हाइटेक स्टूडियो और एडवांस मीडिया टेक्नोलॉजी वाला आईएसआईएस
लंदन। आईएसआईएस के आतंकी जेहादी जॉन के मारे जाने की पुष्टि मंगलवार को आईएसआईएस ने अपनी मैगजीन में की। यह पहली बार नहीं था जब आईएसआईएस इस तरह से किसी मीडिया का सहारा लेकर दुनिया से मुखातिब हुआ हो या फिर उसने किसी बात की जानकारी दुनिया को दी हो।
इससे पहले भी आईएसआईएस ने कई बार कभी ऑनलाइन मैगजीन तो कभी सोशल मीडिया का सहारा लिया।
आईएसआईएस दुनिया का शायद एक ऐसा संगठन है जिसके पास एक पूरा मीडिया हाउस है। एक ऐसा मीडिया हाउस जिसमें मैगजीन से लेकर न्यूज चैनल और खुद का एफएम चैनल भी है। जल्द आईएसआईएस सीरिया के होम्स में अपना एक सिनेमाहॉल भी खोलने की तैयारी में है।
यह बात और भी हैरान करने वाली है क्योंकि अभी तक आईएसआईएस के एडवांस वेपेन सिस्टम के बारे में ही लोगों को मालूम था लेकिन अब यह मजबूत मीडिया विंग दुनिया के होश उड़ाने को काफी है।
आइए आज आपको आईएसआईएस के इसी मजबूत मीडिया विंग के बारे में बताते हैं। एक ऐसा मीडिया विंग जिसमें कई बिलियन डॉलर आईएसआईएस ने इनवेस्ट किए हैं।

पॉपुलैरिटी का तरीका
आईएसआईएस ने वर्ष 2014 में जैसे-जैसे अपनी गतिविधियों को बढ़ाना शुरू किया वैसे-वैसे उसने कई भाषाओं में अपना पब्लिकेशन और जानकारी को ब्रॉडकास्ट करना शुरू किया। इसके जरिए आईएसआईएस दुनियाभर में अपनी पहुंच को मजबूत करना चाहता था।

सात मीडिया ऑउटलेट्स
इजिप्ट के एक रिसर्चर सबरा-अल-कासिम की मानें तो आईएसआईएस ने करीब तीन बिलियन डॉलर का बजट अपनी मीडिया एक्टिविटीज के लिए रखा है। कासिम के मुताबिक आईएसआईएस के पास सात मीडिया आउटलेट्स हैं जिनके जरिए लोगों को चरमपंथी धारा की ओर मोड़ने की कोशिशें की जाती हैं।

रेडियो से लेकर मैगजीन तक
आईएसआईएस के पास इस समय अजनाद, अल-फुकरान, अल-इतिसाम, अल हयात, माकातिब अल-वेलायात, अल बायान रेडिया, दाबिक मैगजीन के साथ ही इराक और सीरिया के हर प्रांत में मीडिया ऑफिस मौजूद हैं।

सबसे पॉपुलर
आईएसआईएस की ऑनलाइन मैगजीन दाबिक संगठन की सबसे पॉपुलर मीडिया विंग है। इस वेबसाइट पर संगठन ने 500 मिलियन डॉलर की रकम इनवेस्ट की है। आईएसआईएस दाबिक को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए तेजी से प्रयोग करता है।

सबसे हाइटेक
आईएसआईएस के पास इस समय अपना एक हाइटेक अजनाद स्टूडियो है। हाई क्वालिटी साउंड रिकॉर्डिंग टेक्नोलॉजी वाले इस स्टूडियों को एक बिलियन डॉलर से तैयार किया गया है। आईएसआईएस के पास इस समय इतने एडवांस कैमरा हैं कि उन्हें किसी कार या गाड़ियों पर इंस्टॉल करके कुछ भी शूट किया जा सकता है।

अल कायदा की मिली मदद
आईएसआईएस ने करीब 2 00 मिलियन डॉलर की रकम अपनी एक फाउंडेशन 'अल फुरकान' पर खर्च की है। यह ऑर्गनाइजेशन आईएसआईएस की सेकेंड मीडिया विंग है। इसकी शुरुआत कई वर्षों पहले अल कायदी की मदद से की गई थी। लेकिन फिर यह आईएसआईएस के कब्जे में चली गई।

500 मिलियन डॉलर वाली मीडिया
आईएसआईएस का अल इतिसाम चैनल इस संगठन की तीसरी मीडिया विंग है जिसे 500 मिलियन डॉलर की रकम के साथ तैयार किया गया। सिर्फ इतना ही इराक और सीरिया में इस न्यूजचैनल के पास अपने रिपोर्ट्स मौजूद हैं जो आईएसआईएस की फील्ड एक्टिविटीज की जानकारी दुनिया को देते हैं।

आईएसआईएस की क्रूरता का सुबूत
अल हयात आईएसआईएस की वह मीडिया सेंटर है जिस पर 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रकम इनवेस्ट की गई है। अल हयात आईएसआईएस के प्रमुखों का इंटरव्यू करती है। यही वह चैनल है जिस पर आपको आईएसआईएस के सभी अपराधों और उसकी क्रूरता के सुबूत मिलते हैं। अल हयात ने ही 21 इजिप्शियन क्रिश्चियंस के सिर कलम करने की घटना को दिखाया था।

पांचवां मीडिया
आईएसआईएस ने 200 मिलियन डॉलर की रकम माकातिब अल-वेलायत में निवेश की है। यह चैनल आईएसआईएस के कब्जे वाले हिस्से में रह रहे लोगों के बीच संगठन से जुड़ी बातों का टेलीकास्ट करता है।

100 मिलियन डॉलर
आईएसआईएस के प्रपोगेंडा को इराक के मोसुल और दूसरे इलाकों समेत सीरिया में टेलीकास्ट करने की जिम्मेदारी अल बयान रेडियो पर है। इंटरनेट पर भी आईएसआईएस का कंटेंट इसी रेडियो नेटवर्क की वजह से टेलीकास्ट होता है। इस पर आईएसआईएस ने 100 मिलियन डॉलर इनवेस्ट किए हैं।

कहीं भी पीछे नहीं है संगठन
इन सात आउटलेट्स के अलावा ट्विटर और फेसबुक पर भी इस संगठन के करीब 90,000 पेज मौजूद हैं। इनसे साफ है कि आईएसआईएस कितना मजबूत हो चुका है।

युवाओं को संगठन के लिए आकर्षित करना
आईएसआईएस के इन सभी सातों मीडिया आउटलेट्स का मकसद दुनिया भर के युवाओं का चरमपंथ के लिए आकर्षित करना है। साथ ही इनके जरिए ज्यादा से ज्यादा युवाओं को संगठन में शामिल करना आईएसआईएस का सबसे अहम लक्ष्य है।

टर्की से मिलती है मदद
जितनी भी रिसर्च इस विषय पर की गई हैं, उनसे साफ होता है कि आईएसआईएस अपने मीडिया ऑपरेशंस के लिए जरूरी हाइटेक उपकरणों को खरीदने में सबसे ज्यादा पैसा खर्च करता है। ये दावे भी किए जाते है कि टर्की जैसे देश इस मकसद में आईएसआईएस की मदद करते हैं।
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