ओरलैंडो में भारतीय इमरान ने कैसे बचाई 70 लोगों की जान

न्‍यूयॉर्क। पिछले रविवार को अमेरिकी राज्‍य फ्लोरिडा के ओरलैंडो स्थित गे नाइट क्‍लब में आतंकी हमले की यादें अभी तक लोगों के दिमाग में है। इस हमले में करीब 50 लोगों की मौत हो गई थी। हमले में मरने वालों की संख्‍या और बढ़ सकती थी अगर भारतीय मूल के पूर्व अमेरिकी मरीन सार्जेट इमरान यूसुफ ने सही मौके पर बुद्धिमानी से काम ना लिया होता तो।

How an Indian origin Imran saved life of 70 people in Orlando Florida US

हीरो बन गए हैं इमरान

इमरान अब अमेरिका में एक हीरो बन गए हैं। अमेरिका के न्‍यूजपेपर मरीन कॉर्प्‍स टाइम्‍स जो सेना से जुड़ी जानकारियों का पब्लिश करता है, उसने इमरान की तारीफों के पुल बांधें हैं। मरीन कॉर्प्‍स टाइम्‍स के मुताबिक यूसुफ पल्स नाइटक्लब में बतौर बाउंसर काम करते हैं। रविवार को जब उन्होंने नाइटक्लब में गोली चलने की पहली आवाज सुनी, तो सेना से जुड़े अपने अनुभव से तुरंत उन्होंने खतरे का अंदाजा लगा लिया।

इमरान ने खोला रात के डर का राज

नाइटक्लब में उस वक्त मौजूद सभी लोग डर से कांप रहे थे, ऐसे में यूसुफ खतरे को नजरअंदाज कर और नाइटक्लब के पीछे का गेट खोल दिया। कई लोगों ने इस दरवाजे से बाहर जाकर अपनी जिंदगी बिताई। इमरान ने उन्होंने 'सीबीएस न्यूज' चैनल को बताया कि नाइटक्लब में हॉल के पीछे लोग डर से चिल्ला रहे थे और वह 'दरवाजा खोलो', 'दरवाजा खोलो' चिल्ला रहा था। डर की वजह से कोई भी वहां से हिल नहीं रहा था।

इमरान की मां और नानी हिंदू

यूसुफ ने कहा कि उनके पास कोई और ऑप्‍शन नहीं था। अगर वहां रुकते तो फिर और लोगों की मौत हो जाती ऐसे में उन्‍होंने खतरा मोल लिया और दरवाजा खोलने की हिम्‍मत दिखाई। यूसुफ की मां व नानी हिंदू हैं। यूसुफ इसे अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे भीषण गोलीकांड मानते हैं। उन्होंने कहा कि उनके फौरन हरकत में आने से 60-70 जिंदगियां बच गईं।

बहादुरी के लिए मिला है पुरस्‍कार

चैनल के अनुसार, यूसुफ ने रोते हुए कहा कि काश मैं और लोगों को भी बचा सकता। बहुत से लोग मारे गए। यूसुफ ने पिछले माह ही मरीन कॉर्प्स छोड़ दी। मरीन कॉर्प्स टाइम्स के मुताबिक इमरान को सर्विस में रहते हुए नेवी एंड मरीन कॉर्प्स अचीवमेंट मेडल से सम्मानित किया गया था।

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