विश्व के अन्य पांच बड़े प्रजातंत्र में कैसे होता है चुनाव? भारत का चुनाव आयोग और कहां कहां करा चुका है चुनाव?
Indian Election News: भारतीय चुनाव आयोग ने आगामी लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा आज दोपहर 3 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर दी है।
भारत के चुनावों की विशालता को देखते हुए, मतदान एक निश्चित समयावधि में कई चरणों में होता है। लिहाजा, चुनाव आयोग चुनाव आज एक विस्तृत चुनावी कार्यक्रम की घोषणा करेगा, और बताएगा, कि देश में प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में कब मतदान होगा।

साल 2019 में भारत में 39 दिनों (4 अप्रैल से 19 मई) तक चुनाव चला था, जिसमें 7 चरणों में मतदान हुआ था। चुनावी तारीखों के साथ साथ आज चुनाव आयोग मतगणना के दिन की भी घोषणा करेगा, जिसके बारे में आमतौर पर माना जाता है, कि ये आखिरी चुनाव खत्म होने जाने के 2 से चार दिनों में हो जाएगा।
भारत आज चुनावी उत्सव में प्रवेश कर रहा है। लिहाजा, आइये जानते हैं, कि विश्व के पांच सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश कौन कौन हैं और उन देशों में कैसे चुनाव करवाए जाते हैं। इसके अलावा हम अपने इस लेख में ये भी जानेंगे, कि भारतीय चुनाव आयोग ने अभी तक किन किन देशों में चुनाव करवाए हैं।
यहां ये भी ध्यान रखना जरूरी है, कि चुनाव के मामले में भारत में विश्व का सबसे बड़ा चुनाव होता है, जबकि उसके बाद निष्पक्षता और लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया के मामलों में बाकी देशों का नाम आता है।
अमेरिका में होता है राष्ट्रपति चुनाव
भारत के साथ साथ इस साल अमेरिका में भी चुनाव होने वाला है। हालांकि, भारत में संसदीय व्यवस्था है, जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव प्रणाली है। अमेरिका में मुख्य तौर पर दो पार्टियां हैं, डेमोक्रेट और रिपब्लिकन।
चुनाव प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर चुनावी वर्ष की शुरुआत में ही शुरू हो जाती है, जब प्रत्येक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। अंतिम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर फैसला लेने के लिए प्राइमरी और कॉकस होते हैं। कॉकस में, पार्टी के सदस्य चर्चाओं और वोटों के जरिए पसंदीदा उम्मीदवार का चयन करते हैं, जबकि प्राइमरी में, पार्टी के सदस्य आम चुनाव के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार के लिए वोट करते हैं।
सितंबर और अक्टूबर महीने में, दोनों पार्टियों के उम्मीदवार एक-दूसरे के साथ एक टीवी कार्यक्रम में बहस में भाग लेते हैं, जो विभिन्न नीतियों और मुद्दों पर आधारित होती हैं। नवंबर की शुरुआत में, अमेरिका के सभी 50 राज्यों के लोग अपने पसंदीदा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और उनके रनिंग मेट यानि उप-राष्ट्रपति के लिए मतदान करते हैं।
इंडोनेशिया में है राष्ट्रपति व्यवस्था
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र और दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले मुस्लिम देश इंडोनेशिया में पिछले महीने ही मतदान हुए हैं और वहां करीब 20 करोड़ लोग राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। इंडोनेशिया के संविधान के मुताबिक, एक राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच सालों का होता है और एक नेता, सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।
इंडोनेशिया आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा इस्लामिक देश है, जहां करीब 27 करोड़ लोग रहते हैं और करीब 20 करोड़ 40 लाख लोगों के पास मत डालने का अधिकार है। इंडोनेशिया में चुनाव के दिन सरकारी छुट्टी रहती है। इंडोनेशिया में 18 राष्ट्रीय राजनीतिक दल हैं, जिनमें 575 संसदीय सीटें उपलब्ध हैं। नए राष्ट्रपति को चुनने के साथ-साथ, इंडोनेशियाई लोग सांसदों के लिए भी मतदान करेंगे, जो दुनिया का सबसे बड़ा एक दिन में होने वाला चुनाव होता है।
हालांकि, इंडोनेशिया में आम चुनाव के बाद गहन सांसदों की भारी खरीद-फरोख्त होती है, जो देश की प्रमुख कानून बनाने वाली संस्था, संसद के निचले सदन और राष्ट्रपति के साथ इसके संबंधों को निर्धारित करती है। लिहाजा, इंडोनेशिया का चुनाव भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड बना डालता है। राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे के आधार पर, राजनीतिक दल गठबंधन बदल सकते हैं, लिहाजा राष्ट्रपति का चुनाव दूसरे राउंड में भी चला जाता है।
ब्राजील में है राष्ट्रपति प्रणाली
ब्राजील का राष्ट्रपति चुनाव काफी हद तक अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से मेल खाता है और देश के करीब 12 करोड़ मतदाता राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। ब्राजील में भी कई राजनीतिक पार्टियां हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला कंजेर्वेटिव पार्टी और वामपंथी लेबर पार्टी के बीच होती है। ब्राजील की मौजूदा सरकार लेबर पार्टी की है।
ब्राजील में भारत की ही तरह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के जरिए मतदान होता है और 1996 में इस सिस्टम लागू किए जाने के बाद से धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला है। हालांकि, राजनीतिक पार्टियों के बीच चुनाव के दौरान भारी हिंसा होती रहती है। पूर्व राष्ट्रपति जैर बोल्सनारो ने अक्टूबर 2022 में हुए चुनाव में मिली हार के बाद समर्थकों को जुटने का आह्वान किया था, जिससे देश में गृहयुद्ध होने की आशंका बन गई थी। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ।
ब्रिटेन में होता है भारत की ही तरह चुनाव
ब्रिटेन का चुनावी प्रणाली बहुत हद तक भारत की ही तरह है और जिस तरह से भारत में लोकसभा के लिए सांसदों का चुनाव होता है, उसी तरह से ब्रिटेन में हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए सांसदों का चुनाव किया जाता है। ब्रिटेन की संसद में कुल 650 सांसद होते हैं, जिनमें से 553 सांसद इंग्लैंड से आते हैं, जबकि 59 सांसद स्कॉटलैंड से, 40 सांसद वेल्स से और 18 सांसद नॉर्दर्न आयरलैंड से आते हैं।
ब्रिटेन में भी पांच सालों पर आम चुनाव आयोजित किए जाते हैं और भारत की ही तरह जिस पार्टी के पास सबसे ज्यादा सांसद होते हैं, उसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इसके अलावा, अगर किसी पार्टी के पास बहुमत नहीं है, तो भारत की तरह ब्रिटेन में भी कई पार्टियां मिलकर गठबंधन सरकार का गठन कर सकती हैं।
ब्रिटेन की मुख्य पार्टियों में लेबर पार्टी, कंजर्वेटिव पार्टी, लिबरल डेमोक्रेट्स और स्कॉटिश नैशनल पार्टी शामिल हैं। इसके अलावा, ब्रिटेन में भी भारत की ही तरह 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के पास वोट देने का अधिकार होता है।
कनाडा में भी संसदीय व्यवस्था
कनाडा के इतिहास में 1867 से मतदान हो रहा है और कनाडा में मुख्य तौर पर दो ही दल हैं, जिनके बीच कड़ा मुकाबला होता है। कनाडा में भी हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए सांसदों का चुनाव किया जाता है, जिसमें 338 सीटें हैं और एक पार्टी को बहुमत हासिल करने के लिए 170 सीटों पर जीत की जरूरत होती है।
क्षेत्रफल के हिसाब से कनाडा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है, लेकिन उसकी आबादी सिर्फ साढ़े तीन करोड़ है। कनाडा में बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं और भारत की तरह, कनाडाई नागरिक भी सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करते हैं, बल्कि प्रधानमंत्री चुनने का काम जीते सांसदों का होता है। संसद का स्वरूप तय करता है, कि चुनाव कौन जीतेगा और सबसे ज्यादा सीटें हासिल करने वाली पार्टी सरकार बनाती है, और उसका नेता प्रधान मंत्री बनता है।
चुनाव आयोग ने किस देश में कराए हैं चुनाव?
भारतीय चुनाव आयोग अकसर निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए प्रशंसा बटोरता रहा है और दुनिया के कुछ ऐसे भी देश हैं, जहां भारतीय चुनाव आयोग ने चुनाव कराए हैं। इन देशों में एक देश सूडान है। जहां पहला आम चुनाव (1953) भारतीय चुनाव आयोग ने ही करवाए थे।
भारतीय इलेक्शन कमीशन अंतरराष्ट्रीय संस्थान इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (आईडीईए) स्टॉकहोम का भी संस्थापक सदस्य है।
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