारे में सोच रहा हूं। हमारा मानना है कि भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता और तकनीकी कौशल, हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता ला सकती है'।

"एशिया के लिए अमेरिका धुरी"

अमेरिकी रणनीतिकारों ने अब "एशिया के लिए अमेरिका की धुरी" के बारे में बातें करनी बंद कर दी हैं और विश्लेषकों का मानना है कि, अमेरिका अब भारत को उस शक्तिशाली देश के बारे में सोच रहा है, जो एशिया में है, विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और जिसमें चीन को चुनौती देने की क्षमता है। लॉयड ऑस्टिन ने कहा कि, इंडो-पैसिफिक वाशिंगटन का "प्राथमिकता थिएटर" है, जिसमें क्षेत्र में 300,000 से अधिक अमेरिकी सेवा सदस्य सहयोगी अपने भागीदारों के साथ काम कर रहे हैं ताकि नियम-आधारित सुनिश्चित किया जा सके और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कायम रखा जा सके। उन्होंने कहा है कि, हिंद-प्रशांत देशों के साथ अमेरिकी भागीदारी बढ़ी है और मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि, 'हम क्षेत्र के लिए अपने साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़े हैं और पिछले एक साल में हमने जो यात्रा की है, वह केवल एक बुनियादी सच्चाई को रेखांकित करती है कि, आज की आपस में जुड़ी दुनिया में, जब हम एक साथ आने के तरीके खोजते हैं, तभी हम मजबूत होते हैं।"

‘एशियाई देशों के साथ मिलकर करना है काम’

‘एशियाई देशों के साथ मिलकर करना है काम’

अमेरिकी रक्षा सचिव ने रेखांकित करते हुए बताया कि, कैसे संयुक्त राज्य अमेरिका अपने करीबी सहयोगी जापान, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण कोरिया और फिलीपींस के साथ काम करता है। उन्होंने कहा कि, 'अमेरिका ने भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ और क्वाड सुरक्षा संवाद समूह का निर्माण किया है और हम सभी सदस्य देश साथ मिलकर काम कर रहे हैं'। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि, 'अमेरिका, हिंद-प्रशांत में इंटरऑपरेबिलिटी के लिए अपने सहयोगियों के साथ अभ्यास और प्रशिक्षण कर रहा है। इसलिए हमने अपने सहयोगियों और भागीदारों के साथ संयुक्त अभ्यास की जटिलता, संयुक्तता और पैमाने को बढ़ाया है'। उन्होंने कहा कि, 'पिछले वसंत में, यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने हिंद महासागर में भारतीय नौसेना के साथ मिकर एक साथ संयुक्त अभियान चलाया था और भारतीय वायु सेना ने एकीकृत वायु शक्ति और एंटी सबमरीन युद्धाभ्यास किया था'।

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