Science News: मंगल ग्रह का कैसे हुए था निर्माण, धरती पर 200 साल पहले गिरे उल्कापिंड ने खोले राज

चेसिंगी उल्कापिंड पर किए गये नए रिसर्च से पता चलता है कि, मंगल का आंतरिक रासायनिक मेकअप बड़े पैमाने पर उल्कापिंडों के टकराव से बना है।

लंदन, जून 20: ब्रह्मांड का रहस्य जानने के लिए हमारे वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं और मंगल ग्रह का निर्माण कैसे हुआ था, इसे समझने में वैज्ञानिकों को बहुत बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। मंगल ग्रह का राज खोलने वाला यह रहस्य इसलिए भी इंसानों के लिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि इंसानों ने मंगल ग्रह पर जीवन बसाने का लक्ष्य रखा हुआ है और एलन मस्क जैसे विश्व के सबसे अमीर कारोबारी इस दिशा में भविष्यवाणी भी कर चुके हैं।

उल्कापिंड ने खोले मंगल के राज

उल्कापिंड ने खोले मंगल के राज

आज से करीब 200 साल पहले पृथ्वी से एक उल्कापिंड टकराया था और उस वक्त चूंकी विज्ञान ने इतनी प्रगति नहीं की थी, इसीलिए, ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई। लेकिन, अब यह उल्कापिंड हमारी समझ को मौलिक रूप से बदल सकता है कि मंगल का निर्माण कैसे हुआ। लाल ग्रह के आंतरिक भाग के बारे में हम जो कुछ जानते हैं, वो हमें तीन अंतरिक्ष चट्टानों से मिली है, जो मंगल ग्रह से टकराने के बाद हमारे ग्रह पर गिर गये थे। इनमें चेसिंगी उल्कापिंड शामिल है, जो 1815 में उत्तर-पूर्वी फ्रांस में अंतरिक्ष से गिर गया था। वहीं, बाकी के दो उल्कापिंडो को शेरगोटी और नखला के नाम से जाना जाता है।

चेसिंगी उल्कापिंड पर रिसर्च

चेसिंगी उल्कापिंड पर रिसर्च

चेसिंगी उल्कापिंड पर किए गये नए रिसर्च से पता चलता है कि, मंगल का आंतरिक रासायनिक मेकअप बड़े पैमाने पर उल्कापिंडों के टकराव से बना है, न कि गैस के एक विशाल बादल से जिसे सौर नेबुला कहा जाता है, जैसा कि पहले सोचा गया था। यह खोज वैज्ञानिकों की मंगल ग्रह को लेकर वर्तमान सोच को खारिज करता है, कि कैसे पृथ्वी और मंगल जैसे चट्टानी ग्रह हाइड्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन जैसी अस्थिर गैसों से बनी है। इंसानों के लिए मंगल ग्रह काफी दिलचस्पी का विषय रहा है, क्योंकि यह अपेक्षाकृत जल्दी बना था, और सौर मंडल के बनने के लगभग 40 लाख सालों में जम गया, जबकि पृथ्वी को बनने में 50 करोड़ से 100 करोड़ साल का वक्त लगा।

नेबुला से नहीं बना था मंगल ग्रह!

नेबुला से नहीं बना था मंगल ग्रह!

वैज्ञानिकों ने पहले सोचा था कि नव-निर्मित दुनिया ने पहले इन वाष्पशील पदार्थों को एक युवा तारे के चारों ओर नेबुला से एकत्र किया था और फिर ये तत्व पिघल कर मैग्मा महासागर का निर्माण किया और फिर वायुमंडल में वापस लौट आया, जबकि ग्रह अभी भी पिघली हुई चट्टान की एक गेंद है। अभी तक की थ्योरी के मुताबिक, इस नये बने युवा ग्रह से चोंड्रिटिक उल्कापिंड टकराए थे, जिससे अस्थिर तत्वों का निर्माण हुआ। अभी तक माना जाता है कि, मंगल ग्रह के आंतरिक भाग मे जो वाष्पशील तत्व मौजूद हैं, वो सोलर नेबुला, सौर उल्कापिंड का वाष्पशील मिश्रण होना चाहिए, जबकि वायुमंडल में वाष्पशील पदार्थ ज्यादातर उल्कापिंडों से आएं हैं। वैज्ञानिकों की ये सोच चेसिंगी में पहले किए गये रिसर्च से बनी थी, जिसके मुताबिक, जेनॉन गैस का आइसोटोप माना गया, जो रासायनिक रूप से निष्क्रिय गैस है, जो लाखों सालों तक अपरिवर्तित रह सकती है।

चेसिंगी पर नये रिसर्च में क्या पता चला?

चेसिंगी पर नये रिसर्च में क्या पता चला?

चेसिंगी उल्कापिंड पर जो नया रिसर्च किया गया है, उसके मुताबिक, इसके आइसोटोप अनुपात मंगल के वायुमंडल और सौर निहारिका दोनों से मेल खाता प्रतीत होता है, जिसके कारण यह धारणा बनी कि इसके वाष्पशील तत्व, जैसे हाइड्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन, सौर नेबुला से आए और बाकी तत्व उल्कापिंडों से बाद में पहुंचे। हालांकि, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, डेविस के शोधकर्ताओं ने इस नये अध्ययन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने चेसिंगी के एक नमूने का विश्लेषण किया लेकिन इस बार क्रिप्टन के समस्थानिकों को देखा - जो एक अलग प्रकार की अक्रिय गैस है, जो अधिक सटीक माप की अनुमति देती है।

मंगल पर जीवन बसाना चाहते हैं एलन मस्क

मंगल पर जीवन बसाना चाहते हैं एलन मस्क

साल 2016 में सबसे पहली बार एलन मस्क ने मंगल ग्रह पर इंसानों के रहने के लिए कॉलोनी बनाने की घोषणा की थी और उन्होंने दावा किया था, कि साल 2024 तक उनका क्रू मिशन मंगल ग्रह पर अपना कदम रखने में कामयाब हो जाएगा। एलन मस्क ने अपने मिशन को पूरा करने की दिशा में काफी मेहनत किए हैं और कई मंगल ग्रह पर रॉकेट भेजने के लिए कई कोशिशें की गईं, लेकिन एक भी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई है। लिहाजा, अब जब साल 2022 की शुरूआत हो चुकी है और मस्क की 'तारीख' के दो साल ही बचे हैं, अब मंगल ग्रह पर तय समय में पहुंचना नामुमकिन लग रहा है। लिहाजा अब एलन मस्क ने ट्वीटर पर खुद ही नई तारीख का ऐलान कर दिया है।

साल 2029... नई भविष्यवाणी

साल 2029... नई भविष्यवाणी

एलन मस्क ने ट्वीटर पर एक यूजर के सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि, मंगल ग्रह पर इंसान अपना पहला कदम कम से कम साल 2029 तक ही रख पाएगा। यानि, ये दूसरा मौका है, जब एलन मस्क ने मंगल ग्रह पर इंसानों के पहुंचने को लेकर तारीख बदल दी है। इससे पहले साल 1969 में पहली हार इंसानों ने चंद्रमा पर कदम रखा था और एलन मस्क अगर 2029 में मंगल ग्रह पर किसी इंसान को भेजने में कामयाब हो जाते हैं, तो चंद्रमा पर कदम रखने के 60 सालों के बाद इंसान मंगल ग्रह पर कदम रखेगा। आपको बता दें कि, नासा के वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर भेजने के लिए एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स 'स्टारशिप' की डिजाइन कर रहा है।

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