विदेशी मीडिया का बड़ा दावा, इस देश के द्वीप पर विशालकाय सीक्रेट नौसेना अड्डा बना रहा है भारत, चीन का घेराव
अल जज़ीरा ने दावा किया है कि उत्तरी अगालेगा द्वीप पर भारत एक नौसेना अड्डे का निर्माण कर रहा है। जो मॉरीशस से करीब 1100 किलोमीटर दूर है।
नई दिल्ली, अगस्त 09: हिंद महासागर में चीन की रफ्तार को रोकने के लिए भारत काफी तेजी के साथ अपनी चालें चल रहा है। हिंद महासागर में मौजूद अलग अलग छोटे देशों के साथ भारत अपने संबंधों को और मजबूती तो दे ही रहा है, इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय न्यूज चैनल अलजजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि हिंद महासागर में भारत काफी मजबूती के साथ एक नौसेना अड्डे का निर्माण कर रहा है और भारत का मकसद हिंद महासागर में अपना रूतबा बढ़ाने के साथ साथ वर्चस्व भी कायम करना है। अलजजीरा ने पिछले हफ्ते रिसर्च के आधार पर इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत सूने द्वीप पर बेहद खतरनाक नौसेना अड्डे का निर्माण कर रहा है। (सभी तस्वीर प्रतीकात्मक)
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सूने द्वीप पर भारत का सीक्रेट अड्डा
अल जज़ीरा ने दावा किया है कि उत्तरी अगालेगा द्वीप पर भारत एक नौसेना अड्डे का निर्माण कर रहा है। जो मॉरीशस से करीब 1100 किलोमीटर दूर है। अलजजीरा ने इस भारतीय अड्डे को लेकर एक सैटेलाइट तस्वीर भी प्रकाशित किया है और दावा किया है कि ये द्वीप मॉरीशस के द्वीप राष्ट्र का हिस्सा है। इससे पता चलता है कि भारतीय कामगार एक भारतीय नौसैनिक सैन्य अड्डे का निर्माण कर रहे हैं। आपको बता दें कि भारत और मॉरीशस के बीच काफी अच्छे संबंध हैं और मॉरीशस भी चीन की विस्तारवादी नीति से परेशान रहता है। इतना ही नहीं, भारत और मॉरीशस के बीच कई सैन्य गठबंधन भी है और दोनों राष्ट्र लगातार हिंद मगासागर से चीन को दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस नौसैनिक अड्डे को लेकर भारत सरकार और मॉरीशस सरकार ने अलजजीरा के रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। लेकिन, अल जज़ीरा ने जो दस्तावेज और गवाहों के हवाले से रिपोर्ट पब्लिश की है, उसमें सैन्य गतिविधियों, विशेष रूप से निगरानी के लिए विभिन्न बुनियादी ढांचे के निर्माण का पता चलता है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

समुद्री सहयोग बढ़ाने का दावा
भारत का दावा है कि ये नई सुविधाएं हिंद महासागर क्षेत्र में सभी देशों के लिए सुरक्षा और विकास (सागर) नीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र के देशों के बीच समुद्री सहयोग को बढ़ाना है। वहीं मॉरीशस सरकार ने अपने हिस्से के लिए संकेत दिया है कि, उसके तटरक्षक बल नई सुविधाओं का उपयोग करेंगे। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस सुदूर द्वीप पर एक हवाई क्षेत्र, बंदरगाह और संचार केंद्र विकसित किया जा रहा है। अलजजीरा ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत सरकार ने करीब 250 मिलियन डॉलर का निवेश इस क्षेत्र में किया है, जिसका मकसद हिंद महासागर में भारत के वर्चस्व का विस्तार करने के साथ साथ चीन की विस्तारवादी नीति को करारा जवाब देना है।

कहां है अगालेगा द्वीप?
आपको बता दें कि हिंद महासागर में मॉरीशस के स्वामित्व वाला अगालेगा एक सुनसान द्वीप है, जो मॉरीशस से करीब 1100 किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित है। ये द्वीप करीब 12 किलोमीटर लंबा और करीब 1.5 किलोमीटर चौड़ा है और इस द्वीप पर सिर्फ 300 से 400 लोग ही रहते हैं। सबसे खास बात इस सैन्य अड्डे को लेकर ये है कि इसी क्षेत्र में अमेरिका का डिएगो गार्सिया अड्डा भी है, जबकि चीन का जिबूती सैन्य अड्डा भी इसी क्षेत्र में स्थिति है और माना जा रहा है कि भारतीय सैन्य अड्डा का बनना चीन के लिए बहुत बड़ा झटका होगा, क्योंकि इस सैन्य अड्डे के द्वारा भारत चीन को हिंद महासागर में घुसने से पूरी तरह से रोक सकता है। वहीं, इस क्षेत्र में भारत के एक और दोस्त फ्रांस का मिलिट्री हेस रियूनियों भी मौजूद है। ये सभी सैन्य अड्डे हिंद महासागर में स्थिति हैं।

कितना महत्वपूर्ण है अगालेगा द्वीप?
हिंद महासागर में चीन को रोकने के लिहाज से अगालेगा द्वीप काफी महत्वपूर्ण है। खासकर यहां पर अमेरिकी अड्डा और फ्रांसीसी अड्डा पहले से ही मौजूद हैं, लिहाजा भारत की शक्ति और बढ़ जाती है और चीन पर काफी ज्यादा दवाब बढ़ जाता है। इसके साथ ही ये द्वीप भले ही छोटा हो, लेकिन ये स्टेशन सामरिक और रणनीतिक लिहाज से अपार ताकत को अपने सीने में रखा हुआ है। सबसे खास बात ये है कि ये दुनिया का वो हिस्सा है, जहां से विश्व की दो तिहाई ईंधन की सप्लाई होती है और कहा तो यहां तक जाता है कि इस क्षेत्र की असली ताकत क्या है, वो इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सेना के उच्च अधिकारियों को ही पता है, लेकिन इतना तय हो चुका है कि हिंद महासागर का चीन की वजह से काफी ज्यादा सैन्यीकरण हो चुका है।

सैन्य अड्डा की खासियतें
अलजजीरा ने दावा किया है कि इस सूने द्वीप पर भारत करीब 3 किलोमीटर लंबे रनवे का निर्माण कर रहा है जो फाइटर एयरक्राफ्ट के लिए काफी ज्यादा है। वहीं, इस द्वीप के साथ भारत कई जेट सुविधाएं भी विकसित कर रहा है, जो बैरक और खेतों की तरफ दिखाई दे रही हैं और अनुमान है कि यहां से इंडियन आर्मी अपने ऑपरेशंस को अंजाम दे सकती है। इसके साथ ही दावा किया गया है कि अगालेगा से भारत के बोइंग पी-8आई समुद्री निगरानी विमान के बेड़े को संचालित किया जा सकता है। आपको बता दें कि बोइंग 737 यात्री विमान के नक्शे पर बना पी-8 विमान, एक अत्याधुनिक समुद्री गश्ती विमान है, जिसे एंटी सबमरीन युद्द, जमीन पर युद्ध के साथ साथ खुफिया निगरानी और सर्विलांस के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ये भारत का काफी खतरनाक विमान है। वहीं, इन विमानों में एक एंटी-शिपिंग और पनडुब्बी स्ट्राइक फ़ंक्शन होता है, जिसमें सेंसर्स लगे होते हैं और रडार के लिए इन्हें पकड़ना काफी मुश्किल होता है।

अगालेगा द्वीप को लेकर दावा
अलजजीरा ने अपनी रिपोर्ट में नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के रिसर्च फेलो अभिषेक मिश्रा के हवाले से दावा किया है कि ''ये द्वीप भारत के लिए एक इंटेलीजेंस फैसिलिटी है, जिसके जरिए भारत दक्षिण पश्चिम हिंद महासागर के साथ साथ मोजाम्बिक चैनल में अपनी हवाई शक्ति और नौसेना की मौजूदगी को दर्ज कराएगा''। बतौर अभिषेक मिश्रा ''इस सैन्य अड्डे का इस्तेमाल भारत अपने जहाजों के लिए स्टेशन के तौर पर करेगा और इसके 3 किलोमीटर लंबे रनवे का इस्तेमाल भारत के फाइटर एयरक्राफ्ट पी-8आई करेगा, जो समुद्री पेट्रोलिंग एयरक्राफ्ट है। वहीं, द्वीप के किनारों पर भी भारत काफी तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो सालों से भारत काफी तेजी से यहां पर निर्माण कार्य कर रहा है और यहां मौजूद अस्थाई कैंपों में सैकड़ों मजदूर रहते हैं, जो इस नौसेना अड्डे का तेजी से विकास कर रहे हैं।

2015 में मॉरीशस से समझौता
रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में भारत और मॉरीशस के बीच अगालेगा द्वीप को लेकर तब समझौता हुआ था, जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मॉरीशस की यात्रा की थी। उस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों के ऊपर हस्ताक्षर किए गये थे, जिसमें एक समझौता इस द्वीप को विकसित करना था और भारत ने अलजजीरा के रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा है कि वो मॉरीशस से तय समझौते के मुताबिक ही इस द्वीप का विकास कर रहा है, जिसके मुताबिक इस द्वीप को समुद्री और हवाई परिवहन के लिए विकसित किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल मॉरीशस भी करेगा। इस समझौते में लिखा हुआ है कि अगालेगा द्वीप पर भारत के विकास कार्य से यहां पर रहने वाले लोगों को काफी फायदा होगा और मॉरीशस का सैन्य बल भी अपने हितों की रक्षा के लिए इस द्वीप का इस्तेमाल कर सकता है, ताकि उसकी क्षमता में इजाफा हो।

अलजजीरा की रिपोर्ट खारिज
कतर की मीडिया कंपनी अलजजीरा की रिपोर्ट को मॉरीशस सरकार ने भी खारिज कर दिया है। मॉरीशस सरकार ने साफ किया है कि उसने अगालेगा द्वीप पर भारत को मिलिट्री बेस बनाने की इजाजत नहीं दी है। मॉरीशस से प्रधानमंत्री प्रवीण जगन्नाख के कम्यूनिकेशन सलाहकार केन एरिन ने कहा कि भारत और मॉरीशस के बीच अगालेगा में सैन्य अड्डा बनाने को लेकर समझौता नहीं हुआ है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि अगालेगा में भारत दो प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसके लिए 2015 में दोनों देशों की सरकारों के बीच समझौता हुआ था। इसमें एक 3 किलोमीटर की हवाई पट्टी का निर्माण है और तटीय क्षेत्र में जेट्टी का निर्माण है। आपको बता दें कि जेट्टी का इस्तेमाल पानी जहाजों को ठहरने के लिए किया जाता है।

भारत-मॉरीशस संबंध
भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि मॉरीशस हिन्द महासागर में स्थिति है और उसका सबसे जिगरी दोस्त है। भारत और मॉरीशस के बीच सिर्फ मिलिट्री संबंध ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक, सामरिक और पारिवारिक संबंध भी हैं। करीब 150 साल पहले भारत के पूर्वांचल से मॉरीशस में हजारों की संख्या में मजदूरों को अंग्रेज ले गये थे और मॉरीशस को बनाने में भारत के बिहार-यूपी के लोगों का ही योगदान है। मॉरीशस की सबसे दिलचस्प बात ये है कि यहां पर भोजपूरी ऐसे बोली जाती है, मानो आप बिहार या उत्तर प्रदेश के भोजपूरी बेल्ट में हों। ऐसे में अगालेगा द्वीप भारत के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण है और हिंद महासागर में चीन की चाल को बेहाल करने के लिए काफी अहम है।
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