महारानी एलिजाबेथ के 'राज' की 70वीं सालगिरह पर राष्ट्रमंडल देशों में विरोध

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लंदन, 01 जून। जहां ब्रिटेन में महारानी के सिंहासन पर सात दशक पूरा होने का जश्न मनाया जा रहा है, राष्ट्रमंडल देशों में कुछ लोग इस अवसर पर राजशाही और उसके औपनिवेशिक इतिहास से आधिकारिक रूप से अलग हो जाने की मांग कर रहे हैं.

जमैका को गणतंत्र बनाने के लिए अभियान चलाने वालीं शिक्षाविद रोसालिया हैमिलटन कहती हैं, "मैं जब महारानी के बारे में सोचती हूं, तो मुझे एक प्यारी से बुजुर्ग महिला नजर आती हैं. यह उनके बारे में नहीं है. यह उनके परिवार की दौलत के बारे में है जो हमारे पूर्वजों से अर्जित की गई है. हम एक ऐसे बीते हुए काल की विरासत से जूझ रहे हैं जो बड़ा दर्दनाक रहा है."

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अन्याय भरा इतिहास

एलिजाबेथ जिस साम्राज्य में पैदा हुई थीं वो तो कबका खत्म हो गया, लेकिन वो अभी भी ब्रिटेन से भी काफी दूर कई इलाकों पर राज करती हैं. वो 14 और देशों की राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिनमें कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, पापुआ न्यू गिनी और द बहामास शामिल हैं.

लंदन के पिकाडिली सर्कस इलाके में वर्षगांठ के जश्न की तस्वीरें

हाल तक इन देशों की संख्या 15 थी. बारबाडोस ने नवंबर में खुद को राजशाही से अलग कर लिया और जमैका जैसे कई कैरेबियाई देश भी ऐसा ही करना चाह रहे हैं.

ब्रिटेन में हो रहे जश्न का लक्ष्य है युनाइटेड किंग्डम और राष्ट्रमंडल की विविधता को दर्शाना, लेकिन एक स्वागत करने वाले और विविध समाज की ब्रिटेन की छवि को कई खुलासों से नुकसान पहुंचा है.

(देखें: ब्रिटिश साम्राज्य की है मिली जुली विरासत)

पता चला है कि कैरिबियन से आए सैकड़ों, या शायद हजारों, लोग जो दशकों तक ब्रिटेन में वैध रूप से रहे थे, उन्हें आवास, रोजगार और चिकित्सा के अवसर नहीं दिए गए, क्योंकि उनके पास अपने दर्जे को साबित करने के लिए कागज नहीं थे.

ब्रिटिश सरकार ने माफी मांगी है और हर्जाना देने का भी वादा किया है, लेकिन इस मामले को लेकर ब्रिटेन और कैरिबियन में लोग काफी नाराज हैं.

ताजा हैं उपनिवेशवाद की यादें

वर्षगांठ के जश्न के तहत ही महारानी के पोते राजकुमार विलियम और उनकी पत्नी केट मार्च में बेलीज, जमैका और बहामास की यात्रा पर गए थे. यात्रा का उद्देश्य इन देशों से रिश्तों को मजबूत करना था, लेकिन हुआ ठीक उसका उल्टा.

जश्न के लिए लंदन की सड़कों पर लहरा रहे हैं यूनियन जैक झंडे

एक मेड़ के पीछे से बच्चों से हाथ मिलाते और एक सैन्य परेड में एक खुली लैंड रोवर गाड़ी में बैठे शाही दंपति की तस्वीरों में कई लोगों के जहन में उपनिवेशवाद की यादें ताजा कर दीं.

(पढ़ें: ब्रिटेन की महारानी के बेटे पर लगा यौन शोषण का मामला क्या है?)

वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर सिंथिया बैरो-गिल्स कहती हैं कि लगता है कि ब्रिटेन के लोग कैरिबियन में शाही यात्राओं को मिलने वाली "गहरी प्रतिक्रियाओं के प्रति काफी अंधे हैं."

जमैका में विरोध करने वालों ने मांग की कि ब्रिटेन दासता के लिए हर्जाना दे और प्रधानमंत्री एंड्रू होलनेस ने नम्रतापूर्वक विलियम से कहा कि देश "आगे बढ़ रहा है". यह देश के गणतंत्र बनने की योजना का एक इशारा था.

राष्ट्रमंडल से अलग होते देश

अगले महीने एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने महारानी के बेटे राजकुमार एडवर्ड से कहा कि उनका देश भी एक दिन महारानी को राष्ट्राध्यक्ष के पद से हटा देगा. विलियम ने इस भावना की मजबूती को माना और कहा कि भविष्य "का फैसला लोगों के हाथों में है."

उन्होंने बहामास में कहा, "हम गर्व और आदर से आपके भविष्य के बारे में आपके फैसलों का समर्थन करते हैं. संबंध बदलते हैं. दोस्ती लंबे समय तक रहती है."

(देखें: ब्रिटेन में कितने लोग अब भी राजशाही के समर्थक)

1952 में राजा जॉर्ज षष्टम की मौत के बाद जब एलिजाबेथ महारानी बनी थीं, तब वो केन्या में थीं. केन्या सालों तक चले एक हिंसक संघर्ष के बाद 1963 में आजाद हुआ.

माफी मांगने की जरूरत

2013 में ब्रिटेन की सरकार ने 1950 के दशक के "माउ माउ" आंदोलन के दौरान केन्या के हजारों लोगों को यातना देने के लिए माफी मांगी और अदालत के बाहर हुए एक समझौते के तहत करोड़ों रुपए दिए.

केन्या के कई लोगों के लिए ब्रिटिश साम्राज्य की यादें आज भी ताजा हैं. केन्याई कार्टूनिस्ट, लेखक और टिप्पणीकार पैट्रिक गाथारा कहते हैं, "शुरुआत से ही उनके शासन पर उनके साम्राज्य की क्रूरता के कभी न मिटने वाले दाग लगे हुए हैं. उन्होंने आज तक उस दमन, उत्पीड़न, अमानुषीकरण और बेदखली के लिए माफी मांगना तो दूर, उसे स्वीकार भी नहीं किया है."

ब्रिटेन के अधिकारियों को उम्मीद है कि गणराज्य बनने वाले देश 54 सदस्य देशों वाले राष्ट्रमंडल में रहेंगे. इनमें से अधिकांश देश पूर्व ब्रिटिश कॉलोनियां हैं और रानी उनकी रस्मी रूप से मुखिया हैं.

(पढ़ें: कब लौटेंगी भारत की कलाकृतियां, जवाब किसी के पास नहीं)

इस बीच ऑस्ट्रेलिया के नए प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने अपने मंत्रिमंडल में एक "गणराज्य के लिए सहायक मंत्री" भी शामिल किया है, जिसे रानी को राष्ट्राध्यक्ष के पद से हटाने की दिशा में एक सांकेतिक कदम माना जा रहा है. सिडनी से सांसद मैट थिस्सलथ्वेट इस कार्यभार को संभालेंगे.

सीके/एए (एपी, एएफपी)

Source: DW

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