ग्लोबल फूड सिक्योरिटी में अपना रोल निभा रहा है भारत, यूनाइटेड नेशंस में सरकार का बयान

यूएनएससी में भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने कहा कि, नई दिल्ली दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य-आधारित सुरक्षा नेट प्रोग्राम चला रही है, जिसने कल्याण से अधिकार-आधारित दृष्टिकोण में एक आदर्श बदलाव देखा है।

न्यूयॉर्क, जुलाई 19: यूनाइटेड नेशंस में भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि, वैश्विक खाद्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने में भारत अपनी उचित भूमिका निभाएगा। यूएनएससी में भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने वैश्विक खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर भारत की उचित भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, अगर यूक्रेन संकट को जल्द खत्म नहीं किया गया, तो अर्थव्यवस्था के लिए इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि, भारत, वैश्विक खाद्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने, समानता बनाए रखने और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने में अपनी उचित भूमिका निभाएगा।

नई दिल्ली चला रहा है प्रोग्राम

नई दिल्ली चला रहा है प्रोग्राम

यूएनएससी में भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने कहा कि, नई दिल्ली दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य-आधारित सुरक्षा नेट प्रोग्राम चला रही है, जिसने कल्याण से अधिकार-आधारित दृष्टिकोण में एक आदर्श बदलाव देखा है। उन्होंने कहा कि, 'कोविड-19 के दौरान जरूरतमंदों को टारगेट बनाकर भारत सरकार ने 80 करोड़ लोगों को खाद्य सहायता पहुंचाने का काम किया, वहीं, 40 करोड़ लोगों को कैश ट्रांसफर किया गया। इसके साथ ही स्नेहा दुबे ने कहा कि, भारत का मध्याह्न भोजन कार्यक्रम, स्वस्थ भोजन के प्रावधान को सुनिश्चित करके स्कूली बच्चों में कुपोषण से निपटने के लिए जारी है। प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने एक बयान में कहा कि, "विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों सहित कमजोर समूहों के लिए एक पोषण अभियान भी शुरू किया गया है। हमारे फार्म-टू-टेबल डिजिटल पहल में किसान पोर्टल, कृषि-सलाहकार सेवाएं, कृषि वस्तुओं का ऑनलाइन नेटवर्क, मूल्य पूर्वानुमान और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग शामिल हैं।"

अफगानिस्तान पर बोला भारत

अफगानिस्तान पर बोला भारत

भारत की प्रथम सचिव ने कहा कि, अफगानिस्तान में बिगड़ती मानवीय स्थिति को देखते हुए भारत अफगानिस्तान के लोगों को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं भेज रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, 'भारत ने म्यांमार के लिए अपना मानवीय समर्थन जारी रखा है, जिसमें 10,000 टन चावल और गेहूं का अनुदान शामिल है। हम इस कठिन समय के दौरान खाद्य सहायता सहित श्रीलंका की भी सहायता कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि, भारत ने पिछले तीन महीनों में यमन को 250,000 टन से अधिक गेहूं का निर्यात किया है। उन्होंने यह भी कहा कि, भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और वर्षों से विभिन्न मानवीय संकटों के जवाब में संयुक्त राष्ट्र के केंद्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया कोष (सीईआरएफ) और यूएनओसीएचए में भी योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि, "वर्ष 2023 को 'अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष' घोषित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव की अगुवाई का उद्देश्य इसी तरह की खाद्य सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना था।"

श्रीलंका को भारत की मदद

श्रीलंका को भारत की मदद

आपको बता दें कि, भारत, वर्ष 2022 के शुरुआती 4 महीनों में श्रीलंका के सबसे बड़े ऋणदाता के रूप में उभरा है। भारत ने अपने इस पड़ोसी देश को अब तक कुल 37.69 करोड़ डॉलर का ऋण दिया है। वहीं, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने श्रीलंका को केवल 6.790 करोड़ डॉलर का कर्ज दिया है। इससे पहले चीन कई बार श्रीलंका को आर्थिक मदद करने की हामी भर चुका है, लेकिन अब तक उसका ये दावा हवा-हवाई ही साबित हुआ है।

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