SpaceX, Blue Origin.. भारत ने विदेशी कंपनियों के लिए खोला स्पेस सेक्टर का दरवाजा, 100% FDI कैसे बदलेगा भविष्य?
Space News: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सैटेलाइट निर्माण और सैटेलाइट लॉन्चिंग व्हीकल क्षेत्रों में अपतटीय निवेशकों को लुभाने के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति में संशोधन किया है और अब सैटेलाइट निर्माण में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश को मंजूरी दे दी है।
माना जा रहा है, कि स्पेस सेक्टर में लागू हुआ ये अमेरिकी मॉडल, भारतीय स्पेस बाजार के भविष्य को बदल देगा, क्योंकि अब एलन मस्क की स्पेस एक्स जैसी कंपनियों के लिए भारत में आने का दरवाजा खुल गया है। और अब SpaceX, Blue Origin और Virgin Galactic जैसी विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करने के विकल्प तलाश सकती हैं।

स्पेस सेक्टर में 100 प्रतिशत FDI की घोषणा टेस्ला प्रमुख एलन मस्क की 21-22 अप्रैल को होने वाली भारत यात्रा से पहले की की गई थी, हालांकि उनकी यात्रा फिलहाल टल गई है, लेकिन अंतरिक्ष सेक्टर का दरवाजा विदेशी कंपनियों के खोलना एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है, जिससे ISRO को अपने कार्यक्रमों के लिए भारी भरकम फंडिंग हासिल हो सकती है।
स्पेस सेक्टर के लिए क्रांतिकारी कदम!
इस साल की शुरुआत में, मोदी सरकार ने विदेशी खिलाड़ियों और निजी कंपनियों को स्पेस सेक्टरर में आकर्षित करने के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मानदंडों में ढील दी थी।
इसके बाद 16 अप्रैल को एक गैजेट नोटिफिकेशन में अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए FDI नीति में किए गए संशोधन की घोषणा की गई, जिस उपग्रहों, लॉन्च वाहनों और संबंधित प्रणालियों या उप प्रणालियों में FDI के लिए स्पष्टता प्रदान की गई और अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने के लिए स्पेसपोर्ट का निर्माण और विनिर्माण करने की बात कही गई।
माना जा रहा है, कि सबसे पहले एलन मस्क की स्पेस कंपनी, जिसका नाम स्पेसएक्स है, उसे भारत के गृह मंत्रालय से भारतीय अंतरिक्ष सेक्टर में निवेश करने के लिए हरी झंडी मिल सकती है, जिसने पहले ही स्पेस एक्स के स्टारलिंक प्रोग्राम को भारत में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने को मंजूरी दे दी है।
एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स पृथ्वी को लोअर ऑर्बिट में सैटेलाइटों का जाल बिछा रहा है और बिना किसी केबल नेटवर्क के उपभोक्ताओं को डारेक्ट सैटेलाइट से इंटरनेट दे रहा है। स्पेस एक्स की इंटरनेट सुविधा सुपरफास्ट होती है और फिलहाल 70 से ज्यादा देश स्टारलिंक से सब्सक्राइबर्स बन चुके हैं।
इसके अलावा, अग्निकुला कॉसमॉस, बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस, स्काईरूट एयरोस्पेस, ध्रुव स्पेस, पिक्सेल, सैटश्योर और दिगंतारा जैसे अंतरिक्ष टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के संस्थापक, स्टारलिंक के माध्यम से भारतीय बाजार की सेवा से संबंधित मुद्दों पर सरकार के साथ चर्चा में शामिल हैं।
भारत सरकार निजी क्षेत्र को अंतरिक्ष सेक्टर में और मजबूती से शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। टेक स्टार्टअप पिक्सेल और दिगंतारा, जो वैश्विक स्तर पर रक्षा एजेंसियों को उपग्रह सेवाएं प्रदान करने की दिशा में काम कर रहे हैं, उन्होंने अतीत में अपने उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए स्पेसएक्स के रॉकेट का इस्तेमाल किया है। पिछले साल, दिगंतारा ने स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट पर, अंतरिक्ष मौसम का मूल्यांकन करने के लिए अपना पुशन अल्फा मिशन लॉन्च किया था।
बिजनेस का विशालकाय सेक्टर बना स्पेस
जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है, स्पेस सेक्टर कारोबार के लिए असीम संभावनाएं खोल रहा है और सौर मंडल को उपनिवेश बनाने की संभावनाओं और अर्थशास्त्र में सुधार हुआ है। बड़ी बड़ी कंपनियों ने स्पेस रेस को काफी तेज कर दिया है।
भारत सरकार अभी तक स्पेस सेक्टर में FDI को मंजूरी देने से हिचक रही थी और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के तहत लॉन्च वाहनों और संबंधित प्रणालियों या उप प्रणालियों के लिए 49 प्रतिशत तक एफडीआई की ही इजाजत दी गई थी, लेकिन अब सरकार का हिचक खत्म हो चुका है और 100 प्रतिशत FDI को मंजूरी दे दी गई है।
दरअसल, किसी अंतरिक्ष यान को लॉन्च करने और फिर से उसे वापस धरती पर लाने के लिए एक स्पेसपोर्ट का निर्माण करना होता है और अभी भी अगर किसी विदेशी कंपनी को इसके निर्माण में 49 प्रतिशत से ज्यादा का निवेश करना है, तो उसे भारत सरकार से इजाजत लेनी होगी। जबकि, पहले 49 प्रतिशत से ज्यादा का निवेश संभव नहीं था। हालांकि, सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए बिना सरकार की इजाजत के भी 100 प्रतिशत निवेश किया जा सकता है।
माना जा रहा है, कि स्पेस सेक्टर को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोलने का मोदी सरकार का फैसला, अमेरिका के स्पेस सेक्टर में एलन मस्क की स्पेस एक्स कंपनी के योगदान को देखते हुए किया गया है। कई सालों तक NASA ने भी स्पेसएक्स के लिए दरवाजे नहीं खोले थे, लेकिन अब नासा और स्पेसएक्स दर्जनों मिशनों को एक साथ अंजाम देते हैं। इससे नासा के लिए फंड जुटाने का एक नया रास्ता खुल गया है।
हाल ही में नासा ने स्पेसएक्स के साथ मिलकर चंद्रमा पर खनन करने का एक मिशन तैयार किया है। इसके अलावा, एलन मस्क की कंपनी ने ऐसे रॉकेट भी तैयार कर लिए हैं, जिनका बार बार इस्तेमाल किया जा सके, ताकि सैटेलाइट लॉन्च करने में जो खर्च आता है, उसे काफी कम किया जा सके।

इसी को देखते हुए भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO के कुछ अधिकारियों ने कुछ भारतीय स्टार्टअब कंपनियों के अधिकारियों के साथ पिछले महीने कैलिफोर्निया में स्पेस एक्स फैसिलिटी का दौरा भी किया था।
भारतीय अंतरिक्ष संघ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट (सेवानिवृत्त) ने समाचार एजेंसी ANI को दिए गये एक इंटरव्यू में कहा, कि "भारत का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ब्रॉडबैंड से कनेक्ट नहीं है और कई क्षेत्रों में तेज इंटरनेट की पहुंच नहीं है। जैसे लद्दाख हो या अंडमान के क्षेत्र, इन इलाकों में केबल ब्रॉडबैंड बिछाना काफी ज्यादा खर्चीला है और इसीलिए इन क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा नगन्य है, लेकिन स्टारलिंक इंटरनेट इन स्थितियों को बदल देगा।"
अंतरिक्ष क्षेत्र में इसी महीने भारत को एक और कामयाबी मिली है, जब विजयवाड़ा में जन्मे गोपीचंद थोटाकुरा को अमेज़ॅन के संस्थापक जेफ बेजोस की अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजिन के नेक्स्ट न्यू शेपर्ड मिशन के छह चालक दल के सदस्यों में से एक के रूप में चुना गया है। वो अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री होंगे। 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद थोटाकुरा, भारत के पहले नागरिक अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय नागरिक बनेंगे।
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