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दुनिया को मानवाधिकार पर ज्ञान देने वाले US में कब खत्म होगी नस्लीय हिंसा? एक और अश्वेत की गला घोंटकर हत्या

US Black man's death: मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं..वो अश्वेत शख्स बार बार चिल्ला रहा था.. चीख रहा था, दर्द से कराह रहा था, लेकिन ओहिया की पुलिस वाले उसकी गर्दन को अपने घुटने से दबाए हुए थे। कुछ देर संघर्ष करने के बाद उस अश्वेत शख्स की मौत हो जाती है।

ये वो अमेरिका है, जो दुनियाभर को मानवाधिकार और लोकतंत्र को लेकर ज्ञान देता रहता है, लेकिन अपनी गिरहेबां के अंदर झांकने के लिए तैयार नहीं होता है, जहां हर दूसरे दिन किसी ना किसी अश्वेत शख्स को गोरे पुलिसवाले जान से मार देते हैं।

US Black man s death

ओहिया के कैंटन पुलिस अधिकारियों ने अश्वेत युवक फ्रैंक टायसन के गर्दन को घुटने से दबाकर मार डाला और 'मैं सास नहीं ले पा रहा हूं', ये रोंगटे खड़े कर देने वाले उसके आखिरी शब्द थे, और इस घटना ने जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की यादें ताजा कर दी हैं हैं, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे और उस मुद्दे को लेकर जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने आसमान सिर पर उठा लिया था।

मरने से पहले टायसन को पुलिस वाले बेरहमी ने पकड़े हुए होते हैं, वो जमीन पर गिरा होता है और पुलिसवाले का घुटना उसकी गर्दन पर होता है, जिसका दबाव लगातार बढ़ता होता है। अमेरिका में हर दूसरे दिन घटने वाली ये खतरनाक नस्लीय हिंसा है, लेकिन चूंकी इस बार ये डेमोक्रेटिक पार्टी के शासन के दौरान हुआ है, लिहाजा अमेरिका के वामपंथी लिबरल्स भी चादर ओढ़े सोए हुए हैं, क्योंकि अभी इस मुद्दे को उठाना, उनके एजेंडे में फिट नहीं बैठता है।

अमेरिका हो या भारत, कथित वामपंथी लिबरल्स उसी मुद्दे पर बोलते हैं, जो उनके एजेंडे में फिट बैठता हो।

फ्रैंक टायसन की मौत का मामला क्या है?

ओहियो पुलिस ने 53 साल के अश्वेत मृतक, फ्रैंक टायसन का वीडियो जारी किया है, जिसकी एक स्थानीय अस्पताल में बार-बार अधिकारियों से यह कहने के बाद मृत्यु हो गई, कि "मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं", क्योंकि उसके गर्दन को दबाकर रखा गया था और उसके हाथों को हथकड़ी से जकड़ दिया गया था।

वीडियो क्लिप, जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की डरावनी यादें सामने लाती है। फ्लॉयड की तरह टायसन की मौत के केंद्र में संयुक्त राज्य अमेरिका की पुलिस व्यवस्था है। और एक बार फिर से अमेरिकी सरकार एक्सपोज हुई है, जिसे दुनिया के किसी दूसरे कोने में होने वाली छोटी सी छोटी बातों की चिंता होती है, लेकिन अभी तक अपने घर में नस्लीय हिंसा का समाधान करने में कामयाब नहीं हो पाई है।

हम आपको बताते हैं, कि टायसन की हत्या कैसे हुई, इसने जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या की दर्दनाक यादें क्यों ताजा कर दीं हैं और अमेरिका की पुलिस के पैर नस्लीय हिंसा में कितने गड़े हुए हैं।

फ्रैंक टायसन ने कहा, 'मैं सांस नहीं ले सकता।'

ये घटना 18 अप्रैल की है, जब कैंटन पुलिस अधिकारियों ने को एक कार दुर्घटना की रिपोर्ट मिली थी, जिसमें एक वाहन बिजली के खंभे से टकरा गया था। एक चश्मदीद ने बताया, कि अपराधी पास के एक बार में भाग गया था। इस सुराग के बाद, पुलिस वहां पहुंचते हैं, और उन्हें पता चलता है, कि टायसन वो संदिग्ध है, जो घटनास्थल से भाग गया था।

पुलिस के शरीर पर लगे बॉडी कैमरा फूटेज से पता चलता है, कि टायसन और कैंटन पुलिस अधिकारियों के बीच टकराव हुआ और इसके बाद टायसन चिल्लाने लगा, कि 'वो मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं।'

हाथापाई के दौरान, पुलिसकर्मी टायसन को ज़मीन पर गिराने और उसे हथकड़ी लगाने में कामयाब हो जाते हैं। उनमें से एक पुलिसवाला उसकी पीठ को घुटने से दबा देता है और फिर खतरनाक तरीके से उसकी गर्दन को करीब 30 सेकंड्स तक दबाकर रखता है।

इस दौरान उसे बार बार ये कहते हुए सुना जा सकता था, कि " मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं। मैं अपनी गर्दन नहीं हटा सकता हूं।" एक अधिकारी चिल्लाता है "शांत हो जाओ" और "तुम ठीक हो।"

लेकिन, कुछ सेकंड्स के बाद टायसन की आवाज धीमी पड़ती गई और वो शांत पड़ गया।

वहीं, बॉडी कैमरा फ़ुटेज से पता चलता है, कि अधिकारियों को टायसन की गंभीर स्थिति का देर से एहसास हुआ। जिसके बाद उन्होंने सीपीआर शुरू किया और चिकित्सा सहायता मांगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद टायसन को मृत घोषित कर दिया गया।

जॉर्ज फ्लॉयड ने भी कहा था, 'मैं सांस नहीं ले पा रहा।'

"मैं सांस नहीं ले सकता" की चीखें जॉर्ज फ्लॉयड की दर्दनाक मौत की याद दिलाती हैं, जिनकी मौत ठीक वैसे ही हुई थी, जैसे टायसन की हुई है। मिनियापोलिस पुलिस अधिकारी ने जॉर्ज फ्लॉयड की गर्दन को घुटनों से काफी देर तक दबा रखा था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद पूरे अमेरिका में भीषण प्रदर्शन किए गये थे।

25 मई 2020 को, जॉर्ज फ्लॉयड को नकली 20 डॉलर के बिल का उपयोग करने के आरोप के बाद पुलिस ने हिरासत में लिया था। उस दौरान एक पुलिस अधिकारी डेरेक चाउविन ने नौ मिनट से ज्यादा समय तक फ्लॉयड की गर्दन पर अपना घुटना रखा था, और इस दौरान फ्लॉयड बार-बार "मैं साँस नहीं ले पा रहा" कह रहा था, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उसे नहीं छोड़ा।

जॉर्ज फ्लॉयड की मृत्यु के बाद ना सिर्फ संयुक्त राज्य में, बल्कि दुनियाभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन किए गये को जन्म दिया, बल्कि प्रणालीगत नस्लवाद और पुलिस क्रूरता पर भी दुनियाभर में बहस हुई थी। लेकिन, अमेरिका में नस्लीय हिंसा की वारदातें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

टायसन, फ्लॉयड और हजारों अन्य अश्वेत लोगों की मौतें, अमेरिकी पुलिस बलों के भीतर प्रणालीगत नस्लवाद के व्यापक और गहरे जड़ को दिखाती हैं।

दुनिया सुधर गई, अमेरिका नहीं!

भारत जैसे देश, जहां सुधार की प्रक्रिया काफी धीमी रही है, वो भी आजादी के 75 सालों के बाद जातियों में फैले अत्याचार पर बहुत हद तक अंकुश लगाने में कामयाब रहा है। भारत में जाति को लेकर होने वाली हिंसा को लेकर काफी सख्त सजा का प्रावधान है, लेकिन अमेरिका में नस्लीय हिंसा खतरनाक स्तर पर है।

2023 की एक रिपोर्ट में, नस्लीय न्याय और समानता को लेकर संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय स्वतंत्र विशेषज्ञ तंत्र ने पाया, कि अमेरिका में नस्लवाद- गुलामी और दास व्यापार की स्थायी विरासत रही है और गुलामी के बाद आने वाले सौ वर्षों के वैध रंगभेद उन्मूलन- नस्लीय प्रोफाइलिंग, पुलिस हत्याओं और कई अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों के मामले खतरनाक स्तर पर आज भी मौजूद हैं।

यूएन की रिपोर्ट में बताया गया है, कि संयुक्त राज्य अमेरिका में श्वेत लोगों की तुलना में अश्वेत व्यक्तियों की पुलिस हिरासत में मारे जाने की संभावना तीन गुना ज्यादा है, और उन्हें श्वेत लोगों की तुलना में अश्वेत लोगों को 4.5 गुना ज्यादा जेल भेजा जाता है।

ये उस अमेरिका की रिपोर्ट है, जो भारत में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों पर बिना अपनी गिरहेबां में झांके बोलता है। बस इसलिए, क्योंकि वो अमीर है।

यूएन रिपोर्ट में कहा गया है, कि अमेरिका में अफ्रीकी मूल के बच्चों को आजीवन कारावास की सजा दी जाती है, प्रसव के दौरान जेलों में बंद गर्भवती महिलाओं और जेलों में अश्वेत लोगों को 10 साल तक एकान्त कारावास में रखा जाता है और ये स्थिति काफी गंभीर है।

यूनाइटेड नेशंस की रिपोर्ट में कहा गया है, कि अगर अमेरिका में पुलिस हिरासत में 1000 लोगों की हत्या होती है, तो 1 प्रतिशत से भी कम मामलों में अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जाता है।

इसके अलावा, अगर पुलिस अधिकारी श्वेत समुदाय से होता है, तो ज्यादातर मामलों में उसकी जवाबदेही तय नहीं की जाती है।

इसके अलावा, अश्वेस समुदाय को लेकर अमेरिका का समाज पूर्वाग्रह से ग्रसित है और आज भी, अश्वेतों को सामाजिक आधार पर छूआछूत और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

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