भारत में सरकार की आलोचना करने पर मीडिया को परेशान किया जा रहा है- अमेरिका
वॉशिंगटन। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की एक रिपोर्ट ने कहा है कि भारत में जो मीडिया संस्थान सरकार की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें परेशान किया जा रहा है। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने वार्षिक ह्यूमन राइट्स रिपोर्ट पेश करते हुए कहा, 'भारत का संविधान फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्सप्रेशन की आजादी तो देता है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से प्रेस की स्वतंत्रता का जिक्र नहीं करता है। वहां कि सरकार इन अधिकारों का सम्मान करती है, लेकिन ऐसे कई उदाहरण है, जिनमें सरकार ने कथित तौर पर सरकार के आलोचनात्मक मीडिया आउटलेट को दबाया या परेशान करने की कोशिश की है।' हालांकि, यह बात अलग है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपने देश की आलोचनात्मक मीडिया के लिए 'फेक न्यूज' का शब्द प्रयोग करते रहे हैं।

मीडिया वॉचडॉग द हूट्स इंडिया फ्रीडम रिपोर्ट ने जनवरी 2016 और अप्रैल 2017 के बीच मामलों का विवरण देते हुए कहा है कि इस दौरान 54 जर्नलिस्ट्स पर कथित रूप से हमला किया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा तीन टेलीविजन समाचार चैनल को बैन किया जा चुका है, 45 इंटरनेट शटडाउन और 45 व्यक्तियों और समूहों के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज किया गया है।
इस रिपोर्ट ने एनडीटीवी के खिलााफ सीबीआई रेड, हिंदुस्तान टाइम्स के एडिटर बॉबी घोष की बर्खास्तगी और कार्टूनिस्ट जी बाला की गिरफ्तारी का भी जिक्र है। इस रिपोर्ट ने यूएस कांग्रेस में पत्रकार और कार्यकर्ता गौरी लंकेश और टीवी पत्रकार सांतौ भौमिक की हत्या के बारे में भी सूचना दी। स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा कि 2017 में कई पत्रकारों को अपनी रिपोर्टिंग के वक्त बदसलूकी के साथ-साथ हिंसा का शिकार भी होना पड़ा है।
स्टेट डिपार्टमेंट ने पीटीआई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कई महिला पत्रकारों को रोजाना मोबाइल और ऑनलाइन के जरिए परेशान किया जा रहा है। ट्रोल्स कई महिला पत्रकारों को हर रोज ट्विटर पर हजारों गालियां देते हैं। व्यापक भ्रष्टाचार, कुछ राज्यों में राजनीतिक कैदियों की रिपोर्ट, मीडिया पर सेंसरशिप व उत्पीड़न और सरकार की कुछ आलोचना करने वालों को परेशान किया जा रहा है।












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