इमरान ख़ान बोले- अमेरिका को समझ नहीं, पर उनकी 'समझ' का भी बना मज़ाक़

पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान
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पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का बुधवार को सीएनएन को दिया इंटरव्यू काफ़ी चर्चा में है.

दरअसल, इमरान ख़ान का एक जवाब सुर्ख़ियां बटोर रहा है और लोग मज़ाक़ उड़ा रहे हैं. सीएनएन की पत्रकार बेकी एंडर्सन ने इमरान ख़ान से तालिबान की अंतरिम सरकार में शामिल हक़्क़ानी नेटवर्क के बारे में पूछा था.

एंडर्सन ने पूछा कि हक़्क़ानी नेटवर्क अमेरिकी बलों और अफ़ग़ानिस्तान में कई हिंसक हमलों में शामिल रहा है और पाकिस्तान से उसे मदद मिलती रही है.

इस सवाल के जवाब में इमरान ख़ान ने कहा, ''अमेरिका को हक़्क़ानी नेटवर्क के बारे में कोई समझ नहीं है. हक़्क़ानी ट्राइब हैं...ये पश्तून ट्राइब हैं और अफ़ग़ानिस्तान में रहते हैं. 40 साल पहले जब अफ़ग़ान जिहाद शुरू हुआ तो 50 लाख अफ़ग़ान शरणार्थी पाकिस्तान आए. इनमें से कुछ हक़्क़ानी मुजाहिदीन थे और सोवियत से लड़ रहे थे. इनका जन्म पाकिस्तान के अफ़ग़ान शरणार्थी कैंपों में हुआ है.''

https://twitter.com/BeckyCNN/status/1438151383920877577

इमरान ख़ान के इस जवाब पर काफ़ी तंज़ कसा जा रहा है. दरअसल, हक़्क़ानी न तो कोई ट्राइब हैं और न ही वे पश्तून हैं. अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रहे हुसैन हक़्क़ानी ने ट्वीट कर लिखा है, ''मेरे सबसे अहम पूर्वज मौलाना अबु मुहम्मद अब्दुल हक़ हक़्क़ानी मुफ़सिर देहलवी एक धर्मशास्त्री थे. इन्हें पुरानी दिल्ली में सूफ़ी संत हज़रत बक़ी बिल्लाह की मज़ार के पास दफ़नाया गया था. उन्होंने तफ़सीर-ए-हक़्क़ानी और अन्य किताबें लिखी थीं.''

हक़्क़ानी ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा है, ''मेरा सरनेम दिल्ली के परिवार से आया. पश्तून हक़्क़ानी को यह टाइटल पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा में अकोरा खट्टक स्थित दारुल उलूम हक़्क़ानिया में पढ़ने के कारण मिला. जलालुद्दीन और उनके परिवार ज़र्दान ट्राइब से हैं. पश्तूनों में कोई हक़्क़ानी ट्राइब नहीं है. अगर जलालुद्दीन हक़्क़ानी, हक़्क़ानी ट्राइब से हैं तो इमरान ख़ान एचिसन और ऑक्सफ़ोर्ड ट्राइब हैं.''

इमरान ख़ान की पढ़ाई लंदन में एचिसन और ऑक्सफ़ोर्ड से हुई है.

https://twitter.com/husainhaqqani/status/1438219195653758976

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मीर ने भी इमरान ख़ान के इस जवाब को ग़लत बताते हुए लिखा है, ''सीएनएन पर इमरान ख़ान को कहते हुए सुना कि हक़्क़ानी अफ़ग़ानिस्तान में ट्राइब हैं. हक़्क़ानी कोई ट्राइब नहीं हैं. ये सभी दारूल उलूम हक़्क़ानिया अकोरा खट्टक के छात्र हैं. इनमें जलालुद्दीन हक़्क़ानी भी शामिल हैं जिन्होंने सोवियत यूनियन को हराने में अहम भूमिका अदा की थी.''

https://twitter.com/HamidMirPAK/status/1438162766855122951

पाकिस्तान में ट्विटर पर हैशटैग हक़्क़ानी और हैशटैग इमरान ख़ान ट्रेंड भी कर रहा है. हक़्क़ानी को ट्राइब बताने पर पाकिस्तान के लोग इमरान ख़ान को आड़े हाथों ले रहे हैं. पत्रकार हिज़्बुल्लाह ख़ान ने इमरान ख़ान के जवाब का वीडियो क्लिप ट्वीट करते हुए लिखा है, ''इमरान ख़ान ने कहा कि अमेरिकी हक़्क़ानी नेटवर्क को नहीं समझते हैं. उसके बाद मैंने इमरान ख़ान की समझ सुनी और उन्होंने हक़्क़ानी को पश्तून ट्राइब बताया जो अफ़ग़ानिस्तान में रहते हैं. पश्तून में कोई भी हक़्क़ानी ट्राइब नहीं है. हक़्क़ानी नेटवर्क के संस्थापक जलालुद्दीन हक़्क़ानी जर्दान ट्राइब से थे.''

बेकी एंडर्सन ने इमरान ख़ान से अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों के भविष्य के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, ''अमेरिका का जैसा संबंध भारत से है, हम भी वैसा ही संबंध चाहते हैं. संबंध एकतरफ़ा नहीं हो सकता. हम अमेरिका से सामान्य संबंध चाहते हैं. दुर्भाग्य से अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी प्रभाव के दौरान पाकिस्तान का संबंध बहुत ही बेकार था.''

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https://twitter.com/nailainayat/status/1438204171828834313

इमरान ख़ान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए ज़रूरी है कि तालिबान के साथ बात की जाए. इमरान ख़ान ने कहा, ''तालिबान का पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण है. अगर ये समावेशी सरकार की ओर क़दम बढ़ाते हैं और सभी धड़ों को साथ लाते हैं तो अफ़ग़ानिस्तान में 40 साल बाद शांति कायम हो सकती है. लेकिन ये ग़लत राह पर आगे बढ़ते हैं तो इससे गंभीर मानवीय संकट पैदा होगा.''

इमरान ख़ान ने कहा कि तालिबान अंतरराष्ट्रीय मदद की ओर देख रहा है ताकि किसी भी संकट से बचा जा सके. पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को बाहरी ताक़त से कंट्रोल नहीं किया जा सकता है.

पाकिस्तान के बारे में कहा जाता है कि वो तालिबान के साथ भी रहा और अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिकी बलों के ऑपरेशन को साथ देने का नाटक भी करता रहा. हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करता रहा है.

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2018 में पाकिस्तान ने तालिबान के अहम नेता मुल्ला बरादर को जेल से छोड़ा था. कहा गया था कि अमेरिका से बात करने के लिए जेल से छोड़ा गया था. पिछले हफ़्ते तालिबान ने अपनी अंतरिम सरकार में मुल्ला बरादर को उप-प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की थी.

सोमवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों का मूल्यांकन करेगा. ब्लिंकन कांग्रेस में विदेश मामलों की समिति के समक्ष बोल रहे थे. ब्लिंकन ने कहा था कि पाकिस्तान के अफ़ग़ानिस्तान को लेकर कई हित हैं और कुछ ऐसे हित भी हैं जिनका अमेरिका से टकराव है.

ब्लिंकन की इस टिप्पणी पर इमरान ख़ान ने सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह अमेरिका की अनभिज्ञता को दर्शाता है. इमरान ख़ान ने कहा कि उन्होंने इस तरह की अनभिज्ञता कभी नहीं देखी.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की अंतरिम सरकार को पाकिस्तान ने अभी मान्यता नहीं दी है. पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ़ ने बुधवार को कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार को मान्यता देने पर दुनिया का 'वेट एंड वॉच' वाला रुख़ समस्या और बढ़ा सकता है. यूसुफ़ ने कहा कि पश्चिम के देशों ने 1990 के दशक में जो ग़लती की उससे अर्थव्यवस्था चौपट हुई और अफ़ग़ानिस्तान गृह युद्ध में समा गया.

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तालिबान को लेकर अंतरराष्ट्रीय जगत में अभी हलचल थमी नहीं है. पाकिस्तान को लेकर शक़ केवल अमेरिका का ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देश ईरान का भी बढ़ा है. हाल के दिनों में ईरान की तरफ़ से कई ऐसे बयान आए हैं जिनसे पता चलता है कि पाकिस्तान के अफ़ग़ानिस्तान में बढ़ते प्रभाव से ईरान चिंतित है.

पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान आज यानी 16 सितंबर को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन के समिट में शामिल होने रवाना हुए हैं. इस समिट में भारत, चीन और रूस भी हिस्सा ले रहे हैं. ज़ाहिर है, यहाँ भी अफ़ग़ानिस्तान का मुद्दा छाया रहेगा. इस समिट में ईरान के नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को भी बुलाया गया है. भारतीय प्रधानमंत्री मोदी वर्चुअल रूप से इस समिट को संबोधित करेंगे.

(कॉपी: रजनीश कुमार)

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