अमेरिका की नाक के नीचे से ताइवान के ‘मित्रों’ को अपने पाले में कर रहा चीन, 7 सालों में छीन लिए 9 देश
आपको बता दें कि चीन से पहले अमेरिका ने ताइवान को मान्यता दे रखी थी लेकिन साल 1979 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के कार्यकाल में रिपब्लिक ऑफ चाइना की मान्यता को खत्म कर दिया गया।

Image: Oneindia
होंडुरास ने ताइवान के साथ 82 साल पुराना राजनयिक संबंध तोड़ने का फैसला किया है। होंडुरास की राष्ट्रपति शियोमारा कास्त्रो ने ताइवान संग संबंध तोड़ने का ऐलान करते हुए कहा कि उनकी सरकार चीन से राजनयिक संबंध स्थापित करना चाहती है। होंडुरास के इस कदम के बाद ताइवान को संप्रभु देश मानने वाले देशों की संख्या कम होकर केवल 13 रह गई है। त्सा ई इंग वेन के मई 2016 में राष्ट्रपति बनने के बाद से चीन बड़ी तेजी से ताइवान के सहयोगी देशों को अपने पाले में करने में लगा हुआ है। बीते सात सालों में ताइपे ने अपना नौवां राजनयिक सहयोगी गंवा दिया है।
ताइवान को अपना हिस्सा बताता है चीन
आपको बता दें कि चीन उन देशों के साथ राजनयिक संबंध नहीं रखता, जिन्होंने ताइवान को एक देश के तौर पर मान्यता दे रखी है। चीन की दुनिया में बढ़ती धमक की वजह से उन देशों के साथ मुश्किलें बढ़ चुकी हैं जिन्होंने ताइवान संग रिश्ता रखा है। चीन शुरू से ही ताइवान को अपना हिस्सा बताता है और दुनियाभर से वन चाइना पॉलिसी का पालन करने की अपील भी करता है। यही वजह है कि ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध रखने वाले देशों की संख्या तेजी से कम हो रही है।
निकारागुआ ने भी संबंध तोड़ा
होंडुरास से पहले निकारागुआ ने दिसंबर 2021 में ताइवान के साथ अपने राजनयिक संबंध खत्म कर लिया था। इससे पहले चीन ने पनामा, अल सल्वाडोर और डोमिनिकल रिपब्लिकन को अपने पाले किया था। हालांकि ग्वाटेमाला और पराग्वे जैसे कुछ गिने चुने देश हैं जिन्होंने अभी भी ताइवान को मान्यता दे रखी है। ताइवान को मान्यता देने वाले देशों में बेलीज, ग्वाटेमाला, पराग्वे, हैती, सैंट किट्टस, सेंट लूसिया, सेंट विसेंट, मार्शल द्वीप समूह, नाउरू, पलाउ, तुवालू, इस्वातिनी और वेटिकन सिटी शामिल हैं।
अमेरिका ने भी नहीं दी है मान्यता
बीते कुछ समय से ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका के बीच विवाद गहरा चुका है। अमेरिका, ताइवान की पीठ क्यों न ठोकता रहे, उसने खुद भी ताइवान को मान्यता नहीं दे रखी है। हालांकि चीन से पहले अमेरिका ने ताइवान को मान्यता दे रखी थी लेकिन साल 1979 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर के कार्यकाल में रिपब्लिक ऑफ चाइना की मान्यता को खत्म कर दिया गया।
भारत का क्या है स्टैंड?
भारत ने 1949 से ही ताइवान की जगह चीन को मान्यता दे रखा है। भारत ने ताइवान के साथ व्यापार और सांस्कृतिक संबंध बनाए रखा है। हालांकि भारत ने साल 2008 से आधिकारिक बयानों और संयुक्त घोषणापत्रों में एक चीन नीति का जिक्र करना बंद कर दिया है। दरअसल उस दौरान चीन, अरुणाचल प्रदेश को अपना इलाका बताने लगा था। जिसके बाद भारत ने 'एक चीन नीति' का जिक्र करना बंद कर दिया।












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