ICC से हटने वाला है हंगरी? इजराइल PM नेतन्याहू का है बड़ा रोल? जानें क्या पक रही है दोनों के बीच खिचड़ी?

Hungary Withdraw ICC News: हंगरी ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) से हटने की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया, जब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू युद्ध अपराधों के आरोपों के बावजूद बुडापेस्ट पहुंचे। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ नेतन्याहू का स्वागत किया, जबकि ICC के वारंट के तहत हंगरी पर उनकी गिरफ्तारी की जिम्मेदारी थी।

हंगरी के प्रधानमंत्री ओर्बन ICC पर राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह न्यायालय अब निष्पक्ष नहीं रहा और इसे 'राजनीतिक हथियार' बना दिया गया है। इसीलिए हंगरी ने ICC से अलग होने का फैसला लिया।

Hungary Withdraw ICC

नेतन्याहू पर ICC का वारंट क्यों जारी हुआ?

ICC ने इजरायल-गाजा युद्ध के दौरान मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों में नेतन्याहू और उनके पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। यह मामला 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद इजरायल की सैन्य कार्रवाई से जुड़ा है।

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायली हमलों में 50,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए। इजरायल का दावा है कि उसने 20,000 आतंकवादियों को मार गिराया, लेकिन इसका कोई सबूत पेश नहीं किया गया।

हंगरी का नेतन्याहू के प्रति समर्थन

जब ICC ने नेतन्याहू के खिलाफ वारंट जारी किया, तो हंगरी ने खुलेआम उसका विरोध किया और नेतन्याहू को बुडापेस्ट आमंत्रित किया। ओर्बन ने इसे इजरायल के खिलाफ अन्याय बताया और नेतन्याहू ने हंगरी के इस फैसले की तारीफ की। नेतन्याहू ने कहा, 'आप पहले ऐसे देश हैं, जो इस भ्रष्ट व्यवस्था से बाहर निकल रहे हैं। यह केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में सराहा जाएगा।'

ICC और यूरोपीय संघ की प्रतिक्रिया

ICC ने हंगरी के इस फैसले की आलोचना की और कहा कि एक हस्ताक्षरकर्ता देश को न्यायालय के निर्णयों का पालन करना चाहिए। हंगरी के इस कदम से यूरोपीय संघ में भी असहमति बढ़ सकती है, क्योंकि हंगरी पहले भी कई विवादास्पद फैसलों के कारण आलोचना झेल चुका है।

नेतन्याहू की चुनौतियां

हालांकि, नेतन्याहू को हंगरी में समर्थन मिला, लेकिन इजरायल में उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इजरायल में हजारों लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें डर है कि नेतन्याहू की नीतियाँ गाजा में युद्ध को और भड़का सकती हैं।

What is International Criminal Court: अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) क्या है?

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court - ICC) एक स्थायी अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण है, जिसका मुख्यालय हेग, नीदरलैंड्स में स्थित है। यह न्यायालय उन व्यक्तियों पर न्यायिक कार्रवाई करता है जो नरसंहार (genocide), युद्ध अपराध (war crimes), मानवता के खिलाफ अपराध (crimes against humanity), और आक्रमण के अपराध (crime of aggression) जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए आरोपित होते हैं। ICC का उद्देश्य इन अपराधों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय के कटघरे में लाना और राष्ट्रीय न्यायालयों की अनुपस्थिति में या उनकी अक्षमता की स्थिति में कार्य करना है। ​

क्या हंगरी ICC से हटने वाला है?

हाल ही में, हंगरी की सरकार ने घोषणा की है कि वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) से हटने की प्रक्रिया शुरू करेगी। यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बुडापेस्ट की यात्रा पर हैं। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने ICC को 'राजनीतिक अदालत' कहकर इसकी आलोचना की है। ​

इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की भूमिका क्या है?

21 नवंबर 2024 को, ICC ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इन पर गाज़ा में युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोप लगे हैं, जिसमें युद्ध के तरीके के रूप में भूखमरी का उपयोग करना शामिल है। नेतन्याहू की हंगरी यात्रा के दौरान, हंगरी ने ICC से हटने की घोषणा की, जिसे नेतन्याहू ने 'साहसिक और सैद्धांतिक निर्णय' के रूप में सराहा। ​

इजराइल के खिलाफ क्यों नहीं जा रहा हंगरी? क्या डरता है?

हंगरी और इजराइल के बीच मजबूत कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध हैं, लेकिन यह कहना कि हंगरी इजराइल से डरता है, पूरी तरह से सटीक नहीं होगा। हालांकि, कुछ प्रमुख कारणों से हंगरी इजराइल के पक्ष में झुकता हुआ दिखाई देता है। आइए जानते हैं विस्तार से...

1. विक्टर ओर्बान और नेतन्याहू की घनिष्ठ मित्रता

हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच करीबी व्यक्तिगत और राजनीतिक संबंध हैं। दोनों नेता दक्षिणपंथी विचारधारा के समर्थक हैं और यूरोप तथा मध्य-पूर्व में वामपंथी और उदारवादी शक्तियों के प्रभाव का विरोध करते हैं। ओर्बान की कई नीतियां इजराइल की सुरक्षा नीतियों से मेल खाती हैं, और वह बार-बार नेतन्याहू का समर्थन करते आए हैं।

2. यूरोपीय संघ में इजराइल के समर्थन की नीति

हंगरी यूरोपीय संघ (EU) में इजराइल के प्रमुख समर्थकों में से एक है। जबकि कई EU देश फिलिस्तीन के पक्ष में अधिक सहानुभूति रखते हैं, हंगरी बार-बार इजराइल के विरुद्ध प्रस्तावों को रोकता रहा है। ओर्बान की सरकार ने इजराइल की आलोचना करने वाले EU प्रस्तावों को कई बार वीटो किया है।

3. यहूदी विरोधी छवि से बचने की कोशिश

हंगरी पर अक्सर यहूदी विरोधी नीतियों (Anti-Semitism) को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। अतीत में ओर्बान की सरकार ने यहूदी निवेशकों, विशेष रूप से अमेरिकी-हंगेरियन अरबपति जॉर्ज सोरोस के खिलाफ अभियान चलाया था। इससे हंगरी की अंतरराष्ट्रीय छवि खराब हुई थी। इजराइल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने से ओर्बान सरकार इस यहूदी विरोधी छवि को सुधारने की कोशिश करती है।

4. इजराइल से रक्षा और साइबर सुरक्षा सहयोग

हंगरी और इजराइल के बीच सुरक्षा और सैन्य सहयोग बहुत मजबूत है। हंगरी इजराइल से उन्नत ड्रोन, साइबर सुरक्षा तकनीक, और सैन्य उपकरण खरीदता है। इजराइल की जासूसी तकनीक (जैसे पेगासस स्पाइवेयर) का उपयोग करने वाले देशों में हंगरी भी शामिल था। इसलिए हंगरी को इजराइल की सुरक्षा तकनीकों की जरूरत है।

5. अमेरिका और इजराइल का दबाव

इजराइल का सबसे बड़ा सहयोगी अमेरिका है, और हंगरी की सरकार अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना चाहती है। अगर हंगरी इजराइल विरोधी रुख अपनाता है, तो उसे अमेरिकी कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।

6. इजराइल के खिलाफ ICC वारंट का विरोध

ICC (अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय) ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। हंगरी ने इजराइल का समर्थन करते हुए ICC से हटने की घोषणा कर दी। इस कदम से यह साफ़ हो जाता है कि हंगरी इजराइल के हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

हंगरी का यह कदम यूरोपीय संघ के भीतर विवाद का विषय बन सकता है, क्योंकि अधिकांश सदस्य देश ICC का समर्थन करते हैं। मानवाधिकार संगठनों ने इस निर्णय की आलोचना की है, इसे वैश्विक मानवाधिकार मानकों को कमजोर करने वाला बताया है। ​इस प्रकार, हंगरी का ICC से हटने का निर्णय और नेतन्याहू की भूमिका अंतरराष्ट्रीय न्याय और कूटनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं, जिनके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।​

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हंगरी की ICC से वापसी की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ती है, और क्या अन्य देश भी इसी रास्ते पर चलेंगे।

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