Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में भारत और पाकिस्तान आमने सामने?

इमरान ख़ान
Getty Images
इमरान ख़ान

पाकिस्तान ने सार्वजनिक तौर पर संकेत दिए हैं कि वह कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में ले जाने की योजना बना रहा है.

आईसीजे में कश्मीर को संभावित मामला बनाने की मौजूदा वजहें हैं- भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाकर संविधान की ओर से मिले कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया है, इसके बाद पूरे इलाक़े का संपर्क दुनिया से कटा हुआ है और यहां की कुछ ही ख़बरें बाहर की दुनिया तक पहुंच रही हैं.

हालांकि इस संभावित मामले के बारे में अभी बेहद सीमित जानकारी उपलब्ध है लेकिन इस पर बात करने के लिए कुछ मुद्दों को समझना भी जरूरी है.

आईसीजे की कार्यवाही

पहला सवाल तो यही है कि कौन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में जा सकता है और कैसे जा सकता है?

आईसीजे एक अंतरराष्ट्रीय न्यायालय है, नाम से ज़ाहिर है यहां देशों के बीच के विवादों का निपटारा किया जाता है. किसी देश की ओर से अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन करने पर भी मामला न्यायालय के सामने लाया जा सकता है.

ICJ/ WEBSITE

लेकिन यह कोई मानवाधिकार न्यायालय नहीं है और व्यक्तिगत तौर पर कोई इस न्यायालय में अपील दाखिल नहीं कर सकता.

आईसीजे में किसी मामले की सुनवाई होने से पहले उसे कई चरणों से होकर गुजरना होता है. इसमें पहला चरण यही है कि यह देखा जाता है कि क्या मामला न्यायालय के दायरे में आता है या नहीं. इससे तय होता है कि मामले की सुनवाई होगी या नहीं.

इमरान ख़ान
Getty Images
इमरान ख़ान

आम तौर पर दो तरीकों से इसे किया जाता है- पहले तरीके में आर्टिकल 36 (2) के तहत देखा जाता है कि न्यायालय के अनिवार्य अधिकार क्षेत्र या दायरे में क्या क्या आता है. यानी अगर दो देशों के बीच किसी मुद्दे पर विवाद हो तो वे दोनों न्यायालय में अपील कर सकते हैं.

लेकिन कश्मीर और 370 के मसले पर दोनों देशों की अपनी अपनी सीमाएं हैं, जब तक वे इस मामले को अदालत में ले जाने पर सहमत नहीं होते तब तक इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय सुनवाई नहीं कर सकती.

अब बचा दूसरा तरीका जिसके मुताबिक आर्टिकल 36 (1) के तहत यह कहा जाए कि किसी देश ने किसी खास संधि का उल्लंघन किया है, तब इस मसले की सुनवाई आईसीजे में हो सकती है. इसी तरीके के इस्तेमाल से भारत जाधव मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले गया जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान ने वियना संधि के मुताबिक जाधव को कान्सुअलर की सुविधा मुहैया नहीं कराई.

पहले तरीका जिसमें आर्टिकल 36 के तहत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का अनिवार्य अधिकार क्षेत्र आता है, पर भारत के सहमत होने की कोई उम्मीद नहीं है, ऐसे में पाकिस्तान को दूसरे तरीके से मामले को उठाना होगा, पाकिस्तान किस संधि के उल्लंघन की बात न्यायालय के सामने रखेगा, यह देखना अभी बाकी है.


ये भी पढ़ें-


वैसे मौजूदा जाधव मामले से अलग भी दोनों देशों के आपसी मसलों की सुनवाई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में हुई है. हालांकि दो ऐसे मामले थे जिनमें सुनवाई शुरुआत स्तर से आगे नहीं बढ़ पाई थी.

एक मामला तो आईसीएओ काउंसिल के अधिकार क्षेत्र (भारत बनाम पाकिस्तान) था, जिसमें अपील वापस ले ली गई थी. इसके अलावा एक मामला पाकिस्तान के युद्धबंदियों (पाकिस्तान बनाम भारत) का था जिसकी अपील भी वापस ले ली गई थी.

वहीं 10 अगस्त, 1999 की घटना जिसमें भारत के कच्छ क्षेत्र में पाकिस्तानी नौ सेना के पेट्रोल एयरक्राफ्ट को भारत के मिग-21 ने मार गिराया था का मामला भी (पाकिस्तान बनाम भारत) अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक पहुंचा था लेकिन आईसीजे को पता चला कि यह उनके अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है तो फिर कार्यवाही को समाप्त मान लिया गया था.

कश्मीर
Reuters
कश्मीर

कश्मीर का संभावित नया मामला, आईसीजे के उस फैसले के एक महीने के बाद ही आया है, जिसमें 17 जुलाई, 2019 को कुलभूषण जाधव मामले में भारत के पक्ष में फैसला हुआ था. शुरुआत में पाकिस्तान ने यह संकेत दिया था कि वह अदालत के आदेश का पालन करेगा लेकिन नई परिस्थितियों में वह ऐसा करेगा, इसमें संदेह है.

आईसीजे में जाने का परिणाम

आईसीजे में जाने के कुछ क़ानूनी परिणाम तो होते ही हैं, साथ ही साथ उस क़ानूनी कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय परिणाम भी सामने आते हैं.

जहां तक क़ानूनी मसला है, आईसीजे में उन्हीं दो तरीकों से जाया जा सकता है, जिसका जिक्र ऊपर किया गया है. कश्मीर के मसले में पाकिस्तान ने अपनी दलील को अब तक सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वह इस इलाक़े में मानवाधिकार के उल्लंघन और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के प्रति देशों के दायित्व को मुद्दा बना सकता है.

ऐसे में जब तक कश्मीर में मौजूदा कार्रवाई जारी रहती है- मसलन सूचनाओं के प्रवाह पर पाबंदी, हजारों लोगों को हिरासत में लिया जाना और उल्लंघनों के दूसरे आरोप आते रहेंगे- तब तक इस मामले को मजबूती मिलती रहेगी.

ICJ

अगर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय इस मामले को अपने अधिकार क्षेत्र का नहीं पाकर, इस पर सुनवाई से इनकार भी करता है तो भी अदालत में रुख़ करने भर से भी दोनों देशों में विवाद बढ़ सकता है.

जब ध्यान दोनों देशों के संबंधो, क्षेत्र की शांति और सुरक्षा पर है उस वक्त में साधारण कश्मीरियों की स्थिति पर लोगों का ध्यान नहीं है.

यह पहला मौका है जब मानवाधिकार मामलों के संयुक्त राष्ट्र के राजदूतों ने बीते दो साल में कश्मीर में मानवाधिकार मामलों के उल्लंघन को लेकर रिपोर्टें दी हैं.

इमेज कॉपीरइटUN PHOTO/ICJ-CIJ/FRANK VAN BEEK

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने कश्मीर की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने कुछ ही दिनों पहले इस मसले पर शक्तिशाली देशों के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाई थी. बंद दरवाज़े वाली मीटिंग, ज्यादा आधिकारिक बातचीत के दौर में नहीं जा सकी लेकिन यह बैठक भी बेहद अहम है, क्योंकि ऐसी बैठक इस क्षेत्र को लेकर चालीस साल से भी पहले हुई थी.

आखिर में, इस बात की परवाह किए बिना कि आईसीजे इस मामले को अपने अधिकार क्षेत्र वाले चरण में ख़ारिज कर सकता है, यह उल्लेखनीय तो बन ही गया है. इस पूरे मामले का अंतरराष्ट्रीयकरण होना जारी है जिससे इस इलाके में मानवाधिकार मामले के ज्यादा उल्लंघन की आशंका भी बढ़ रही है.

ऐसी स्थिति में दुनिया भर का ध्यान इस क्षेत्र की ओर लगा रहेगा, इसमें कोई शक नहीं है और यह भी हो सकता है कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों की कार्रवाई का क्षेत्र बन जाए.

(ये लेखिका के निजी विचार हैं)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+