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सिक्योरिटी, ट्रेड, बिजनेस और एजुकेशन.. अफ्रीकी देशों में धड़ाधड़ समझौते, भारत ने कैसे चीन को पछाड़ा?

India China in Africa: आज 25 मई है और आज अफ्रीका दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन साल 1963 में अफ्रीकी एकता संगठन का निर्माण किया गया था, जो जुलाई 2002 में अफ्रीकी संघ में बदल गया। हालांकि, अफ्रीका ने लगातार शांति और सुरक्षा के लिए चुनौतियों का सामना किया है और ये हमेशा से बाहरी समर्थन पर निर्भर रहा है।

अफ्रीका यूनियन शांति और सुरक्षा के लिए हमेशा पांच स्तंभों पर निर्भर रहा है, लेकिन इन स्तंभों में समुद्री संकट से निपटने के लिए कार्ययोजना का अभाव है। जिससे पता चलता है, कि अफ्रीकी देशों को लगता है, कि वो समुद्री खतरों से कम, बल्कि उनके लिए आंतरिक खतरे ज्यादा हैं।

India China in Africa

लेकिन, 21वीं सदी के पहले दशक में अदन की खाड़ी के आसपास, खास तौर पर सोमिलिया के समुद्री इलाकों में डकैती घटनाओं में भारी इजाफा हुआ और इन इलाकों में व्यापारिक जहाजों को बुरी तरह से निशाना बनाया गया। लिहाजा, समुद्री डकैतों ने अफ्रीकी देशों की शांति और सुरक्षा में समुद्री सुरक्षा के अभाव को बुरी तरह से उजागर किया। हालांकि, बाद में समुद्री डकैतों पर नियंत्रण पा लिया गया और धीरे धीरे इंडो-पैसिफिक, अब इस क्षेत्र में सिक्योरिटी आर्किटेक्चर के लिए प्राथमिक ढांचा बन गया है।

भारत, जापान और फ्रांस जैसे देशों ने अपनी इंडो-पैसिफिक नीतियों को पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका के तटों तक बढ़ाया है। खासकर भारत ने इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने में काफी दिलचस्पी दिखाई है।

इंडो-पैसिफिक नीति के लिए कैसे अहम बना अफ्रीका?

अफ्रीका में जहां जापान का जिबूती में एक बेस है, वहीं फ्रांस की जिबूती और उसके दक्षिणी हिंद महासागर द्वीपों में बेस के साथ ज्यादा मजबूत मौजूदगी है। भारत ने फ्रांस और जापान, दोनों के साथ अपने संबंध बनाए हैं और इस पूरे क्षेत्र में लगातार अपनी मौजूदगी को मजबूत किया है।

परंपरागत रूप से, भारत की नौसैनिक तैनाती मॉरीशस और सेशेल्स से जुड़ी रही है, जिसका विस्तार मेडागास्कर तक था। अब, भारत के तट पर स्थित देशों के साथ अधिक मजबूत संबंध हैं, भारतीय जहाज अक्सर सद्भावना मिशन पर उनके बंदरगाहों का दौरा करते हैं।

कोविड महामारी के दौरान, भारतीय जहाजों ने लाल सागर तक तटीय देशों को भोजन और चिकित्सा सहायता प्रदान की। भारत की नौसैनिक उपस्थिति और मानवीय सहायता और आपदा राहत पर जोर, इस क्षेत्र में अमूल्य है।

लिहाजा, भारत ने अपन इंडो-पैसिफिक प्रोग्राम में अफ्रीका को काफी प्राथमिकता दी है और अफ्रीकी देशों के साथ क्षेत्रीय और द्विपक्षीय संबंध को मजबूत करने पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2018 में जब युगांडा की संसद में भाषण दिया था, तो उन्होंने भारत और अफ्रीकी देशों के बीच के संबंध को और मजबूत करने का वादा किया था।

भारत के पूर्व राजदूत गुरजीत सिंह, जो जर्मनी, इंडोनेशिया, यूथोपिया, आसियान और अफ्रीकी यूनियन चेयर के राजदूत रह चुके हैं, उन्होंने यूरेशियन टाइम्स में लिखे एक लेख में कहा है, कि "इंडो-पैसिफिक (IP) में भारत के बढ़ते महत्व को देखते हुए, हमारी अफ्रीका नीति ने आईपी नीति को समायोजित करना शुरू कर दिया। क्षेत्रीय स्तर पर, भारत ने हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) के माध्यम से काम किया और अक्टूबर 2023 में आईपी दृष्टिकोण को स्पष्ट करने में इसके उपाध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।"

भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है अफ्रीका?

हिंद महासागर, आर्थिक और रणनीतिक आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिसके लिए IORA सदस्य देशों से शांति और सामान्य कार्रवाई की आवश्यकता है। लगभग सभी अफ्रीकी तटीय देशों सहित 23 देशों के पास, अब एक क्षेत्रीय रूप से स्वीकृत ढांचा है, जो भारत के SAGAR प्रोग्राम पर आधारित है, जो इसकी आईपी नीति में शामिल है।

भारत लगातार IORA को आर्थिक विकास और समृद्धि के साथ साथ क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखता है। 2015 शिखर सम्मेलन में अफ्रीका के साथ इन विषयों पर भी चर्चा की गई थी। हाल ही में, समुद्री सुरक्षा, सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी पर भी भारत ने काफी जोर दिया है। समुद्री डकैती, नशीली दवाओं का कारोबार, अवैध प्रवास और समुद्री प्रदूषण जैसे गैर-पारंपरिक खतरे उभरे हैं और समुद्री सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए क्षेत्रीय देशों के साथ भारत की भागीदारी अब काफी तेज हो गई है।

भारत ने रणनीतिक तौर पर अफ्रीकी देशों के साथ बातचीत काफी बढ़ा दी है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2023 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में इथियोपियाई और दक्षिण अफ्रीकी नेताओं से मुलाकात की थी। इसके अलावा, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रमंडल और एनएएम शिखर सम्मेलन के लिए रवांडा और युगांडा का दौरा किया। वहीं, तंजानिया और केन्या के राष्ट्रपतियों ने भारत का दौरा किया और मोज़ाम्बिक के राष्ट्रपति ने वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन में भाग लिया।

वहीं, भारत ने मोजाम्बिक के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश के साथ-साथ प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराने की इच्छा के साथ मोजाम्बिक के साथ रक्षा सहयोग तेज कर दिया है। वहीं, तंजानिया और केन्या के साथ समुद्री सुरक्षा और सहयोग पर संयुक्त बयानों ने द्विपक्षीय सहयोग के विस्तार के लिए रूपरेखा तैयार की है। वहीं, इथियोपिया भी भारत के साथ इसी तरह का सहयोग चाहता है।

इसके अलावा, भारत ने इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया सहित अफ्रीका में 18 नए दूतावास खोले हैं। इथियोपिया, जिबूती, तंजानिया, मोज़ाम्बिक और रवांडा में रक्षा अताशे के नए पदों को भी भारत ने मंजूरी दी है, जिसमें दक्षिण अफ्रीका और केन्या में मौजूदा पद भी शामिल हैं। इस फैसले का मकसद पूरे हिंद महासागर में राजनीतिक और सुरक्षा जुड़ाव को बढ़ाना है।

अफ्रीकी देशों को सैन्य सामानों का निर्यात

इसके अलावा, भारत ने अफ्रीकी देशों की सेनाओं को मजबूत करने के लिए रक्षा उपकरणों के निर्यात को काफी बढ़ावा दिया है, खासकर ऐसे देशों को, जिनकी क्षमता सीमित है। भारत ने कमजोर सुरक्षा वाले देशों को समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी उपकरण मुहैया करवाए हैं।

इंडो-पैसिफिक और अफ्रीका में अमेरिका और चीन के बीच का द्वंद भी जारी रहता है।

जिबूती में अमेरिका, चीन, फ्रांस और जापान के अड्डे हैं, लेकिन अमेरिकी जहाज लाल सागर और अन्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। कभी सोमाली समुद्री डकैती के खिलाफ सक्रिय रहने वाली यूरोपीय नौसेनाएं अब कम नजर आ रही हैं, क्योंकि अब इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के जहाज सबसे ज्यादा दिखाई दे रहे हैं।

जो भारत की SAGAR, IORA और इंडो-पैसिफिक नीतियों में अफ्रीका के लिए भारत की प्राथमिकता को दर्शाती है।

मॉरीशस, सेशेल्स और मेडागास्कर के साथ भारत के संबंध काफी मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के संबंध भारत के मुकाबले चीन-रूस धूरी से ज्यादा हैं, क्योंकि दक्षिण अफ्रीका इन देशों की मदद से अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारना चाहता है।

लेकिन, मोज़ाम्बिक, तंजानिया, केन्या, युगांडा और रवांडा के साथ भारत के कारोबारी संबंध लगातार आगे बढ़ रहे हैं। भारत ने इन देशों में अपने FDI को तेजी से बढ़ाया है।

अफ्रीका में एजुकेशन सेक्टर पर भारत का ध्यान

अफ्रीकी देशों के एजुकेशन सेक्टर में भी भारत ने लगातार निवेश किया है और इस कड़ी में महत्वपूर्ण मील का पत्थर तंजानिया के जांजीबार में पहला IIT खोलना है। वहीं, भारत ने युगांडा में एक फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय और रवांडा में एक उद्यमिता विकास केंद्र खोला है। ये भारत के रणनीतिक कदम है, ताकि अफ्रीकी देशों के युवाओं को भारत के साथ कनेक्ट किया जाए।

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