‘अगर रूस का इलाज नहीं किया गया, तो भारत...’ दिल्ली दौरे पर आईं यूरोपीय आयोग की प्रमुख की चेतावनी!

पीएम मोदी 25 अप्रैल को रायसीना डायलॉग का उद्घाटन करेंगे और यूरोपीय संघ की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र में शामिल होंगी। रायसीना डॉयलॉग का प्रमुख मुद्दा भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र है।

नई दिल्ली, अप्रैल 24: पिछले एक से डेढ़ महीने में भारत में जितने वैश्विक नेता पहुंचे हैं, भारत के साथ जितने वैश्विक नेताओं की बैठक हुई है, शायद उतनी बैठकें एक साल में होती हैं। ये वैश्विक पटल पर ना सिर्फ भारत के बढ़ते प्रभाव को दिखाया है, बल्कि, यूक्रेन युद्ध के लिए भारत कितना महत्वपूर्ण है और भारत के बिना रूस को काउंटर करना कितना मुश्किल है, इससे यह भी जाहिर होता है। इस वक्त यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन दिल्ली के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने एक बार फिर से चेतावनी देने की कोशिश की हैं।

रूस को लेकर चेतावनी

रूस को लेकर चेतावनी

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने नई दिल्ली में कहा कि, अगर यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया और अगर यूक्रेन युद्ध के लिए रूस को चुनौती नहीं दी गई, तो फिर इसका असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर होगा। उन्होंने कहा कि, रूस को नहीं रोकने पर एक ऐसी दुनिया बन सकती है, 'जो चाहे वो करेंगे' को सही ठहराने की कोशिश की जा सकती है और इससे हिंद प्रशांत क्षेत्र भी अछूता नहीं रहेगा, जहां पहले से ही काफी तनाव है। फ्रांस की रहने वाली वॉन डेर लेयेन देर रात भारत पहुंची हैं और उनका भारत दौरा दो दिनों का है, जहां वो भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात करेंगी और फिर रायसीना डायलॉग की शुरूआत करेंगी।

भारत के साथ यूक्रेन पर चर्चा

भारत के साथ यूक्रेन पर चर्चा

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि, वो भारत के साथ यूक्रेन संकट पर रूस की आक्रामकता को रोकने के लिए स्पष्ट चर्चा करेंगी। दिल्ली दौरे पर आने से पहले एक इंटरव्यू के दौरान उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि, 'यूरोपीय संघ (ईयू) अन्य देशों को भी रूस और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यूक्रेन में जारी रक्तपात की क्षमता को बाधित करने के लिए प्रतिबंध लगाने के अपने प्रयासों में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है'। उन्होंने कहा कि, 'रूस की आक्रामकता ना सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर देशों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है।'

‘इंडो-पैसिफिक पर होगा असर’

‘इंडो-पैसिफिक पर होगा असर’

यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की तरह इंडो पैसिफिक में भी संभावित जोखिम के बारे में पूछे जाने पर, जहां चीन काफी आक्रामक है और जिसका कई देशों के साथ सीमा-विवाद चल रहा है, वॉन डेर लेयेन ने कहा कि, "मेरा मानना है कि ये एक जोखिम है, अगर इस आक्रामकता को चुनौती नहीं दी जाती है, तो फिर हम सभी को एक ऐसी दुनिया का सामना करना पड़ सकता है, जहां 'जो मन करे, वो करेंगे' सही साबित सकता है। यूरोपीय संघ कानून के शासन के लिए है, बंदूक के शासन के लिए नहीं।" उन्होंने कहा कि, "यह न केवल यूरोप में बल्कि इंडो-पैसिफिक में भी मान्य है, जहां हम बढ़ते तनाव को देख रहे हैं। अपनी इंडो-पैसिफिक रणनीति के साथ हमने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है, कि इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और समृद्धि में यूरोपीय संघ की मजबूत हिस्सेदारी है।" उन्होंने आगे कहा कि, "हम अपने दोस्तों और भागीदारों के साथ काम करना चाहते हैं, विशेष रूप से भारत के साथ काम करना चाहते हैं।"

‘भारत के साथ नजदीक से काम’

‘भारत के साथ नजदीक से काम’

वॉन डेर लेयेन ने कहा कि, वह दुनियाभर के भागीदारों के साथ यूरोपीय संघ के गहन परामर्श के हिस्से के रूप में नई दिल्ली में वार्ताकारों के साथ भी यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा करेंगी। उन्होंने कहा कि, "मैं अपने सभी वार्ताकारों से जो कहती हूं, वह यह है कि हमें अब इस आक्रामकता को रोकने की जरूरत है। हमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रों की संप्रभुता के लिए सम्मान बनाए रखना चाहिए।" उन्होंने कहा, "हम इस संबंध में भारत के साथ भी बहुत निकटता से काम करते हैं और हम प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शत्रुता को तत्काल समाप्त करने के साथ-साथ भारत जो यूक्रेन में बार बार मानवीय मदद पहुंचा रहा है, उसकी हम सराहना करते हैं'। उन्होंने कहा, "अकारण हमला" पुतिन द्वारा वैश्विक शांति और सुरक्षा को रेखांकित करने वाले सिद्धांतों के लिए एक चुनौती है।"

यूक्रेन पर भारत का अब तक का रूख

यूक्रेन पर भारत का अब तक का रूख

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही भारत ने भले ही एक बार भी रूस की निंदा नहीं की है, लेकिन भारत ने लगातार दोनों देशों से युद्ध रोकने और शांतिपूर्वक बातचीत का आह्वान किया है। भारत ने बुचा में नागरिकों की हत्याओं की निंदा की है और यूक्रेन में संघर्ष को समाप्त करने और बातचीत के रास्ते पर लौटने का लगातार आह्वान किया है। पीएम मोदी ने सुझाव दिया है, कि रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के बीच सीधी बातचीत होनी चाहिए। हालांकि, रूस की अभी तक आलोचना नहीं करने और रूस से सस्ती कीमत पर तेल का आयात करने के लिए भारत को अपने यूरोपीय सहयोगियों की तरफ से आलोचना का सामना करना पड़ा है।

कच्चे तेल के आयात पर भी दबाव

कच्चे तेल के आयात पर भी दबाव

सिर्फ यूरोपीय संघ ने ही नहीं, बल्कि अमेरिका ने भी भारत पर लगातार रियायती दरों प कच्चे तेल के आयात में वृद्ध नहीं करने और रूस के नेतृत्व और रूसी वित्तीय प्रणाली पर लगाए गए प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए भी दबाव डाला है। यह पूछे जाने पर कि क्या यूरोपीय संघ पश्चिमी प्रतिबंधों को दरकिनार करने की कोशिश करने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई करेगा? वॉन डेर लेयेन ने कहा कि, 40 से अधिक देशों द्वारा प्रतिबंधों का उद्देश्य यूक्रेन में रक्तपात जारी रखने की पुतिन की क्षमता को बाधित करना है। उन्होंने कहा कि, 'प्रतिबंध क्रेमलिन की युद्ध मशीनरी के खिलाफ निर्देशित हैं। हम अन्य देशों को इस प्रयास में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हैं, क्योंकि रूस की आक्रामकता न केवल अलग-अलग देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा है।"

उर्सुला के भारत दौरे का कार्यक्रम

उर्सुला के भारत दौरे का कार्यक्रम

पीएम मोदी 25 अप्रैल को रायसीना डायलॉग का उद्घाटन करेंगे और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में उद्घाटन सत्र में शामिल होंगी। रायसीना डॉयलॉग का प्रमुख मुद्दा विदेश मंत्रालय का भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर प्रमुख सम्मेलन है। द्विपक्षीय मोर्चे पर, वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोपीय संघ भारत को नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और डिजिटल संक्रमण को चार्ट करने के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखता है। शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत को सुनिश्चित करने जैसे दोनों पक्षों के अभिसरण हित भी हैं। वॉन डेर लेयेन ने यह भी कहा कि, यूरोपीय संघ भारत के साथ व्यापार, निवेश संरक्षण और भौगोलिक संकेतों पर तीन समझौतों को तेजी से काम को अंजाम तक पहुंचाना चाहता है।

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