पाकिस्तान की राजनीति में हाई-वोल्टेज ड्रामा, आपातकाल लगा सकते हैं पीएम इमरान खान, जारी किया संदेश
पाकिस्तान की राजनीति पिछले एक महीने से काफी तनावपूर्ण है और इमरान खान का साथ उनके अपने ही कई सांसदों के अलावा सहयोगी पार्टियों ने छोड़ दिया है।
इस्लामाबाद, मार्च 20: पाकिस्तान की राजनीति में तूफान मच गया है और अपनी सत्ता बचाने के लिए इमरान खान पाकिस्तान में आपातकाल लगाने पर विचार कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने समर्थकों के लिए एक संदेश भी जारी किया है, जबकि पाकिस्तान की तमाम विपक्षी पार्टियों ने कहा है कि, अगर नेशनल एसेंबली के स्पीकर संसद में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आगे की कार्यवाही नहीं करते हैं, तो सोमवार को 'इस्लामिक देशों की बैठक' नहीं होने दी जाएगी।

पाकिस्तानी राजनीति में तूफान
पाकिस्तान की राजनीति पिछले एक महीने से काफी तनावपूर्ण है और इमरान खान का साथ उनके अपने ही कई सांसदों के अलावा सहयोगी पार्टियों ने छोड़ दिया है। सेना पहले ही इमरान सरकार से समर्थन वापस ले चुकी है, लिहाजा अब इस बात की काफी कम उम्मीद है, कि इमरान खान अपनी सरकार बचा पाएंगे। वहीं, अब इमरान खान ने अपनी पार्टी के असंतुष्ट सांसदों को दलबदल आरोपों के तहत 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया है, जिसमें पूछा है, कि 'उन्हें दलबदलू क्यों नहीं घोषित किया जाए?' और उन्हें 'नेशनल असेंबली में अयोग्य क्यों नहीं घोषित किया जाए?' पाकस्तानी राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, इमरान खान अने कई सांसदों को 'अयोग्य' ठहराकर अपनी सरकार को बचाने की कोशिश में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' के करीब 24 सांसद बागी हो चुके हैं और अविश्वास प्रस्ताव के दौरान इमरान खान के खिलाफ वोट डालने वाले हैं, लिहाजा सदन में वोटिंग से पहले ही उन्हें 'अयोग्य' घोषित करने की कोशिश हो रही है।

सिंध हाउस में ठहरे हुए हैं सांसद
मुश्किल परिस्थितियों में फंसी हुई सरकार को बचाने के लिए इमरान खान ने विपक्षी पार्टियों पर अपने सांसदों को खरीदने का आरोप लगाया है। इमरान खान ने कहा है कि, उनके सांसदों को करोड़ों रुपये 'बिकने' के लिए दिए गये हैं। वहीं, इमरान खान की पार्टी के तमाम बागी सांसद फिलवक्त इस्लामाबाद स्थिति सिंध हाउस में ठहरे हुए हैं, जबकि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में इस वक्त 'पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी' की सरकार है और शुक्रवार को सिंध हाउस में इमरान खान के समर्थकों ने भारी हिंसा की है। सिंध हाउस, सिंध सरकार की संपत्ति है, लिहाजा, वहां केन्द्र का दखल नहीं हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान के समर्थको ने सिंध हाउस के सामने 'लोटे' लेकर बागी सांसदों के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया है।

क्या आपातकाल लगाएंगे इमरान खान?
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान खान के पास अब अपनी सरकार बचाने के लिए देश में 'आपातकाल' लगाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। लेकिन, इमरान खान के लिए ऐसा करना भी संभव नहीं है। क्योंकि, पाकिस्तानी संविधान के मुताबिक, देश का राष्ट्रपति ही देश में आपातकाल घोषित कर सकता है और उसके लिए पाकिस्तान संसद में दो तिहाई बहुमत से आपातकाल पर प्रस्ताव पास होना चाहिए। इसके साथ ही, आपातकाल लगाने के लिए दो बड़ी वजहें होनी चाहिए। पहली वजह कि, देश पर बाहरी खतरा हो और दूसरी वजह देश की आंतरिक स्थिति काफी खराब हो चुकी हो। डॉन अखबार के मुताबिक, इस वक्त पाकिस्तान ना किसी जंग के मुहाने पर है, और नाही देश की आंतरिक स्थिति, जैसे 'गृहयुद्ध' जैसे हालात भी नहीं हैं। लिहाजा, इमरान खान की बात मानना भी राष्ट्रपति के लिए संभव नहीं है। लिहाजा, इमरान खान भले ही आपातकाल के बारे में सोच रहे हों, लेकिन ऐसा करना उनके लिए संभव नहीं है।

विपक्षी पार्टियों ने दी धमकी
वहीं, पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने नेशनल असेंबली के स्पीपर असद कैसर को धमकी दी है, कि अगर सोमवार तक इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का एजेंडा नहीं रखा गया, तो इस्लामिक सहयोग संगठन की प्रस्ताविक बैठक नहीं होने दी जाएगी। बिलावल भुट्टो ने कहा कि, 'हम जानते हैं, कि ओआईसी की बैठक देश की प्रतिष्ठा का सवाल है और वो पाकिस्तान के मेहमान हैं, लेकिन अगर इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का एजेंडा नेशनल असेंबली में नहीं लाया गया, तो हम ओआईसी की बैठक नहीं होने देंगे।' वहीं, पीएमएल-एन के सांसद शहबाज शरीफ, जो नवाज शरीफ के भाई हैं, उन्होंने भी कहा है कि, ओआईसी की बैठक नहीं होने दी जाएगी। विपक्षी पार्टियों ने कहा है कि, ओआईसी की बैठक के दौरान तमाम विपक्षी पार्टी के सांसद नेशनल असेंबली में धरना देंगे और धरनास्थल वही होगा, जहां ओआईसी की बैठक होगी।

इमरान खान का जाना तय?
इमरान खान के खिलाफ विपक्षी पार्टियों ने 4 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था और विपक्षी पार्टियों का कहना है कि, 15 दिन बीतने के बाद भी नेशनल असेंबली में प्रस्ताव को नहीं लाया गया है और स्पीकर इमरान खान को अपनी सरकार बचाने के लिए हर जोड़-तोड़ करने का मौका दे रहे है। विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से देशहित में काम करने के लिए कहा है। वहीं, पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने इमरान खान का ही एक वीडियो ट्वीटर पर शेयर किया है, जो पिछले साल 4 मार्च का है। जिसमें इमरान खान अपने सांसदों को संबोधित करते हुए कह रहे हैं, कि 'अगर आप मुझे पसंद नहीं करते हैं, तो भी आपको अपनी बात रखने का हक है और आपको मेरे खिलाफ जाने का हक है।' हामिद मीर ने सवाल उठाते हुए कहा है कि, आखिर एक साल में इमरान खान अपनी ही बातों से क्यों मुकर गये हैं और अपने खिलाफ जाने वाले सांसदों को 'बिका हुआ और गद्दार' क्यों बता रहे है? इमरान खान की पार्टी के 24 सांसद सिंध हाउस में हैं, लिहाजा इमरान खान के लिए सरकार बचाना काफी मुश्किल है।
समर्थकों को जारी किया संदेश
वहीं, 19 मार्च रात 9 बजे इमरान खान ने अपने समर्थकों के लिए ट्वीटर पर एक संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ होने वाले सांसदों को 'गद्दार और देशद्रोही' बताया है। इमरान खान ने ''मेरे कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संदेश: हमारे देश के गद्दार और देशद्रोही जाल में फंस रहे हैं।'' हेडिंग के साथ एक 'कोट' ट्वीटर पर शेयर किया है। इमरान खान ने जो संदेश पोस्ट किया है, उसमें लिखा है, 'चालबाजी करने वालों और चीटर्स से घबराने की जरूरत नहीं है। अगर कुछ लोग आपको फंसाने और जख्म देने की कोशिश करते हैं, तो अल्लाह भी उसे फंसा देंगे। ऐसे लोग गड्ढ़े में गिरेंगे। एक भी गुनहगार सजा से नहीं बचेगा और कोई भी ईमानदार बिना सम्मान के नहीं बचेगा।, लिहाजा इंसाफ में विश्वास रखिए और जो हो रहा है, उसे होने दीजिए'। इमरान खान का ये ट्वीट उनकी हताशा को दिखाता है, और पाकिस्तानी राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, इमरान खान को अपनी इज्जत बचाते हुए खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए और चुनाव में चले जाना चाहिए।

पाकिस्तानी संसद का गणित
पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों के पास कुल 162 एमएनए (नेशनल एसेंबली मेंबर) हैं। 342 एमएनए वाली एसेंबली में प्रस्ताव पारित करने के लिए विपक्ष को 10 और वोटों की जरूरत है। विपक्ष सरकार के 24 सदस्यों का समर्थन हासिल करने की भी बात कह रहा है। ऐसे में अगर इमरा अपना घर बचाने में नाकामयाब रहे और सत्तापक्ष के 24 एमएनए उनके खिलाफ गए तो फिर बहुत मुमकिन है कि इमरान खान सरकार को गिरा जाए।












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