9/11 की वो सुबह जिसने दुनिया को हिलाकर रख दिया, लोग आज भी नहीं भूल पाएं दिल दहला देने वाली तस्वीर
11 सितंबर 2001 को अमेरिका ने एक ऐसे दिन का सामना किया जिसे दुनिया कभी नहीं भूल पाएगी। अमेरिका के इतिहास में यह अबतक का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। जब लोग रोज की तरह अपने जीवन में व्यस्त थे, ऐसे में अचानक ऐसी घटना हुई जिसने ना सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। अमेरिका के इतिहास में यह सबसे दुखद दिन के रूप में याद किया जाता है, जिसमे तकरीबन 3000 लोगों की जान चली गई।
न्यूयॉर्क शहर की यह सुबह पहले जैसी नहीं थी। लोग अपने ऑफिस जा रहे थे,बच्चे और छात्र स्कूल और कॉलेज के लिए निकल रहे थे, लोग हर रोज की तरह अपने काम में व्यस्त थे , लेकिन अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसकी भयावह यादों को लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं।

यह आतंकी हमला कई मायनों में काफी अहम था, पहली बार आतंकियों ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश को अपना निशाना बनाया और पहली बार यात्री विमान का इस्तेमाल आतंकी हमले के लिए किया गया।
4 विमानों को किया गया हाईजैक
अल कायदा के आतंकियों ने 4 यात्री विमानों का अपहरण कर लिया था। ये लोग इन विमानों को अलग-अलग जगह पर क्रैश कराना चाहते थे। सुबह 8.46 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टावर पर हमले के 17 मिनट बाद सुबह 9:03 बजे यूनाइटेड एयरलाइंस की फ्लाइट 175 दूसरे टावर से टकरा गई। दोनों टावर्स में आग लग गई और धुएं के गुबार ने न्यूयॉर्क के आसमान को ढक लिया।
आतंकियों ने तीसरे विमान को सुबह 9.37 बजे अमेरिक एयरलाइंस की फ्लाइट 77 अमेरिका के रक्षा मंत्रालय पेंटागन से टकरा गई। इसके बाद चौथे विमान को आतंकियों ने पेंन्सिलवेनिया के शैक्सविले के मैदान में क्रैश कर दिया।
सैकड़ों बचावकर्मियों की गई जान
इस घटना में चार विमानों में सवार 246 लोगों की जान चली गई। जबकि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के करीब इलाकों में 2606, पेंटागन में 125 लोगों की जान चली गई। इस हमले में 344 बचावकर्मी, 71 पुलिसकर्मी, 55 सैन्य कर्मियों की भी मौत हुई थी।
त्रासदी की यादें ताजा
इस त्रासदी ने अमेरिका और पूरी दुनिया को झकझोर दिया। हजारों परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया, पूरा देश गहरे शोक में डूब गया। इस आतंकी हमले में जिस तरह से सुरक्षाकर्मियों, फायरफाइटर्स ने लोगों को बचाने में अपने जान गंवा दी, उसे लोग आज भी नहीं भूल सकते हैं।
18000 लोगों को बचाया गया
हमलों के परिणामस्वरूप 70 से अधिक देशों के 2,974 लोग मारे गए। मरने वालों में 343 अग्निशमन कर्मी और 60 पुलिस अधिकारी शामिल थे, जिन्होंने आपातकाल का बहादुरी से सामना किया। हमलों के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर परिसर में लगभग 18,000 लोग मौजूद थे, जिसके बाद कई लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
पाकिस्तान में ढेर हुआ लादेन
अलकायदा के ओसामा बिन लादेन ने अपने करीबी सहयोगी खालिद शेख मोहम्मद के साथ मिलकर इस भयावह घटना की साजिश रची थी। इसके बाद बिन लादेन की तलाश में दुनियाभर में अभियान चलाया गया और आखिरकार पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी सेना ने सीक्रेट अभियान में उसे ढेर कर दिया।
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