Japan Currency: रसातल में पहुंचा जापानी रुपया.. 10 प्वाइंट में समझिए क्या आर्थिक संकट में फंस रहा है देश?
Japan's yen hit a historic low: जापान पिछले कुछ सालों से काफी कम आर्थिक वृद्धि दर दर्ज कर रहा है, लेकिन उसकी करेंसी लगातार नीचे जा रही है। जापान का मुद्रा, डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है।
लिहाजा, सवाल उठने लगे हैं, कि क्या जापान किसी आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रहा है? आइये 10 प्वाइंट में समझने की कोशिश करते हैं, कि जापान मुद्रा के पतन का क्या कारण है।

1- प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले जारी गिरावट के बीच सोमवार को जापानी मुद्रा येन, डॉलर के मुकाबले 160 के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो अप्रैल 1990 के बाद से इसका सबसे कमजोर प्वाइंट है।
2- सोमवार को जापानी मुद्रा अपने सबसे कमजोर प्वाइंट पर पहुंच गया और 1.2 प्रतिशत की और गिरावट के साथ ये 160.17 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में यह 159.17 पर स्थिर हो गया, क्योंकि निवेशकों ने आगामी फेडरल रिजर्व बैठक से पहले मंदी की स्थिति को भांप लिया था।
3- जब से बैंक ऑफ जापान ने मार्च में अपनी नकारात्मक ब्याज दर नीति को बंद किया है, येन लगातार डॉलर के मुकाबले 150 या उससे कम के आसपास बना हुआ है।
4- वर्तमान में, 1 जापानी येन 0.52 रुपये के बराबर है, जो येन के लिए 67 प्रतिशत की भारी गिरावट को दर्शाता है।
5- जापानी येन संयुक्त राज्य अमेरिका डॉलर और यूरो के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे ज्यादा कारोबार वाली मुद्रा है।
6- येन की गिरावट 171 प्रति यूरो से ज्यादा हो गई, जो 1999 में यूरो की स्थापना के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है।
7- येन की वैल्यू में आ रही लगातार गिरावट जापान की अर्थव्यवस्था में विश्वास पर इसके संभावित प्रभाव पर चिंताएं बढ़ रही हैं। ऐसा माना जा रहा है, कि जापान से निवेशकों का विश्वास उठ सकता है और जापान से पैसे निकालकर अमेरिका में निवेश और बढ़ सकता है।
8- येन का इतिहास 1868 में मीजी बहाली से मिलता है, जब नई सरकार ने आधुनिक मौद्रिक प्रणाली अपनाने का फैसला किया था। येन को आधिकारिक तौर पर 1871 में मोन पर आधारित सिक्कों की पिछली जटिल प्रणाली की जगह जापान की मुद्रा के रूप में पेश किया गया था।
9- येन को आरक्षित मुद्रा के रूप में प्रमुखता मिली, खासकर 1980 और 1990 के दशक की शुरुआत में, जब जापान की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही थी। हालांकि, 1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक बुलबुले के फूटने से लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता बनी रही, जिसे "लॉस्ट डिकेड" के रूप में जाना जाता है, जिसने येन की स्थिति को कुछ हद तक प्रभावित किया था।
10- 1971 में जापान का स्वर्ण मानक से हटना एक महत्वपूर्ण क्षण था, जिससे येन को अन्य मुद्राओं के मुकाबले एक अस्थायी एक्सचेंज रेट अपनाने की अनुमति मिली।












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