अब जर्मनी में बसे नाबालिगों पर है आईएसआईएस की नजरें

म्‍यूनिख। शुक्रवार को जर्मनी के शहर म्‍यूनिख में हुई घटना यूरोप पर आने वाले संकट के बारे में शायद एक इशारा करती है। म्‍यूनिख के एक शॉपिंग कॉम्‍पलेक्‍स में यह हमलावर दाखिल होता है और दनादन फायरिंग करने लगता है।

इस हमले में हमलावर समेत 10 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। फिलहाल पुलिस को इस बात की जानकारी नहीं है कि यह हमलावर आईएसआईएस से जुड़ा था या नहीं।

इससे पहले जर्मनी की एक लोकल ट्रेन में 17 वर्ष के अफगान रिफ्यूजी ने कुल्‍हाड़ी से लोगों पर हमला किया था। इस हमले में चार लोग जख्‍मी हो गए थे। इस हमले के बाद आईएसआईएस ने वीडियो जारी कर हमले की जिम्‍मेदारी ली थी।

दोनों ही हमलों के बाद अब जर्मनी में मौजूद रिफ्यूजियों के बारे में फिर से सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि आईएसआईएस इन रिफ्यूजियों को प्रभावित कर बड़ी साजिश को अंजाम दे सकता है।

आगे की स्‍लाइड्स पर नजर डालिए कि आखिर कैसे जर्मनी में रिफ्यूजी आईएसआईएस के लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

सबसे ज्‍यादा नाबालिग रिफ्यूजी

सबसे ज्‍यादा नाबालिग रिफ्यूजी

जर्मनी की सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2016 तक अकेले जर्मनी पहुंचे नाबालिगों की संख्या 60 हजार से ज्यादा है। इनमें से अधिकतर की उम्र 16 या 17 बताई जाती है।

शरण के लिए सबसे कितने आवेदन

शरण के लिए सबसे कितने आवेदन

शरणार्थियों के लिए जिम्मेदार सरकारी विभाग के अनुसार वर्ष 2015 में ही नाबालिगों की ओर से जर्मनी में शरण लेने के लिए 14 हजार 500 आवेदन आ चुके हैं. 2014 की तुलना में यह संख्या तिगुनी से भी ज्यादा है।

सबसे ज्‍यादा नाबालिग शरणार्थी कहां से

सबसे ज्‍यादा नाबालिग शरणार्थी कहां से

वर्ष 2015 के आंकड़ों के मुताबिक अफगानिस्तान, सीरिया, इरिट्रिया, इराक और सोमालिया से सबसे ज्‍यादा आवेदन आए हैं। हर तीसरा आवेदन अफगानिस्तान के नाबालिगों का है।

आतंकियों की नजरें नाबालिगों पर

आतंकियों की नजरें नाबालिगों पर

जर्मनी की खुफिया एजेंसी के अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया है कि करीब 300 ऐसे मामलों की जानकारी है, जहां कट्टरपंथियों ने शरणार्थी शिविरों में रह रहे युवाओं से संपर्क साधने की कोशिश की है।

रिफ्यूजियों की काउं‍सलिंग

रिफ्यूजियों की काउं‍सलिंग

शरणार्थियों और उत्पीड़न के शिकार लोगों की मदद के लिए एक सेंटर चलाने वाले एक व्‍यक्ति का कहना है कि पिछले एक साल में कम से कम 180 नाबालिग रिफ्यूजियों को मनोवैज्ञानिकों के पास भेज उनकी काउंसलिंग कराई गयी है।

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