दुनिया की सबसे बड़ी अदालत का आदेश, फौरन रफा में हमला रोके इजराइल.. बात मानेंगे बेंजामिन नेतन्याहू?

Israel-Hamas War: यूनाइटेड नेशंस की सर्वोच्च अदालत इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) ने शुक्रवार को इजराइल को दक्षिणी गाजा शहर रफा में अपने सैन्य आक्रमण को फौरन रोकने का आदेश दिया। लेकिन, सवाल उठ रहे हैं, कि क्या प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, दुनिया की सर्वोच्च अदालत का आदेश मानेंगे?

आइये जानते हैं, कि आखिर यूनाइटेड नेशंस की सबसे बड़ी अदालत के इस फैसले का कितना महत्व है और क्या इससे पश्चिम एशिया में इजराइल की बमबारी रोकने में मदद मिल सकती है?

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ICJ के फैसले का महत्व समझिए

आईसीजे का हालिया फैसला, गाजा में चल रहे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा। अदालत के प्रेसिडेंट नवाफ़ सलाम ने कहा, कि रफा में मानवीय स्थिति "विनाशकारी" है, जिससे तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। यह फैसला मार्च में दिए गए पहले के अनंतिम उपायों का पालन करता है, जिन्हें गाजा में गंभीर परिस्थितियों से निपटने के लिए अपर्याप्त माना गया था।

दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र के 'जेनोसाइड कन्वेंसन' के तहत इस मामले को आईसीजे में लाया था, जिसमें इजराइल पर ऐसे कार्यों का आरोप लगाया गया है, जिससे गाजा में फिलिस्तीनी आबादी का भौतिक विनाश हो सकता है।

जेनोसाइड कन्वेंसन, पर दस्तखत करने वाले सभी सदस्य देश इस संधि के तहत कोर्ट के आदेश को मानने के लिए बाध्य होते है। इसलिए, द कन्वर्सेशन के एक लेख के मुताबिक, जिन देशों का नरसंहार के किसी कथित मामले से सीधा संबंध नहीं है, वे भी कानूनी तौर पर कोर्ट में शिकायत ला सकते हैं।

कोर्ट में फैसले को पढ़ते हुए, सलाम ने कहा, कि इजराइल को "अपने सैन्य आक्रमण, और रफा गवर्नरेट में किसी भी अन्य कार्रवाई को फौरन रोकना चाहिए, जो गाजा में फिलिस्तीनी समूह को जीवन को खतरे में डालता है या आंशिक रूप से उसके भौतिक विनाश का कारण बन सकता है।"

आपको बता दें, कि गाजा में हमास नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है, ICJ के इस फैसले का मकसद रफा में बढ़ते मानवीय संकट को संबोधित करना है, जहां 35,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं। उसने कहा है, कि इजराइल के लगातार हमले ने गाजा पट्टी को तबाह कर दिया है, लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं और गाजा के कुछ हिस्सों को अकाल आ गया है।

ICJ के फैसले में आक्रामकता को रोकने, युद्ध अपराध जांचकर्ताओं के लिए गाजा तक पहुंच और मानवीय सहायता में पर्याप्त वृद्धि का आह्वान किया गया है।

क्या ICJ अपने फैसले को लागू करवा सकता है?

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के फैसले उसके सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी हैं, लेकिन ICJ के पास कोई फोर्स नहीं है, कि वो अपने फैसले को लागू करवा सके। इजराइल की सरकार ने पहले ही कहा है, कि दक्षिण अफ्रीका ने नरसंहार के जो आरोप लगाए हैं, "वो झूठा, अपमानजनक और नैतिक तौर पर प्रतिकूल" हैं और इजराइल ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।

लिहाजा, इजराइल की जो प्रतिक्रिया है, उससे पता चलता है, कि इजराइल किसी भी हाल में ICJ के फैसले को मानने वाला नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 94 के मुताबिक, यदि कोई पक्ष आईसीजे के फैसले का पालन करने में नाकाम होता है, तो दूसरा पक्ष संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपील कर सकता है। हालांकि, इजराइल को लेकर अगर दक्षिण अफ्रीका UNSC में जाता है, तो वहां अमेरिका वीटो लगाने के लिए पहले से ही बैठा है, जैसा कि निकारागुआ बनाम संयुक्त राज्य अमेरिका के 1984 के मामले में देखा गया था। इसके अलावा, रूस ने यूक्रेन पर अपने पूर्ण पैमाने पर आक्रमण को रोकने के लिए अदालत के 2022 के आदेश की भी अनदेखी की थी और कोर्ट, अपने फैसले को लागू करवाने में नाकाम रहा था।

हालांकि, ह्यूमन राइट्स वॉच के एसोसिएट इंटरनेशनल डिफेंस डायरेक्टर बाल्कीस जर्राह ने समाचार एजेंसी AP को बताया, कि ICJ का फैसला राहत के लिए एक संभावित अवसर प्रदान करता है, लेकिन केवल तभी, जब दुनियाभर की सरकारें इजराइल को फैसले मानने के लिए बाध्य करे, उसे हथियारों की सप्लाई रोके, लेकिन क्या ये संभव है? इसका जवाब है नहीं।

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